श्रीदेवी : एक लंबी अत्यंत सफल यात्रा का अचानक से अंत हो जाना

 

भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी का जन्म तमिलनाडु के शहर शिवकासी में 13 अगस्त 1963 को हुआ। उनके पिता का नाम अय्यपन और मां का नाम राजेश्वरी है। उनके पिता पेश से वकील और माँ ग्रहणी थीं। श्रीदेवी के पिता जहां तमिल थे तो वहीं मां तेलुगू थीं। श्रीदेवी के एक बहन और दो सौतेले भाई हैं। 1996 में, श्रीदेवी ने फिल्म निर्माता बॉनी कपूर से शादी की, जो अनिल कपूर और संजय कपूर के बड़े भाई भी हैं। श्रीदेवी और बॉनी कपूर की दो बेटियां, जान्हवी कपूर और खुशी कपूर हैं।

श्रीदेवी एक ऐसी अभिनेत्री रही हैं जिन्होंने कई भाषाओँ (हिंदी, तमिल, तेलुगू, , मलयालम, और कन्नड़) की फिल्मों में अभिनय किया है। श्रीदेवी एक बहुमुखी कलाकार थीं, उनको हर तरह की भूमिकाओं को परदे पर जीवंत करने के लिए जाना जाता है। श्रीदेवी हर तरह के किरदार में अपने आपको फिट कर लेती थीं, चाहें वह कोई गंभीर भूमिका हो या कोई हास्य भूमिका, हर तरह के किरदार में अपने आपको परदे पर ढालना श्रीदेवी की सबसे बड़ी खूबी थी। श्रीदेवी को 1990 के दशक में सबसे अधिक भुगतान पाने वाली महिला ‘सुपरस्टार’ के रूप में जाना जाता है।

श्रीदेवी ने 1975 में आई फिल्म ‘जूली’ से पदार्पण किया था। श्रीदेवी ने बॉलीवुड में प्रमुख अभिनेत्री के तौर पर ‘सोलहवां सावन’ से 1978 में पदार्पण किया। सोलहवां सावन के पांच साल बाद श्रीदेवी ने हिम्मतावाला में जितेन्द्र के साथ काम किया। फिल्म 1983 में रिलीज हुई और वर्ष की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक बन गई। इस फिल्म का गाना ‘नैनों में सपना’ काफी मशहूर हुआ। इसके अलावा श्रीदेवी ने कई बड़ी फिल्मों में अहम् किरदार निभाए। इनमें प्रमुख रूप से सदमा, चांदनी, चालबाज, नगीना, सरफरोश  मिस्टर इंडिया जैसी दर्जनों  फिल्में थीं जिनमें निभाए हुए किरदारों की वजह से श्रीदेवी भारत के जनमानस के दिलों पर राज करने लगीं । 90 के दशक में श्रीदेवी की फिल्मों के सदाबहार गानों और उनके नृत्य की भी धमक रहती थी, इनमें प्रमुख रूप से ‘‘हिम्मतावाला’’ फिल्म का ‘नैनों में सपना’, ‘‘चांदनी’’ फिल्म का ‘चांदनी ओ मेरी चांदनी’, ‘‘नगीना’’ फिल्म का ‘मैं नागिन तू सपेरा’, ‘‘मिस्टर. इंडिया’’ फिल्म के ‘करते हैं हम प्यार मिस्टर इंडिया से’ ‘हवा हवाई’, ‘काटे नहीं कटते ये दिन ये रात’, ‘‘लम्हे’’ फिल्म का ‘मोरनी बागा मा बोले आधी रात मा’, ‘‘रूप की रानी चोरों का राजा’’ फिल्म का ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ सहित दर्जनों पॉपुलर गानों के साथ अपने नृत्य और प्रदर्शन से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया।

श्रीदेवी ने साल 1997 में फिल्म ‘जुदाई’ के बाद से 15 सालों के लिए फिल्मों से दूरी बना ली थी, इसके बाद साल 2012 में फिल्म इंग्लिश-विंगलिश से उन्होंने धमाकेदार वापसी की और फिल्म सुपरहिट साबित हुई। साथ ही इतने सालों तक अभिनय से दूर रहने की बावजूद भी श्रीदेवी के परिपक्व अभिनय ने सबका दिल जीता। साल 2017 में श्रीदेवी की फिल्म श्मॉमश् फिल्म भी रिलीज हुई थी, जिसमें भी श्रीदेवी का अभिनय काफी शानदार था। श्रीदेवी ने अपने फिल्मी कॅरियर में पांच फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते हैं, जिनमें से चार फिल्मों (लम्हे-हिन्दी, चालबाज- हिन्दी, मीनदुम कोकिला- तमिल फिल्म, क्षणा क्षणं- तेलगु फिल्म ) के  लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड  और ‘16 वयतिनिले’ फिल्म के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड-साउथ मिला है। और उन्हें 10 बार  फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामांकित किया गया है। श्रीदेवी को 2013 में देश के चैथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पदमश्री से उस समय  के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

‘जैसे को तैसा’, ‘जूली’, ‘सोलहवां साल’, ‘हिम्मतवाला’, ‘जस्टिस चैधरी’, ‘जानी दोस्त’, ‘कलाकार’, ‘सदमा’, ‘अक्लमंद’, ‘इन्कलाब’, ‘जाग उठा इंसान’, ‘नया कदम’, ‘मकसद’, ‘तोहफा’, ‘बलिदान’, ‘मास्टर जी’, ‘चालबाज’,  ‘सरफरोश’, ‘आखिरी रास्ता’, ‘भगवान दादा’, ‘धर्म अधिकारी’, ‘घर संसार’, ‘नगीना’, ‘कर्मा’, ‘सुहागन’, ‘सल्तनत’, ‘औलाद’, ‘हिम्मत और मेहनत’, ‘नजराना’, ‘जवाब हम देंगे’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘शेरनी’, ‘सोने पे सुहागा’, ‘चांदनी’, ‘गुरु’, ‘निगाहें’, ‘बंजारन’, ‘फरिश्ते’, ‘पत्थर के इंसान’, ‘लम्हे’, ‘खुदा गवाह’, ‘हीर रांझा’, ‘चंद्रमुखी’, ‘गुमराह’, ‘रूप की रानी चोरों का राजा’, ‘चांद का टुकड़ा’, ‘लाडला’, ‘आर्मी’, ‘मि. बेचारा’, ‘कौन सच्चा कौन झूठा’, ‘जुदाई’, ‘इंग्लिश विंग्लिश’, ‘मॉम’ जैसी सैंकड़ों फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से हर तरीके की भूमिकाओं से पहचान बनाने वाली श्रीदेवी   का जिंदादिल अभिनय भारत के प्रत्येक नागरिक के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगा। दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी न केवल अपने सौदर्य से बल्कि अपने अभिनय निपुणता की वजह से श्रीदेवी ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा में अपने चाहने वालों के दिल में  एक खास स्थान प्राप्त किया। श्रीदेवी ने अपने लम्बे कैरियर में अनेकों विविधतापूर्ण भूमिकाएं की और भारत के करोड़ों लोगों का दिल जीता। श्रीदेवी ने अपने अविस्मरणीय अभिनय से भारतीय सिनेमा प्रेमियों का कई दशकों तक अनेकों तरह की भूमिकाओं को परदे पर जीवंत कर मनोरंजन किया। ऐसी दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी का निधन दुबई में 24 फरवरी 2018 की रात को 54 साल की उम्र में हृदय गति रुकने से हो गया। श्रीदेवी के निधन की खबर सुनकर हर कोई स्तब्ध है। श्रीदेवी के अंदर अभिनय का भंडार था। उनकी एक लंबी अत्यंत सफल यात्रा का अचानक से अंत हो जाना भारतीय सिने प्रेमियों के लिए अत्यंत दुखद है। श्रीदेवी का अविस्मरणीय अभिनय हमेशा दूसरे कलाकारों के लिए प्रेरणा का काम करेगा। दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी जी का अचानक इस दुनिया से चले जाना उनके करोड़ों प्रशंसको के लिए व्यक्तिगत क्षति है, श्रीदेवी को प्यार करने वाले हर व्यक्ति के लिए यह अत्यंत दुख की घड़ी है। आज बेशक यह महान अभिनेत्री हमारे बीच में मौजूद नहीं है, लेकिन उनके बेहतरीन अभिनय की छाप हिन्दुस्तान के सिने प्रेमियों के बीच हमेशा अमर रहेगी और पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। ईश्वर महान अभिनेत्री श्रीदेवी की आत्मा को शांति प्रदान करे।

लेखक

– ब्रह्मानंद राजपूत

5 thoughts on “श्रीदेवी : एक लंबी अत्यंत सफल यात्रा का अचानक से अंत हो जाना

  1. बोनी कपूर की सवेंदना श्री देवी के प्रति —रस्तोगी

    कितना निष्ठुर दिन था वो
    जब मृत्यु ने बुलाया तुमको
    कोई रोक न सका उस को
    अल्प आयु में ले गई तुमको

    तुम अमर रहोगी दुनिया में
    यह दिल कहता है अब मेरा
    मृत्यु से छीन लेता तुमको
    अगर बस चलता तब मेरा

    कितने निष्ठुर है कर मृत्यु के
    क्यों आवश्यकता पडी तुम्हारी ?
    अब मोंम कहेगी किसको
    जाह्न्वी,ख़ुशी बिटिया तुम्हारी

    कितनी “हिम्मत” वाली थी तुम
    अब पता लग गया मुझको
    लड़ रही थी अकेली मृत्यु से तुम
    ये खा गया “सदमा” मुझको

    मै अचानक दुबई पहुंचा था
    सरप्राइज देने तुम को
    मुझको ये क्या पता था
    तुम सरप्राइज देगी मुझको

    कितने गहरे दिए जख्म मुझको
    इनको कैसे भरेगे अब हम
    अब तुम ही बताओ मुझको
    किसको “जान” कहेंगे हम

    फिल्म जगत की थी तुम “चांदनी”
    अब छा गया वहाँ अन्धेरा
    अब तुम ही बतलाओ वहाँ
    कैसे आयेगा वहाँ सबेरा

    तुम थी मेरी अंगूठी की “नगीना”
    अब कहाँ चली गयी तो तुम
    अब कौन सा लगाऊ नगीना
    आकर समझाओ अब तुम

    कैसे काटूँगा “जुदाई” तुम्हारी
    क्यों दूर चली गयी तुम मुझसे
    कैसे रहूँगा तुम बिन अब मै
    अब आकर समझाओ मुझको

    आर के रस्तोगी
    मो 9971006425

  2. मोदी जी का नारा:-
    “बेटी बचाओ,बेटी पढाओ”
    लालू जी का नारा:-
    “एक नहीं,कम से कम दस बारह तो बनाओ
    उनको पढाओ,न पढाओ,राजनीति में तो लाओ
    कम से कम डिप्टी चीफ मिनिस्टर तो बनाओ”
    सोनिया जी का नारा :-
    “बहूँ दिलवाओ,मेरे बेटे का घर बसाओ”
    राहूल का नारा:-
    न बहूँ लाऊंगा,न घर बसाऊंगा
    बस ऐसे ही मै काम चलाऊंगा”
    मनमोहन जी का नारा
    “बिलकुल चुप रहो
    किसी से कुछ मत कहो”
    लाल बहादुर शास्त्री जी का नारा
    “जय जवान जय किसान
    अपना तो न कोई मकान
    न कोई दुकान न कोई कार
    न कोई वाहन ये है झूठी शान”
    जय ललिता का नारा:-
    “बिन शादी के अम्मा कहलवाओ
    साडी व चप्पल का ढेर लगाओ”
    कार्तिक का नारा :-
    “बाप के बल पर रिश्वत खाओ
    फिर उसको कम्पनियो में लगाओ”
    चिन्दरम का नारा:
    वित्त मंत्री बनाओ,खूब नोट कमाओ

    आर के रस्तोगी
    मो 9971006425

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