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    शहीद दिवस

    नमन करते है उन शहीदों को,
    जिन्होंने अपनी जान थी गवाई |
    ब्रिटिश हकूमत में जिन्होंने,
    फांसी की सजा थी पाई ||

    सच्चे सपूत थे भारत के वे ,
    अपना सुख दुःख भूल गए |
    भारत की आजादी के लिए ,
    फांसी के तख्ते पर झूल गए ||

    नाम था उनका भगत सिंह,
    सुखदेव और राजगुरु आदि
    जो ब्रिटिश शासन से न डरते थे |
    भारत की आजादी के लिए ,
    वे नये नये प्लान रोज घडते थे ||

    थे वे आजादी के सच्चे सपूत वीर
    जिन्होंने अंग्रेजो का दम निकाला था |
    जिनकी नस नस में आग दोड़ती थी ,
    खुद को आंधी तूफ़ान में पाला था ||

    थे वे बड़े अमर शहीद बलिदानी ‘
    जिन्होंने फांसी के फंदे को चूमा था |
    माँ रंग दे बसंती चोला मेरा ,
    ये गीत भारत के घर घर में झूमा था ||

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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