लेखक परिचय

राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन

लेखक सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं

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betiआप मोदी के समर्थक हों या विरोधी यह आप पर निर्भर है। भले काम करने के तरीके पर सवाल उठाईये लेकिन एक प्रधानमंत्री के तौर पर उन मुद्दों को तरजीह देना जिन पर कितने वर्षों से कोई सवाल नहीं उठा रहा, इसे सभी को मोदी से सीखने की जरूरत है।

चाहे मुद्दा नशाखोरी का रहा हो या हाल ही में बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ योजना। यह योजना कितनी सफल होगी या असफल यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन मोदी का ये ऐलान एक सूकून देता है कि हां देश ने ढंग का प्रधानमंत्री चुना है। जिसका ध्यान केवल बार्डर और जीडीपी पर नहीं बल्कि समाजिक मुद्दों पर भी है।

हम अगर बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ योजना की बात करें तो यह योजना कई मायने में सही है और अधिक से अधिक धार देना समय की मांग है। बेटी को गर्भ मे ही मार देने की गंदी प्रथा ने शुरू से ही भारत के लिंग अनुपात पर खासा असर डाला है। हरियाणा, राजस्थान, पंजाब जैसे राज्यों में हालत और भी ज्यादा खराब है।

हर वक्त बेटियों के लिये मन में घृणा भाव रखने वाले समाज ने शायद अब तक अपना आईना नहीं देखा है। अगर आंकड़ो की बात करें तो हरियाणा के शिमली में 1000 लड़को पर केवल 388 लड़कियां हैं। यह एक बेहद चिंताजनक आंकड़ा है। ऐसा नहीं है लिंग अनुपात के इस बड़े विभेद को खत्म करने के लिये पहले की सरकारों ने कोई कदम नहीं उठाया लेकिन उसका कोई खास असर देखने को आज तक नहीं मिला।

2011 की जनगणना के अनुसार अगर पूरे देश में लिंग अनुपात 1000 पर 940 है लेकिन उत्तर के हिस्से में हरियाणा की हालात हद से ज्यादा खराब हैं। हरियाणा के पानीपत  जिले के 74 गांव ऎसे हैं जहां का लिंगानुपात 900 या इससे अधिक है और 198 गांवों में लिंगानुपात 801 से 900 तक है। यहां 1000 लड़कों पर 879 लड़कियां हैं।

दुनिया भर में खुद को विश्वगुरू कहलाने की लालसा वाला रखने भारत के सामने हालात ऐसे हैं कि 2.30 करोड़ लड़कों को 2020 में शादी के लिये लड़की नहीं मिलेगी। हम दुनिया में बहुत आगे जा चुके होगें लेकिन हमारे देश की आंतरिक स्थिति बहुत ही खराब होगी।

मोदी ने अपनी योजना की शुरूआत हरियाणा से की है क्योंकि वहां के हालात बाकी  जगहों से बहुत ज्यादा खराब हैं। हम अगर राजस्थान की बात करें तो वहां 1000 लड़कों पर 928 लड़कियां हैं, पंजाब में 1000 पर 895। देश की राजधानी दिल्ली का दिल भी इस मामले में बहुत कमजोर साबित हो रहा है। 2011 के आकड़ों पर गौर फरमायें तो पता चलता है कि यहां 1000 लड़कों पर सिर्फ 868 लड़कियां हैं।

आंकड़ों को देखकर तो  यही लगता है कि पूर्व में चलायी गयी योजनायें या तो ढंग से क्रियान्वन न होने के कारण ठंडी पड़ गयी या फि सरकारी लालफीताशाही का शिकार। इस मामले में सबसे अच्छे हालात पांडिचेरी के हैं। जहां 1000 लड़कों पर 1037 लड़कियां हैं। लेकिन कुछ के आदर्श स्थिति में आ जाने से पूरे मुल्क की रवायत नहीं लिखी जा सकती।

कहने वाले कह सकतें हैं कि बेटियों के लिये बहुत सी योजनायें चली हैं, और ये भी उनमें से एक हैं। लेकिन ये बहुत कम देखने को मिलता है कि देश का प्रधानमंत्री सामाजिक सरोकारों से जुड़ें मुद्दों पर इतनी रूचि लेता हो। बेहतर हो कि ये योजना सफल हो और प्रधानमंत्री मोदी के साथ साथ सभी को ये संकल्प करना चाहिये कि बेटी है तो खुशियां हैं, बेटी है तो कल है।

 

4 Responses to “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”

  1. sureshchandra.karmarkar

    राहुलजी,सामाजिक दृष्टि से और सामाजिक दवाब से जब तक व्यक्ति प्रभावित नहीं होगा तब तक इस समस्या का हल नहींहोगा. मध्यप्रदेश मैं लड़कियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाये सरकार ने शुरू की है. लाड़ली लक्ष्मी योजना/निशुल्क सायकिल योजना/ गावं की बेटी योजना पिछड़ा एवं अ.ja. /अजजा लड़कियों के लिए मेरिट छत्रवृत्ति योज्ञक़िन्तु हमारा समाज वहां का वहीं है. रतलाम जिले का ताजा किस्सा है. बहु को २ पुत्रियां होने पर ससुर बहु को कुछ उलाहने दे रहा था,इस पर उसके पुत्र ने आपत्ति ली ,तो बाप ने पुत्र की हत्या कर दी. इतना ही नहीं माँ ने इसमें साथ दिया. अब उस युवा के माँ बाप जेल मैं है. अगड़े/पिछड़े/शिक्षित/अशिक्षित /गरीब/अमीर /ग्रामीण/शहरी मैं अधिकांश इस मानसिकता से पीड़ित हैं.inhe बेटी नहीं बेटा चाहिए. इस समस्या का एक ही इलाज है ,धर्माचार्यों से निवेदन किया जाय की वे अपनी कथाओं और धार्मिक प्रवचनों मैं इस समस्या पर मानवतावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करे. और यह नियम बनाये की मृत्यु के उपरांत ”मुखाग्नि”एवं पिंड क्रिया पुत्रियां भी कर सकती हैं. जब लड़कियों ने युद्ध किये हैं,शास्त्रार्थ किया है, पुरुषोचित सब कार्य किये है. तो पुत्र के कार्य करने की वह अधिकारिणी क्यों न हो?यदि शास्त्रों और संहिताओं मैं ऐसे नियम और मान्यता हो उन्हें बदलना चाहिए. नरेंद्र भाई मोदी एक धर्म संसद बुलाएं और इस सामाजिक समस्या को हल करने मैं इनके सुझाव आमंत्रित करें.

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  2. आर. सिंह

    आर. सिंह

    राहुल सांकृत्यायन जी आपका नाम तो बहुत ही अच्छा है और आपने बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ वाले अभियान की जो सराहना की है,वह भी अपनी जगह पर ठीक है,पर मुझे एक प्रश्न नमो सहित उन सब लोगों से पूछनी है ,जो इस पहल पर अपनी ख़ुशी जाहिर कर रहे हैं कि इसे केवल एक दिखावा मात्र क्यों न समझा जाए? क्या जशोदा बेन किसी की बेटी या बहन नहीं हैं? फिर उनके साथ नमो का यह दुर्व्यवहार क्यों?अपनी अर्धांगिनी के अस्तित्व से भी इंकार करने वाला व्यक्ति ,अगर इस तरह की बात करता है,तो वह एक मजाक और दिखावा मात्र ही लगता है.

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    • narendrasinh

      mr.r sinh

      lagta hai aap ko samany gyan bhi nahi hai are jis vyakti ne desh seva me apani jindgi laga di ho us par ungli uthana kitna vajib hai?

      maine pehe bhi likhtha tha aap jaise dogle log desh ko nuksan pahuchate hai aaj sabhi padhne vale is bat ko sach manenge?

      aap ki bahot hi ghatiya soch aaj aapne khud ujagar kar di hai r sinhji!!!

      aap ye kaise keh sakte hai ki kisi ne kisik sath anyay kiya jara nko milo or jano tab pata chalega??

      aapne apani chhoti soch se aapki lekhini ka apman kiya hai???

      agar kuchh posotive kar nahi sakte to chup bethiye rayta kyon felate hai ???

      sharm aani chahiye aapko?

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  1.  बेटी है तो कल है – बाशिंदा

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