लेखक परिचय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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इसमे कोई दो मत नहीं हो सकते की बाबा रामदेव ने एक अभियान चलाकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध खुला युद्ध छेड़ दिया है|इस कार्य में उन्हें देश के कोने कोने से समर्थन मिल रहा है|भ्रष्टाचार का नाग भारतीय सस्कृति,सामाजिक सरोकारों एवं मानव मूल्यों को डसने पर तुला हुआ है|बाबा रामदेव की पहल निश्चित ही भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में बढ़ता एक सराहनीय कदम है किंतु बाबा का बड़बोलापन इस नेक काम में बाधा बनता नज़र आता है|सत्ता की गद्दी पर बैठे चालाक कुटिल और शातिर नेता और अंग्रेजों के मानस पुत्र ब्युरोक्रेट्स के कठोर गठबंधन को तोड़कर सफलता के पुल तक पहुंचना बाबा के लिये इतना सरल नहीं होगा जितना कि वे सोचते हैं|इसके लिये संपूर्ण देश में चेतना का शंखनाद करना होगा|अभी अन्ना हजारे का जादू सबने देखा,उनकी एक आवाज पर सारा देश कैसे एक सूत्र में बंधकर सत्ता के विरोध में उठ खड़ा हुआ|तीन दिन की भूख हड़ताल ने सरकार की कमर तोड़कर रख दिया| बाबा रामदेव ने भी उसी तर्ज पर आंदोलन किया किंतु चार जून को रामलीला मैदान में सरकार ने डंडे की ताकत से उनका और उनके समर्थकों का जो हाल किया वह दुनियां ने देखा|लोक कितना भी ताकतवर हो शक्ति के मामले में तंत्र से नहीं जीत सकता|बाबा का बड़बोलापन हर जगह आड़े आता है और सरकार को उनपर प्रहार करने का अवसर देता है|बाबा के समर्थकों पर चार जून को लाठी चार्ज हुआ बाबा को भागकर अपनी जान बचाना पड़ी और वह भी स्वांग बनाकर और हँसी का पात्र बनकर|आम लोगों ने खूब आन्नद मनाया भले सत्ता विरोधियों ने सरकार की आलॊचना कर उस कांड को जलियांवाला की संग्या दी हो पर लोगों ने उनका साथ को कतई नहीं दिया|संत समाज भी खुलकर सामने नहीं आया|यदि श्री श्री रविशंकरजी जैसे संत आगे नहीं आते तो बाबा की जान जाने का खतरा सिर पर था ही|बाबा पर हमला होने के बाद के ब्यानों में उन्होंने कांग्रेस को भला बुरा कहा घर घर जाकर कांग्रेसियों की पोल पट्टी खॊलने की धमकी दी एवं आत्म रक्षार्थ एक स‌शस्त्र दल बनाने की धमकी दी|एक संत के लिये क्या यह उचित था?क्या यह राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में नहीं आता?क्या बाबा को इतना उत्तेजक होना चाहिये था? नहीं य्ह एक संत के लिये कदापि उचित नहीं है‍| माना की वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार की पराकाष्टा पर है रोज नये घुटाले सामने आ रहे हैं लगभग सभी नेता निशाने पर हैं|प्रधान मंत्री की निष्क्रियता से मंत्री सांसद खुले आम जनता का धन लूट रहे हैं ,न कोई जेल जा रहा है न किसी को सजा हो रही है|यह अवश्य हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार से सरकार पर दबाव डालने के कारण अप्राधियों को जेल के सींकचों में डाला गया है| किंतु यह भी उतना ही सच है की ये अपराधी कानून की खामियों का लाभ उठाकर बेदाग छूट जायेगें|यहां किसी नेता अथवा पूंजी पति को सजा नहीं मिलती|इतना होने के बाद भी बाबा को आंदोलन एक सुरक्षित दायरे में रहकर कानूनी सलाह लेकर ही करना होंगे अन्यथा सरकार में बैठे ये मक्क्र ळुटेरे उन्की जान लेने से बाज नहीँ आयेंगे|रामदेव की जान अनमोल है उसे बचाना आम भारतीय का दायित्व है|बाबा किसी काम में जल्दबाजी न कर,कानून न तोड़ें जनता का भरपूर समर्थन जुटायें एवं बाचचीत में संयम बरतें| तभी वह इस कुशासन से छुटकारा पा पायेंगे| वैसे जन बल तन बल और धन बल की ताकत से बड़ी बड़ी शक्तियों का पतन हुआ है पर इसके लिये जिव्हा पर काबू रखना अति आवश्यक है|अहिंसक प्रद्रशनों मे बहुत ताकत होती है |महात्मा गांधी ने हमें यही मार्ग बताया था और इसी के बल बूते ही अंग्रेज शासन को उखाड़ फेकने में सफल्ता पाई थी|बाबा को सत्य और अहिंसा का ही सहारा लेना होगा तभी इन सत्ता रूपी दुष्ट राक्षसों से निपटा जा सकता है|

7 Responses to “बड़बोलापन छोड़ें बाबा रामदेव”

  1. vicky grewal

    बिलकुल सही लिखा है आपने श्रीवास्तव जी ….बाबा रामदेव उत्तेजना में आकर बडबोले ब्यान दे देते है….लेकिन ये भी सच है की वो जो बोलते है दिल से बोलते है …अन्ना हजारे साहब की तरह लिखा हुआ पढ़ के नहीं बोलते…इसीलिए गलती कर जाते है…उनको अरविन्द केजरीवाल जैसे समझदार सलाहकारों की जरूरत है….जय हिंद

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  2. prabhudayal

    बाबा रामदेव के बारे में जो लिखा है वह बिल्कुल ठीक है उनके बड़.अबोले पन के करण ही उन्हें ज्यादा समर्थन नहीं मिला | उनपर लाठी चार्ज होने के बाद जनता सामने नहीं आई हालाकि उनका संगटन ज्यादा बड़ा है\

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  3. RAJ

    थोडा अच्छा लेख है पर मैं नहीं मानता की बाबा बडबोले है वो सचाई बताते है और सच कड़वा होता है इसीलिए रात को १ बजे लाठी चार्ज किय अ गया , जबकि अन्ना के द्ममाले मैं नहीं हुआ जबकि अन्ना के समर्थकों ने १४४ का उल्लंघन किया था , बाबा ने नहीं किया था , पोलिस का रवाया थोडा आश्चर्य जनक लगा एक पर लाठी चार्ज वो सोते हुआ लोगिन पर और एक पर दोस्ताना व्यवहार , शंका होती है , वैसे बाबा की जरुरत पुरे देश को है , अन्ना सिर्फ एक दोंग है उसके पीछे के लोगों के बारे मैं जल्दी पता चल जायेंगा , अगर बाबा गलत होते तो कांग्रेस सर्कार उनके और उनके साथी आचार्य जी हा आचार्य बालकृष्ण जी के पीछे क्यों पड़ती अगर हिम्मत है तो टीम अन्ना के पीछे जो लोग खड़े है उनके बारे मैं सर्कार बताये

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  4. प्रभुदयाल श्रीवास्तव

    prabhudayal Shrivastava

    धन्यवाद आपने प्रतिक्रिया दी| ईश्वर बाबा को अपने अभियान में सफलता दे|
    प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌

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  5. -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    इस लेख को पढ़कर और आचार्य (पता नहीं हैं या नहीं) बाल कृष्ण के बारे में जारी बयानों को जानकर तो ऐसा लगता है, मानो बाबा को केवल उन्हीं बातों का ज्ञान है, जिनके आधार पर देश के वर्तमान हालातों में बहुमुखी प्रतिभाशाली ज्ञान से सज्जित राजनेताओं से मुकाबला करना असंभव है! यदि ऐसा है तो, कितना अच्छा हो कि बाबा को थोड़ा वर्तमान राजनीतिक कूटनीति के बारे में भी सीखना चाहिए! अन्यथा उन पर लगे दाग धुलने में दशकों लग जायेंगे!

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  6. UTTAM PARMAR

    वाह सरजी क्या बात कही आपने,आपके विचार मुझे बहुत अच्छे लगे आप बिलकुल सही बात कह रहे हैं. आप जेसे लोगो की बाबाजी और इस देश को बहुत जरूरत है. भारत माता की जय….

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