सोनिया गांधी बेचैन क्यों है?

वीरेन्द्र सिंह परिहार

यू.पी.ए. अध्यक्षा सोनिया गाधी का एक लिखित भाषण उत्तराखण्ड में एक रेल्वे लाइन के उदघाटन में रक्षा मंत्री ए.के. एन्टोनी द्वारा पढ़ा गया। जिसमें टीम अन्ना पर हमला करते हुए कहा गया कि भाषणबाजी से करप्शन के खिलाफ नही लड़ा जा सकता। इसमें कोर्इ शक नही कि करप्शन एक बड़ी बीमारी है और हर कोर्इ इससे परेशान है। करप्शन के खिलाफ माहौल जरूर बनना चाहिए लेकिन भाषणो से करप्शन खत्म नही होगा। बात यहीं पर खत्म हो जाती तो बात और थी लेकिन सोनिया गाधी ने आगे टीम अन्ना पर तीखा हमला बोलते हुए कहा दूसरों पर उगली उठाने से करप्शन खत्म नही हो सकता। करप्शन तब तक खत्म नही होगा जब तक कुछ लोग यह सोचते रहेंगें कि उनका करप्शन दूसरों की तुलना में ठीक है। मै इन लोगों से पूछना चाहती हू कि आर.टी।आर्इ कौन लाया? सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता कौन लाया? यह हमने किया है। प्रधानमंत्री और सरकार लोकपाल के लिए प्रतिबद्ध है तो शोर किस बात का है?

अब जैसा कि सोनिया गाधी कहती है भाषण से भ्रष्टाचार से नही लड़ा जा सकता। सोनिया गाधी यह नही बता रही है कि भ्रष्टाचार से कैसे लड़ा जा सकता है विगत सात वर्षो से ऊपर केन्द्र में सोनिया गाधी की सरकार है लेकिन एक बार भी ऐसा कुछ नही किया गया कि ऐसा लगे कि सरकार भ्रष्टाचार से लडनें के लिए गंभीर है। जबकि वर्ष 2004 के कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र में सशक्त लोकपाल गठित किए जाने की बात की गर्इ थी। इसी तरह वर्ष 2009 के घोषणा पत्र में भारतीयों का विदेशों में जमा काला धन को वापस लाने की बात कही गर्इ थी। लेकिन दोनों ही क्षेत्रों में क्या हुआ?आखिरकार सरकार के भ्रष्टाचार को संरक्षण की नीति के चलते अन्ना हजारे के नेतृत्व में देश की जनता को सड़कों पर आना पड़ा तो काले धन के प्रश्न पर सरकार पर अविश्वास और उसकी कार्य-प्रणाली के चलते सर्वोच्च न्यायालय को अपने नेतृत्व में स्वत: एस.आर्इ.टी. का गठन करना पड़ा। अब इससे समझा जा सकता है कि भ्रष्टाचार एवं काले धन के मुददे पर भाषणबाजी मात्र कौन कर रहा है । इसके अलावा यदि करप्शन के विरूद्ध भाषणबाजी हो रही है तो इससे सोनिया गाधी और उनके अनुयाइयों को इससे तकलीफ क्यो हो रही है ।अगर भ्रष्टाचार रूपी दैत्य के विरूद्ध इस तरह से जन-चेतना जागृत की जा रही है ,लोगों को गोलबन्द किया जा रहा है, कठोर कानून बनाने की बात की जा रही है। यदि इससे सोनिया गाधी को तकलीफ होती है तो इससे यह समझा जा सकता है कि यह भ्रष्टाचार विरोधी रवैया है या भ्रष्टाचार के प्रति पक्षधरता का। फिर इसमें मात्र भाषणबाजी सोनिया गाधी और उनके लोगों को दिखार्इ पड़ती होंगी। भाषणबाजी से परे जाकर अन्ना हजारे दो-दो बार आमरण अनशन पर बैठकर अपने प्राणों की बाजी लगा चुके है। इससे त्राण पाने के लिए अन्ना हजारे के समर्थन में करोडों लोग अपना काम-धंधा छोड़कर मैदानों में सड़कों मे आ डटे और कर्इ किस्म की तकलीफे उठार्इ। अब भी टीम अन्ना के लोग जगह-जगह जाकर जनमत-संग्रह एवं जन जागरण कर रहे है।तो इसमें सोनिया गाधी को मात्र भाषणबाजी दिखायी पड़ती है।

करप्शन से औसत देशवासी भले परेशान हो लेकिन कुछ लोग तो कतर्इ पेरशान नही है जिनमें एक सोनिया गाधी भी है। अभी आर॰ टी ॰आर्इ के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुर्इ कि सोनिया गाधी ने संसद में भ्रष्टाचार के विरूद्ध कभी कोर्इ माग करना तो दूर कभी आवाज तक नही उठार्इ। अब सोनिया गाधी यह कहकर अपनी पीठ ठोक रही है कि आर॰टी॰आइ कौन लाया ?सोनिया जी माना कि आर॰टी॰आइ यानी सूचना का अधिकार लेकर आप आर्इ। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह कि अकेले आर॰टी॰आइ की ढोल बजाकर भ्रष्टाचार और घोटालों को कब तक दबाती रहेगी? इनके विरूद्ध आवाज उठाने वालों को प्रताडि़त किया जाता रहेगा फिर सोनिया गाधी क्या यह बताएगी कि आप आर॰टी॰आर्इ॰ लार्इ तो सी॰बी॰आर्इ को उसके दायरे से बाहर क्यो कर दिया गया?आपके सरकार के मंत्री ही नही प्रधानमंत्री तक आर॰टी॰आइ के दुरूपयोग का रोना रोकर इसमें परिवर्तन की बात कर इसे पूरी तरह भोंथरा बनाने कें प्रयास में क्यो है?

अब जैसा कि सोनिया जी फरमाती है कि भ्रष्टाचार तब तक दूर नही होगा जब तब कुछ लोग यह सोचते रहेगें कि उनका करप्शन दूसरों की तुलना में ठीक है। उनका इशारा टीम अन्ना के कुछ लोगों पर खास तौर पर किरण बेदी और अरविन्द केजरीबाल को लेकर है। अब इन्होने कोर्इ भ्रष्टाचार किया है कि नही यह एक अलग प्रश्न है। पर यह पूरी तरह सच है कि यह देश के आम नागरिक है। और आम नागरिक का भ्रष्टाचार और खास का भ्रष्टाचार एक ही तराजू में नही तौला जा सकता। क्योकि जब शासन-सत्ता में बैठे लोग भ्रष्टाचार करते है तो उससे समाज का निचला तबका तक प्रभावित होता है। इसी के चलते महगार्इ बढ़ती है, कालाबाजारी बढ़ती है,काला धन पदैा होता है।

इसी के चलते रूपऐं में पन्द्रह पैसा ही नीचे तक जा पाता है। जैसा कि राजीव गाधी कहते रहे अब 15 साल बाद राहुल गाधी भी वही कह रहे हे। तो सोनिया जी और उनकी मण्डली को भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सख्त लोकपाल कानून लाना तो स्वत: दूर रहा जब इसकी माग होती है तो उन्हे इससे बेहद तकलीफ होती है। अरे सख्त लोकपाल लाइए,फिर चाहे हमारा भ्रष्टाचार हो या दूसरे का सभी को दणिडत करिए। ये कहने का कोर्इ मायने नही कि लोकपाल बिल पर काम सबसे पहले आपकी सलाहकार परिषद में हुआ। फिर आपको यह बताना चाहिए कि उक्त कार्य का कोर्इ नतीजा क्यो नही निकला। देश की जनता को यह भरोसा क्यो नही हुआ कि आप भ्रष्टाचार से लड़ने को गंभीर एवं संजीदा है। हा आपकी सलाहकार परिषद का नतीजा जरूर इस रूप में सामने आया कि वह साम्प्रदायिक हिंसा लाचिछत विधेयक 2011 को लाने का उपक्रम कर देश को तोड़ने की कोशिश जरूर कर रही है। सोनिया गाधी कहती है कि प्रधानमंत्री और सरकार लोकपाल के लिए प्रतिबद्ध हैं तो शोर किस बात का?अब सोनिया गाधी क्या यह बताएगी कि सरकार कब से लोकपाल के लिए प्रतिबद्ध है?प्रतिबद्धता तो वह पूर्व में भी जता चुकी है। सिविल सोसाइटी के साथ ड्राफ्ट कमेटी बनाने का नाटक भी हो चुका है। पर मानसून सत्र में ऐसा लोकपाल लाया गया जिससे ऐसा लगा कि वह भ्रष्टाचारियों को दणिडत करने के लिए नही,उनकी शिकायत करने वालों के लिए दणिडत करने के लिए है। तभी तो अगस्त महीने में जन लोकपाल को लेकर देश में ऐतिहासिक आन्दोलन हुआ। सच्चार्इ यह है कि सोनिया गाधी की सरकार अब भी ताकतवर लोकपाल लाने को प्रतिबद्ध नही है,और यह सारी बाते लोकपाल की लड़ार्इ को पटरी से उतारने के लिए हो रही है। तभी तो श्री श्री रविशंकर जैसे आध्यातिमक गुरू भ्रष्टाचार के विरूद्ध अभियान चलाने के कारण सोनिया गाधी के दरबारी दिगिवजय सिंह की नजरों में संघ के मुखौटे है। फिर भी यदि कोर्इ लोकपाल आता है,तो वह इस डर से आएगा कि हिसार की तरह आने वाले पाच राज्यों के चुनाव में कहीं कांग्रेस की लुटिया न डूब जावे। फिर भी लोकपाल को खण्ड-खण्ड करने का तिकड़में जारी है। अब सोनिया गाधी की तकलीफ भी बहुत अनुचित नही है। अरे यदि ताकतवर लोकपाल बन गया तो बहुत लोग जो राजपाट चला रहे है,जेल में हो सकते है। राज करने वालों का लूटपाट का मौलिक अधिकार समाप्त हो जाएगा। स्वत: सोनिया गाधी राजीव गाधी के सिवस खाते को लेकर संदेह के दायरे मे हैं। ऐसी हालत में भ्रष्टाचार के विरूद्ध कठोर कानून बनाए जाने से उनकी तकलीफ समझ में आने वाली है।

 

2 thoughts on “सोनिया गांधी बेचैन क्यों है?

  1. किसी भी प्रक्रिया की अनेक कड़ियाँ होती है| लोकपाल बिल एक प्रबल कड़ी है|
    वास्तव में शासक अकेला ही सही हो, तो बहुत कुछ कर सकता है|
    विश्वास ना हो, तो जाकर ज़रा नरेंद्र के पास जाकर कुछ पाठ सिख ले| उसने शासन का भ्रष्टाचार शून्य वत कर दिया है|
    दीनदयाल जी उपाध्याय कहा करते थे; ==>
    “सही व्यक्ति को कहीं भी बिठाओ, वह वहां चार चाँद लगा देगा| और गलत व्यक्ति सही जगह भी गन्दगी फैला देगा|” — सारी गन्दगी तो आप लोगों ने फैलाई है|
    चुपचाप बाहर जाकर आप क्या करती हैं?
    स्विस नंबर अकाउंट से पैसे निकलवा कर कहीं दक्षिण अमरीका की बनाना रिपब्लिक बैंक में जमा करती है क्या?

  2. अन्ना के कारन राहुल को पी ऍम बनाने में दिक्क़त आ रही है तो सोनिया जी परेशां नहीं होगी? फिर खानदानी राज कैसे चलेगा?संपादक पब्लिक ऑब्ज़र्वर, नजीबाबाद

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