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    Homeसाहित्‍यकविताधुएँ से धुआँ हुई है अब जिंदगी

    धुएँ से धुआँ हुई है अब जिंदगी

    धुएँ से धुआँ हुई है,अब जिंदगी ,
    तम्बाकू से बर्बाद हुई है जिंदगी |
    बचना चाहते हो अगर तुम इससे ,
    तम्बाकू छोड़ो बचा लो ये जिंदगी ||

    धुआँ राख़ कर रहा है ये जिंदगी ,
    मिला रहा है ये ख़ाक में जिंदगी |
    बंद करो उड़ाना तुम इस धुएँ को ,
    वरना ख़त्म हो जायेगी ये जिंदगी ||

    धुएँ से धुँधली हो रही है ये जिंदगी ,
    अपने आग़ोश में ले रहा है जिंदगी |
    मौत को बुला ले किसी को पता नहीं ,
    धुएँ से बचा लो अपनी ये जिंदगी ||

    जिसने दिया तम्बाकू को निमंत्रण ,
    उसको आ गया मौत का निमत्रण |
    कैसे बचोगे तुम इस निमंत्रण से।
    बस कर लो तम्बाकू पर नियत्रण ||

    धुएँ को इस धरा से अब हटाना है ,
    धुएँ से विश्व को मुक्त अब कराना है |
    जब तक धुआँ रहेगा इस भू पर ,
    तब तक मृत्यु को निकट आना है ||

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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