लेखक परिचय

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी

लेखक एन.डी. सेंटर फार सोशल डेवलपमेंट एंड रिसर्च के अध्यक्ष हैं।

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पंकज चतुर्वेदी

देश भर में उठा यह नया तूफान निश्‍चय ही सत्तारूढ़ दल को हतप्रभ करने वाला है | गाँधी ,विनोबा और जयप्रकाश के बाद संभवता अन्ना वो पहले व्यक्ति है ,जो सत्ता विहीन तो है पर सत्ता का सारा ताम-झाम उनके आगे बौना साबित हो रहा है | वैसे इस सब में आज के संचार माध्यमों,मीडिया और सोशल नेट वर्किंग साईट का अपना –अपना योगदान भी है |यहीं पर अन्ना और ऊपर उल्लेखित अन्य लोगों में अंतर भी आ जाता है | ऊपर जिस क्रम में तीन विभुतियों के नाम है शायद वही क्रम उनकी महत्वता को भी दर्शाता है| इस सब के बाद भी अन्ना की मुहिम को कम नहीं मानना चाहिए |

यह सब कुछ इतना अप्रत्याशित एवं तेजी से हुआ कि दिल्ली की सरकार भी समझ नहीं पाई की कब राई से पहाड़ बन गया और इस पहाड़ की हर एक चोट ने सरकार को ऊपर से नीचे तक हिला कर रख दिया | भ्रष्टाचार से पीड़ित इस देश की आम जनता ने इस आंदोलन में जिस तरह से भागीदारी की है वह एक नए परिवर्तन की ओर संकेत करता है | इस सब से एक बात ओर सिद्ध होती है कि अब भ्रष्टाचार का घड़ा भर चुका है| लोग अब और बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है |

अब दो रास्तें है पहला कि इस घड़े को फ़ेंक दिया जाये क्योकि देश की नयी पीढ़ी अब इस बोझ को और नहीं ढोना चाहती |नहीं तो दूसरा यह होगा कि वर्तमान सत्ता व्यवस्था इस बोझ के नीचे दब जायेगी | नयी पीढ़ी को ऐसा लग रहा कि अभी अन्ना ने लोहा गर्म कर दिया है .यह एक ऐसा अवसर है जबकि गर्म लोहे पर चोट कर के अपनी सोच और जरुरत के अनुसार आकार दे दिया जाये | नहीं फिर सुधार और परिवर्तन के लिए पूरी कवायद नए सिरे से करनी पड़ेगी |

अन्ना के इस आंदोलन में बस एक बात इस बार खटक रही है कि पिछली बार राज-नेताओं को अपने आंदोलन से दुत्कार कर भागने वाले अन्ना और उनके सहयोगी अब कांग्रेस की विरोधी पार्टी और संगठनो के मिल रहें खुले समर्थन पर खामोश है | जो दल अन्ना के जन लोकपाल पर मुंह –नाक बनाते रहें है वो ही आज अन्ना के लिए गला फाड़कर चिल्ला रहें है | उन दलों के द्वारा खुले आम अन्ना के आंदोलनकारियों के भीड़, भोजन से लेकर भजन तक की व्यवस्थाएं जुटाई जा रही है | वैसा राज –दलों के लिए यह कोई नयी बात नहीं है ,अब राजनीति में दोहरा चरित्र एवं आचरण अचरज की बात नहीं है और इसीलिए तो इतने बड़े आंदोलन का नायक कोई राजनितिक दल या राज नेता नही अपितु एक साधरण व्‍यक्ति है | वर्तमान राजनीति का मूल स्वरूप सत्ता सिंहासन को हिलाने और हथियाने के लिए सारे दांव –पेंच को ठीक मानता है |बस डर इस बात का है कि कही राजनीतिक दल अन्ना के इस आंदोलन को अपनी वोट लेने की भट्टी का ईंधन न बना ले और बाद में अन्ना स्वयं को ठगा सा महसूस करें|

प्रथमदृष्ट्या ऐसा लगता है कि इस सब में कांग्रेस का कुछ नुकसान जरुर हुआ है लेकिन इतिहास गवाह है कि जनता जल्दी ही सब भूल जाती हैं | विपक्षी दल कितनी भी जोर –जोर से आपातकाल का प्रलाप करें ,पर असल आपातकाल के बाद भी कांग्रेस सत्ता में लौटी थी और अंतरालों के बाद आज भी सरकार सम्हाल रही है |

बड़ा सवाल यह है कि इस आन्दोलन से क्या परिवर्तन होगा ?क्या जन-लोकपाल से इस देश की हर व्याधी का उपचार संभव है ? असल समस्या यह है कि हमने सही मायनों में नैतिकता को ताक पर रख दिया है |आज –कल यह शब्द पाठ्यक्रमों से लेकर मन-मस्तिष्क से गायब है | हमारा चरित्र एवं आचरण अब नैतिकता विहीन हो चला है | और यही विष की गांठ है | हमारी नयी प्रवृत्ति नैतिक ना होकर निजी होती जा रही है | हम हमारे निजी लाभ और स्वार्थ को ही देश हित मान बैठे है |गाँधी जी ने हिंद स्वराज पुस्तक को सन १९०९ में लिखा था लेकिन यदि हम उस पर आज भी अमल कर लें तो अभी भी परिस्थितियों को पतन से उत्थान की और मोड़ा जा सकता है |अन्ना के समर्थन में उठ रहे हर हाथ को अन्ना जिंदाबाद के साथ ही अपने दिल पर हाथ रखकर यह सोचना चाहिए की क्या वो हाथ सही मायनों में नैतिक और ईमानदार है?

क्या उसका अन्तकरण निस्वार्थ और शुद्ध है ? यह सब बातें अन्ना की चौकडी से लेकर अन्ना जिन्दाबाद करने वाले हर आदमी से लेकर आप और मुझ पर भी लागू होती है |यदि हम सब अपना स्वयं का जन –लोकपाल बना लें और स्वयं को उसके दायरें में शामिल कर गलती पर स्वदंड निर्धारित कर लें ,तो फिर किसी अन्ना और आन्दोलन की जरुरत ही नहीं पड़ेगी | लेकिन तकलीफ यह है की हमारे अंदर का आंदोलन मर चुका है है और हम अपने नैतिक उद्धार के लिए बाहरी आंदोलनों के मोहताज है |हमरी अंतर -आत्मा सो रही है |यदि यह सब जागृत हो जाये तो हो सकता की भविष्य में इस तरह के आंदोलनों पर खर्च होने वाले संसाधन चाहे वो किसी ने भी जुटाए हो , देश निर्माण में या अन्य किसी जरूरतमंद के काम आ सकें |

हम खुद यह प्रण कर लें कि हम किसी भी सूरत में किसी को रिश्वत नहीं देंगे ,और जब रिश्वत नहीं देंगे तो लेने का साहस स्वत ही समाप्त हो जायेगा | हम आज ही से आपने अंदर झांके और जब तक हम नहीं सुधरे तब तक अनशन करे तो इस देश की तस्वीर बदल जायेगी | नहीं तो कितने भी अन्ना, आंदोलन और कानून आ जायें सब निरर्थक साबित होंगे |

लेखक –एन.डी.सेंटर फोर सोशल डवलपमेंट एंड रिसर्च के अध्यक्ष है

One Response to “आंदोलन से पहले आवश्‍यक है आत्म सुधार”

  1. Shailendra Saxena

    आदरणीय अन्ना जी ,
    जय माई की ,
    अन्ना जी आप ने देश को जगा दिया है
    देश १००% अन्ना जी के साथ हूँ.
    हम सभी अन्ना जी के लिए गंज बासोदा मैं प्रतिदिन
    कार्यक्रम करवा रहे हैं
    राष्ट्रपति जी, अन्ना जी की पूरी सुरक्षा करें
    . उनको कुछ भ्रष्ट लोग निशाना बना सकते हैं .
    देश मैं लगभग सारे (९०% नेता भ्रष्ट हैं ) चाहे वे किसी भी दल के हों .
    सभी राज्यों के अधिकांश मुख्य मंत्री , मंत्री व विधायक भी भ्रष्ट हैं जनता व युवा वर्ग को
    इनका भी घेराव करना चाहिए.
    अन्ना जी अगले चुनाव मैं पढ़े लिखे ईमान दार लोगों को चुनाव लढ़वाएं या फिर इमानदार
    लोगों का समर्थन करें पुरे देश मैं एक वार फिर से चुनाव होना चाहिए पुरे देश की विधानसभाओं के
    विधायकों की वेइमानी व भ्रस्टाचारी जग जाहिर है .अन्ना जी किसी भी कीमत पर पीछे मत हटना पूरा देश आपके साथ है .
    शैलेन्द्र सक्सेना “आध्यात्म” एवं मुक्ता सक्सेना , संचालक असेंट इंग्लिश स्पीकिंग कोचिंग ,बरेठ रोड गंज बासोदा जिला विदिशा म. प्र .पिन- ४६४२२१. फ़ोन – ०७५९४-२२१५६८, मो. – ०९८२७२४९९६४, ०९९०७८२०१३१.
    जय अन्नाजी जय रामदेवजी

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