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    विकास की रोशनी से जगमगाता अनुसूचित जाति समाज

    मनोज कुमार
    साल 2005 से लेकर अब तक सबका साथ, सबका विकास को लेकर चर्चा करते हैं तो बिना किसी तर्क-कुतर्क मध्यप्रदेश पहले नम्बर पर आता है. हर जाति, वर्ग और धर्म का पूरा सम्मान करने की मध्यप्रदेश की संस्कृति है. अनादिकाल से गुरुजनों के बताये रास्ते पर चलकर हरेक के लिए समभाव इस प्रदेश की पहचान रही है. संत रविदास सामाजिक विकृतियों और छूआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ थे और सामाजिक बदलावों के लिए उन्होंने अपने दौर में कई साहसिक प्रयोग भी किए थे. आज मध्यप्रदेश इस बात के लिए स्वयं को गौरवांवित महसूस करता है कि महापुरुषों के कथन को चरितार्थ करने में उसने पूरे प्राण-प्रण से कार्य किया है. मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति जनसंख्या के क्रम में आठवां है लेकिन अनुसूचित जाति समाज के कल्याण के लिए किये गये कार्यों में वह प्रथम पंक्ति में खड़ा दिखाई देता है. अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए जो कार्य मध्यप्रदेश सरकार ने किया है, वह आंकड़ों की बाजीगरी नहीं बल्कि अनुसूचित जाति को शून्य से शिखर पर ले जाने की मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के संकल्पों का सुपरिणाम है.
    किसी भी समाज का पूर्ण विकास शिक्षा से होता है और शिक्षित समाज नईदुनिया की रचना करता है. मध्यप्रदेश शासन ने गांव के स्कूल से लेकर विदेशी शिक्षा का रास्ता मुकम्मल किया है. प्रयासों और परिणामों के साक्षी हैं वो आंकड़ेें जो विद्यार्थियों के शैक्षिक कल्याण पर व्यय किये गये हैं. जैसे 4 सौ 48 करोड़ विद्यार्थियों को 4 सौ 80 करोड़ का पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का वितरण किया गया. राज्य छात्रवृत्ति के रूप में 154 करोड़ की छात्रवृत्ति का करीब साढ़े सोलह लाख विद्यार्थियों को मिला. विदेश में अध्ययन के लिए प्रति वर्ष 50 विद्यार्थियों का चयन किया जाता है. इसमें से प्रत्येक विद्यार्थी को 50 हजार यूएस डॉलर की छात्रवृत्ति दी जाती है. इस समय दुनिया के श्रेष्ठ शैक्षिक संस्थानों में 54 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को समाज की मुख्यधारा में जोडऩे का मध्यप्रदेश का यह अनूठा प्रयास है. राज्य में करीब साढ़े तिरासी करोड़ की लागत से 10 कन्या छात्रावास भवन का निर्माण किया जाना है. इन छात्रावासों में 1750 छात्राओं के रहने की व्यवस्था होगी. वहीं 94 हजार विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधा हेतु 1913 छात्रावासों का संचालन हो रहा है. गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा हेतु 640 सीटर वाले 10 ज्ञानोदय विद्यालयों का संचालन हो रहा है. राज्य के अनुसूचित विद्यार्थियों के लिए 1933 छात्रावासों में मेस संचालन हेतु शिष्यवृत्ति राशि 106.20 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इसी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा पूर्व तैयारी हेतु 7 प्रशिक्षण केन्द्रों का संचालन.
    शिक्षा किसी समाज के विकास की पहली शर्त है तो रोजगार एक सुखद भविष्य की गारंटी. राज्य शासन के प्रयास इस दिशा में सार्थक होते दिख रहे हैं. अनुसूचित जाति के युवाओं के लिए रोजगार एवं प्रशिक्षण के लिए 32.41 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिसमें 8 हजार युवाओं को लाभ मिलेगा. इसी तरह करीबन 53 हजार युवाओं को कृषि एवं उससे जुड़े सहयोगी व्यवसाय से अतिरिक्त आय के लिए 52.85 करोड़ का प्रावधान. शिक्षा के साथ रोजगार देने के उपायों से अनुसूचित जाति के युवाओं के लिए राज्य में नए द्वार खुल रहे हैं. उनके लिए शिवराजसिंह सरकार ने आसमान और ऊंचा कर दिया है ताकि वे और उड़ सकेंं.
    मध्यप्रदेश में 2011 की जनगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 15.60 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति निवास करती है जबकि पूरे देश में इसका प्रतिशत 16.60 है. मध्यप्रदेश की शिवराजसिंह सरकार केन्द्र की मोदी सरकार के साथ इन वर्गों के कल्याण के लिए कदमताल कर रही है. केन्द्र सरकार भी अनुसूचित जाति के विकास के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है. इसको आगे बढ़ाने का कार्य शिवराजसिंह सरकार कर रही है. शिवराजसिंह सरकार के कार्यों का सुपरिणाम यह रहा कि ‘प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना’ में मध्यप्रदेश ने अव्वल स्थान पाया है. मध्यप्रदेश के 140 करोड़ की राशि व्यय कर ‘प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना’ के अंतर्गत 1070 गांवों में 3161 कार्य प्रगति पर हैं. राज्य के अनुसूचित जाति बस्तियों के विकास के लिए 30 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है.
    संत रविदास ने कहा था कि-
    जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
    रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।
    राज्य में अस्पृश्यता निवारण के लिए वर्ष 2007 में जिला स्तरीय पंचायत पुरस्कार की स्थापना की गई है. इस पुरस्कार के तहत सर्वश्रेष्ठ पंचायत को प्रति वर्ष एक लाख का पुरस्कार प्रदान किया जाता है. इस पुरस्कार का उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है. नियमनानुसार इस पुरस्कार के लिए अनुसूचित जनजाति बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार जैसे स्वच्छता, बिजली, पानी, सडक़ आदि की समुचित व्यवस्था करना एवं इन वर्गों के खिलाफ न्यूनतम अपराधिक मामले या एस्ट्रोसिटी की घटना ना हुई हो. छुआछूत को रोकने लिए जागरूकता कार्यक्रम, अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन, ऋणमुक्ति के उपाय, गांव के तालाब का उपयोग करने की छूट हो जहां अन्य जाति के लोग निस्तार करते हों. यह भी प्रावधान है कि संबंधित ग्राम पंचायत में इन वर्गो की शिक्षा 60 प्रतिशत हो जिसमें 30 प्रतिशत महिलायें शिक्षित हों. साथ ही ग्राम पंचायत में होने वाले भोज में इन वर्गों को शामिल किया जाए.
    शिवराजसिंह सरकार संत रविदास के निम्रलिखित दोहे को जाने का प्रयास करती है जिसमें वे कहते हैं-
    ऐसा चाहू राज में मिले सबन को अन्न
    छोट बड़ो सम बसे रैदास रहे प्रसन्न
    मध्यप्रदेश सामाजिक समरसता का बेमिसाल प्रदेश है. खासतौर पर महापुरुषों के आदर्श को चरितार्थ करते संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अक्षरश: जीते हैं. उनकी कार्यशैली में सबके लिए समान अधिकार हैं. वे एक ऐसे प्रदेश का निर्माण करने में जुटे हुए हैं जहां सर्वधर्म समभाव तो हो ही, एक नवीन भारत का सपना भी सच हो.

    मनोज कुमार
    मनोज कुमार
    सन् उन्नीस सौ पैंसठ के अक्टूबर माह की सात तारीख को छत्तीसगढ़ के रायपुर में जन्म। शिक्षा रायपुर में। वर्ष 1981 में पत्रकारिता का आरंभ देशबन्धु से जहां वर्ष 1994 तक बने रहे। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समवेत शिखर मंे सहायक संपादक 1996 तक। इसके बाद स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्य। वर्ष 2005-06 में मध्यप्रदेश शासन के वन्या प्रकाशन में बच्चों की मासिक पत्रिका समझ झरोखा में मानसेवी संपादक, यहीं देश के पहले जनजातीय समुदाय पर एकाग्र पाक्षिक आलेख सेवा वन्या संदर्भ का संयोजन। माखनलाल पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रकारिता विवि वर्धा के साथ ही अनेक स्थानों पर लगातार अतिथि व्याख्यान। पत्रकारिता में साक्षात्कार विधा पर साक्षात्कार शीर्षक से पहली किताब मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा वर्ष 1995 में पहला संस्करण एवं 2006 में द्वितीय संस्करण। माखनलाल पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से हिन्दी पत्रकारिता शोध परियोजना के अन्तर्गत फेलोशिप और बाद मे पुस्तकाकार में प्रकाशन। हॉल ही में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित आठ सामुदायिक रेडियो के राज्य समन्यक पद से मुक्त.

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