लेखक परिचय

जयराम 'विप्लव'

जयराम 'विप्लव'

स्वतंत्र उड़ने की चाह, परिवर्तन जीवन का सार, आत्मविश्वास से जीत.... पत्रकारिता पेशा नहीं धर्म है जिनका. यहाँ आने का मकसद केवल सच को कहना, सच चाहे कितना कड़वा क्यूँ न हो ? फिलवक्त, अध्ययन, लेखन और आन्दोलन का कार्य कर रहे हैं ......... http://www.janokti.com/

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sex-discussionइतनी आपा-धापी और उथल-पुथल भरे राजनितिक व आर्थिक परिदृश्य में बांकी चिन्ताओ से परे ‘सेक्स चर्चा’ -स्त्री विमर्श की आड़ में खूब फल- फूल रहा है। क्या आउटलुक और क्या ब्लॉग! मोहल्ले की फैलाई इस बीमारी ने किस-किस को संक्रमित कर दिया कहना मुश्किल है! इसके बरक्स कई अन्य ब्लोगरों की सामाजिक सरोकार वाले आलेख एक अदद टिप्पणी की बाट जोहते -जोहते सरकारी दफ्तरों के पुरानी फाइल की भांति धूल फांक रहा है। ‘मोहल्ले’ पर सविता भाभी को लेकर बड़ा बबाल मचा । सम्बंधित पोस्ट पर गर्दाउड़ान गाली-गल्लम भी हुआ। सेक्स चर्चा को जिस परिप्रेक्ष्य में विचार -विमर्श का केन्द्र बिन्दु बनाया गया , उसमें अधिक से अधिक टिप्पणी पाने अतिरिक्त कोई और उद्देश्य नहीं दिखता है। मुझे सेक्स को लेकर बहस करने से परहेज नहीं है। निश्चित रूप से आज सेक्स को लेकर हमें नए सिरे से सोचने की, नया दृष्टिकोण अपनाने की जरुरत है। लेकिन उद्देश्य सार्थक हो।

समय चक्र परिवर्तित हुआ है , जिस वज़ह से अनेक पुरानी परम्पराएँ टूटती नज़र आ रही है। कल का सम्भोग आज सेक्स का रूप ले चुका है। सेक्स केवल बंद कमरों के भीतर बिछावन तक सीमित न हो कर शिक्षा मंदिरों (डीपी एस दिल्ली की घटना याद होगी) से होते हुए कार्य स्थली (कॉल सेंटरों की कहानी भी आप तक पहुँच गई होगी) तक विस्तार ले चुका है। पाश्चात्य का अनुकरण किसी और क्षेत्र में तो नहीं परन्तु सेक्स और भ्रष्टाचार के मामले में जम कर हुआ है। कुछ लोग इसे मेट्रो शहरों में सीमित बताते हैं जबकि ये मसला भी महानगरीय उच्च -मध्य वर्गो (अर्थात विकासशील इंडिया) से निकल कर देहातों में मध्य- निम्न वर्गो (गरीब भारत जिसे अमेरिकाऔर यूरोप वाले रियल इंडिया कहते हैं) तक फ़ैल चुका है। ऐसा भी नहीं है कि यह सब अचानक हो गया । किसी भी सामाजिक परिवर्तन / बदलाव के पीछे कई छोटी -बड़ी ,साधारण से साधारण घटनाएँ सालों से भूमिका बना रहे होते हैं । यहाँ में जिस बदलाव की बात कर रहा हूँ वो यु ही नहीं हुआ उसके पीछे सूचनातंत्र की महती भूमिका रही है। हालाँकि सूचना क्रांति ने हमें काफी सुख-सुविधाएं मुहैया करायी लेकिन भारतीय समाज को उससे बहुत बड़ा घाटा हुआ है। विज्ञान का ये वरदान हमारी संस्कृति के लिए अभिशाप ही साबित हुआ । चलिए अतीत में बहुत दूर न जाकर स्वतंत्र भारत को लेकर आगे बढ़ते हैं। हम बात कर रहें हैं सेक्स के सामाजिक सन्दर्भों की । अवैध संबंधो को अब तक भारत में सामाजिक मान्यता नहीं मिली है बावजूद इसके व्यक्तिगत स्वतंत्रता की छतरी लगाये अनैतिकता से बचने की कोशिश जारी है। आज कदम -कदम पर आधुनिकता के नाम पर सामाजिक दायरे, सदियों से चली आ रही परम्पराए तोड़ी जा रही हैं। मुझे पता है आप कहेंगे कि परम्पराएँ टूटनी ही चाहिए। ठीक हैं मैं भी कहता हूँ, हाँ पर वो परम्पराएँ ग़लत होनी चाहिए। ध्यान रहे कभी प्रथाएं नहीं टूटी बल्कि कुप्रथाएं तोड़ी गई हैंऔर इसे बदलाव नहीं क्रांति /आन्दोलन कहा गया। उदाहरण के लिए समय-समय पर हुए समाज और धर्म सुधार आंदोलनों को समझनेका प्रयास करें तो बात स्पष्ट हो जायेगी । वर्तमान समय में युवा वर्ग मानसिक तौर पर उत्तर आधुनिक है या बनना चाहता है। आज का प्रगतिशील युवा अक्सर परम्पराओं को रूढ़ी कहना ज्यादा पसंद करता है। और इसको तोड़ कर ख़ुद को विकास की दिशा में अग्रसर समझता है। यहाँ हमें परम्पराओं तथा रुढियों में अन्तर करना सीखना होगा।

सेक्स की बात सुन कर हम मन ही मन रोमांचित होते हैं .जब भी मौका हो सेक्स की चर्चा में शामिल होने से नहीं चूकते .इंटरनेट पर सबसे अधिक सेक्स को हीं सर्च करते हैं . लेकिन हम इस पर स्वस्थ संवाद /चिंतन/ मंथन करने से सदैव घबराते रहे हैं और आज भी घबराते हैं .law of reverse effect ” मे अनेक विद्वानों ने सेक्स को जीवन का बही आवरण बताया है जिसको भेदे बिना जीवन के अंतिम लक्ष्य अर्थात मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है . सेक्स अर्थात काम जिन्दगी की ऐसी नदिया है जिसमें तैरकर हीं मन रूपी गोताखोर साहिल यानी परमात्मा तक पहुँचता है .

एक गृहस्थ के जीवन में संपूर्ण तृप्ति के बाद ही मोक्ष की कामना उत्पन्न होती है | संपूर्ण तृप्ति और उसके बाद मोक्ष, यही दो हमारे जीवन के लक्ष्य के सोपान हैं | कोणार्क, पूरी, खजुराहो, तिरुपति आदि के देवालयों मैं मिथुन मूर्तियों में जीवन के लक्ष्य का प्रथम सोपान है अतः  इसे मंदिर के बाहरी  दिवाल पर ही प्रतिष्ठित किया जाता है | द्वितीय सोपान मोक्ष की प्रतिष्ठा देव प्रतिमा को मंदिर के अंत: पुर में की जाती है | प्रवेश द्वार और देव प्रतिमा के मध्य जगमोहन बना रहता है, ये मोक्ष की छाया प्रतिक है | मंदिर के बाहरी  दीवारों पर मिथुन मूर्तियाँ दर्शनार्थी को आनंद की अनुभूतियों को आत्मसात कर जीवन की प्रथम सीढ़ी – काम से  तृप्ति पा लेने का संकेत कराती है | ये मिथुन मूर्तियाँ दर्शनार्थी को ये स्मरण कराती है कि  जिस मानव ने जीवन के इस प्रथम सोपान ( काम तृप्ति ) को पार नहीं किया है, वो देव दर्शन – मोक्ष के द्वितीय सोपान पर पैर रखने का अधिकारी नहीं | मनुष्य को हमेशा इश्वर या मोक्ष को प्राप्ति के लिए काम से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है |

जीवन और काम के शाश्वत सम्बन्ध की उपरोक्त व्याख्या गौर करने लायक है . मानव समाज समाज की नीव जिस काम /सेक्स पर टिकी हुई है कालांतर में उसी काम को समाज ने प्रतिबंधित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किये . परिणाम हमारे समक्ष हैं , जीवन के अंतिम लक्ष्य तक ले जाने का साधन और उसकी उर्जा को नकारात्मक रूप में देखा जाने लगा . आज काम बिस्तर पर सिमट आया है जिसका लक्ष्य बस एक विपरीतलिंगी अथवा समलिंगी जोड़े की क्षणिक संतुष्टी भर रह गयी है .सम्भोग को केवल भोग,भोग,भोग, और भोग तक सीमित नहीं किया जा सकता क्योंकि भोग से संपूर्ण तृप्त होकर आगे मोक्ष की ओर जाने का अवसर आते है लेकिन काम के प्रति अपनी नकारात्मक छवि के कारण हम इस रस्ते को छोड़ दूसरे -तीसरे रास्ते में भटकते रहते हैं . हमारा यह भटकाव केवल और केवल काम / सेक्स के प्रति गलत नजरिये की वजह से है . इस मंच पर हर आलेख में इसे दूर करने का  प्रमाणिक और तथ्यपूर्ण  प्रयत्न होता रहेगा . हम जीवन के मूल तत्व काम अथवा सेक्स के ऊपर विभिन्न विचारकों और अपने विचार को आपके समक्ष रखेंगे . काम का जीवन में क्या उपयोगिता है  ? सेक्स जिसे हमने बेहद जटिल ,रहस्यमयी ,घृणात्मक बना रखा है उसकी बात करने से हमें घबराहट क्यों होती है ? यह विमर्श किस्तों में जारी रहेगा ……

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8 Responses to “सेक्स चर्चा – जयराम ‘विप्लव’”

  1. anoop aakash verma

    Bilkul thik kaha aapne aur sah maniye to mujhe un logo se sakht nafrt hai jo aadhunikta ka jhanda lekar akaran atyadhunik hue ja rare hai!aakir ku?…..ku sex jaise vishay par ek saarthak behas k liye hame logo ko anguliyo ginna padta hai,jabki ekant me sex se fuhad koi vishay nahi….isliye mujhe bar bar jor dekar kahna padta hai ki DPS kand isliye nahi hua ki une sex ki wo jankari nahi thi jo unhe di jaani chahiye thi aptu DPS kand isliye hua ki ham jis aadunik samaj k pashchmakaran par vichar vimarsh kar rahe the…..wo akaran atyadhunik ho gaya……..To samasya sex par sakuchaate samaj ki nahi hai..Samasya sex par machalte samaj ki hai…….anoop aakash verma…..wwwanoopverma@gmail.com

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  2. sadhak ummed singh baid

    उत्कंठा आदिम यही, आकर्षण उद्दाम.
    स्त्री-पुरुष सम्बन्ध का, चर्चा हरदम आम.
    चर्चा हरदम आम, देह की चरमोपलब्धि.
    जीवन लेकिन चूक रहा, ना मिली समाधि.
    कह साधक जीवन की खातिर देह चुनी थी.
    बार-बार जीवन चूका और चिता चुनी थी.

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  3. मुहम्‍मद उमर कैरानवी

    इस लेख को 1000 हिट होने पर बधाई, हिट का फंडा सब जानें हैं, जो ना समझें वह यहां कमेंटस गिन ले, उस 49 माडल पर जो रैंक मास्‍टर की 4 लाइनस को चर्चा मिली वह किसी को ना मिल सकी, उसने यह लेख पढ लिया तो कहेगी, क्‍या तुम यह अपनी मां को पढवा सकते हो? पुरूष विरोधी ब्लाग पर अपनी चर्चा आजमाओ तो जानें वैसे सियाराम जी आपको उस जैसी आज तक मिली ही नहीं आपने वहां पर कमेंटस में माना, बात तो जब है वह कहे आप जैसा मिला ही नहीं, हम तो शाबाशी हासिल कर चुके अब आप पहुंचिये, 4 पहुंच चुके आप भी लाइन में लग जाओ, गोली (दर्द की) ले के जाना कभी चर्चा ही चर्चा करते रह जाओ,

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  4. Arun Singh

    Sex is the basic neccessory of man. I dont know why indian culture hide this big issue? There is a open in SHiv Puran when Shankar wa s in involbed in sex with Parvati and devils called him for help, Shanker told them “My Sperm is comming out who can handle it? I cant tell you this story in brief here, You can find out yourself whats true? Moral of the story, sex was not prohibeted in our old mythology books.
    I think mughal attack was the big cause to hide this issue. We are 50 years back in the world cause we are hideing sex. In India every 16 years old guy thinks “what is the sex?” but in USA pic.
    is different. I am not in favour of free sex, but here should be sex education.

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  5. मुहम्‍मद उमर कैरानवी

    भैया यह लेख है कि डायरेक्‍टरों को फिल्‍म का आइ‍डिया देरहे हो, कुछ भी सेक्‍स चर्चा नहीं की टाइम खराब कर दिया, कभी चुकाउंगा इस समय की कीमत तब तक सुगंध फैलाते रहो,

    signature:
    विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? या यह big Game against Islam है?
    antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

    छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकें
    islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

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  6. sunil patel

    Thanks to Shri Jayram Choudhary Ji who has given a very good report in Hindi on sex subject.

    Really in India by conspiracy it is being spread by western country to spoil our culture, traditions. I am not a critic of sex, but support of private sex. In India society sex is very holy subject but very very private, secret limited only to couple (married one). Healthy sex is one when it is by healthy youths, it can be possible only when sex taught & experienced only after a certain age, not from kids, school even not at college age.

    Thanks to writer for providing article in Hindi on this site.

    Here is my article on the subject –
    http://suntel.110mb.com/6%20-%20Sex%20education%20in%20Schools.htm

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