More
    Homeराजनीतिइस्लामोफोबिया के प्रपंच से शरीयत की ओर बढ़ता समाज

    इस्लामोफोबिया के प्रपंच से शरीयत की ओर बढ़ता समाज

    ईशनिंदा के नाम पर मानवता व् लोगो की निर्मम हत्या करने वाली कटटरपंथी विचारधारा अब कानूनी तरीके से शरीयत की ओर बढ़ रही है । किसी भी गैरइस्लामिक देश में शरीयत कानून को क्रियान्वित करना इस्लाम का मुख्य लक्ष्य होता है । इसी लक्ष्य के निहित यूरोपीय देशो में इस्लामोफोबिया के विरुद्ध कानून की मांग की जा रही है । इस्लामिक बुद्धिजीवी व् वामपंथी पुरे विश्व में एक सन्देश को प्रसारित करने में लगे हुए है की लोगो को इस्लाम से डराया जा रहा है , जिसे  इस्लामिक बुद्धिजीवियों ने इस्लामोफोबिया का नाम दिया है । इस्लामिक बुद्धिजीवी व् वामपंथी चाहते है की जो भी व्यक्ति इस्लामिक विचारधारा के विरुद्ध बोलेगा तो इस्लामोफोबिया कानून के अंतर्गत यह मन जाएगा कि वह व्यक्ति ईशनिंदा कर रहा है एवं उसके विरुद्ध  विशेष कानून के अंतर्गत दंडात्मक कार्यवाही होनी चाहिए । यदि आंकलन किया जाए तो अभी भी असंवैधानिक रूप से कट्टरवादी विचारों के अंतर्गत यह सब हो रहा है । जो भी व्यक्ति कटटरपंथी विचारधारा की सत्यता को उजागर करता है । उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर कटटरपंथियो की भीड़ हमला करके उस व्यक्ति को जलाकर या गला रेतकर हत्या कर देती है एवं जहाँ भीड़ इकट्ठा करना संभव नहीं होता ,वहां टारगेट किलिंग कर दी जाती है । परन्तु विडंबना देखिये की अब इस्लामोफोबिया के नाम का प्रपंच रचकर स्वम को मजलूम , मजबूर बताकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यही मजलूम लोग एक ऐसे कानून की  मांग कर रहे हैं। जिसके चलते कोई भी व्यक्ति इस्लाम के विरुद्ध तर्कसंगत विचार भी न रख सके। इस्लाम के जानकारों से पूछना चाहिए की जिस लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की आजादी की बात वो करते हैं क्या यह अधिकार गैरइस्लामिक लोगों को नहीं है । इस्लामिक बुद्धिजीवी व वामपंथी जिस कानून व संविधान की  बात करके अन्य समाज की संवेदना बटोरना चाहते है । वह इस्लामिक बुद्धिजीवी उस संविधान व् लोकतंत्र का पालन तब क्यों नहीं करते जब  हिन्दुस्तान में उसी कानून के अंतर्गत ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी का आदेश दिया जाता है । वैश्विक स्तर पर बुद्धिजीवी समाज व् राजनेताओ की यह विफलता ही तो है की इन नेताओ में शरीयत के अलोकतांत्रिक व् इस्लामिक कटटरवादिता विचारो का ज्ञान ही नहीं है । जिसके कारण इस्लामिक वामपंथी गठजोड़ पुरे विश्व में शरीयत के अंतर्गत होने वाली अमानवीय गठनाओं को इस्लामोफोबिया के नाम का कवच पहनाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित करने का कार्य कर रहा है । जब शरीयत के नाम पर मंदिरों को तोडा जा सकता है , देव मूर्तियों को खंडित किया जा सकता है , गैरइस्लामिक व्यक्तियों के साथ आक्रामकता , हिन्सात्मक व् बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया जा सकता है तो यह कैसे सम्भव है की सभ्य समाज को इन सबके विरुद्ध तथ्यात्मक विचार रखने का भी अधिकार न दिया जाए । आज इस कानून की मांग यूरोप में हो रही है परन्तु इस प्रपंच को रोकने हेतु सम्पूर्ण विश्व के मानवतावादियों को सजग व सतर्क रहना चाहिए ।

    दिव्य अग्रवाल
    दिव्य अग्रवाल
    विचारक व लेखक Mob-9953763293

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    12,298 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read