राजेश श्रीवास्तव
भारत में लाइसेंस देरी पर गुस्सा जता रहे एलन मस्क का स्टारलिंक दुनिया के कई देशों में बैन है. जानिए चीन, रूस और ईरान जैसे मुल्कों में क्यों नहीं चलती स्टारलिंक
की सैटेलाइट सर्विस. भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ‘ स्टारलिंक’ के लाइसेंस में हो रही देरी को लेकर एलन मस्क लगातार तीखे बयान दे रहे हैं. मस्क का आरोप है कि कुछ भारतीय कॉर्पोरेट समूह उनकी राह में रोड़ा अटका रहे हैं.
हालांकि, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मापदंड और नियम सभी के लिए बराबर हैं. लेकिन इस पूरे विवाद के बीच सवाल यह उठता है कि क्या भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां मस्क को हरी झंडी नहीं मिली है? जवाब है बिल्कुल नहीं. स्टारलिंकके अपने आधिकारिक मैप को देखें तो दुनिया के कई शक्तिशाली और बड़े देशों में इसकी एंट्री या तो पूरी तरह से बैन है या फिर स्थानीय मंजूरियों के इंतजार में अटकी हुई है.
स्टारलिंक का अपना नक्शा क्या कहता है?
स्टारलिंक के ऑफिशियल पोर्टल पर दिए गए ग्लोबल अवेलेबिलिटी मैप के मुताबिक, अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह सर्विस पूरी तरह से एक्टिव है और उपभोक्ता इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ, एशिया और अफ्रीका के दर्जनों ऐसे मुल्क हैं जिन्हें कंपनी ने ‘वेटिग फॉर रेगुलेटरी अप्रूवल’ यानी सरकारी मंजूरी के इंतजार वाली श्रेणी में रखा है. इनमें भारत के अलावा पाकिस्तान, नेपाल और थाईलैंड जैसे पड़ोसी देश भी शामिल हैं.
चीन, रूस और ईरान: जहां स्टारलिंक पर लगा है ताला
जिन देशों में स्टारलिंक की सर्विस पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई है, उनमें चीन, रूस, अफगानिस्तान, सीरिया और ईरान का नाम प्रमुख है:
चीन : चीन में विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए कानून बेहद कड़े हैं. देश के पूरे टेलीकॉम और इंटरनेट ढांचे पर सरकार का सख्त नियंत्रण है. चीन ने अपनी सुरक्षा नीतियों के तहत स्टारलिक को देश में काम करने की अनुमति नहीं दी है.
रूस : फरवरी 2०26 में स्पेसएक्स ने खुद घोषणा की थी कि उसने रूस में स्टारलिक सेवाओं पर रोक लगा दी है. यह कदम सैन्य और अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने के मकसद से उठाया गया था.
ईरान : ईरान में सरकारी इंटरनेट बंद रहने के दौरान कई लोग अनधिकृत रूप से स्टारलिक के जरिए इंटरनेट एक्सेस कर रहे थे. इसके बाद सरकारी पाबंदियों के चलते स्टारलिक ने आधिकारिक मैप में ईरान के भीतर अपनी सर्विस को ब्लॉक दर्शाया है.

भारत की प्रतिक्रिया: ‘नियम सबके लिए समान’
भारत सरकार के संचार मंत्रालय ने एलन मस्क के बयानों को आधारहीन बताते हुए स्पष्ट किया है कि भारत का नियामक ढांचा निष्पक्ष और सभी कंपनियों के लिए एक समान है. भारत सरकार ने स्टारलिक समेत तीन कंपनियों को ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशंस बाय सैटेलाइट (जीएमपीसीएस) लाइसेंस जारी कर दिया है.
हालांकि, किसी भी कमर्शियल सेवा को शुरू करने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सिक्योरिटी क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी होना अनिवार्य है, जिसे किसी भी विदेशी कंपनी के लिए दरकिनार नहीं किया जा सकता.
क्या है स्टारलिंकऔर कैसे करता है काम?
स्टारलिंक एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स का एक प्रोजेक्ट है. पारंपरिक ब्रॉडबैंड के विपरीत, जो जमीन पर बिछे ऑप्टिकल फाइबर या मोबाइल टावरों पर निर्भर होता है, स्टारलिंक अंतरिक्ष में मौजूद हजारों छोटे लो-अर्थ ऑर्बिट (लियो) सैटेलाइट्स के जरिए सीधे आपके घर पर लगे डिश एंटीना तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाता है. यह तकनीक खासतौर पर उन दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के लिए कारगर है जहां फाइबर केबल बिछाना नामुमकिन होता है.
भारत सरकार ने स्टारलिंक को लेकर कहा?
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिधिया ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए रिलायंस जियो, यूटेलसैट वनवेब और स्टारलिक को लाइसेंस दिए गए हैं। इसके अलावा, अमेजन की सैटेलाइट इंटरनेट परियोजना भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ सकती है।
मंत्री के मुताबिक, लाइसेंस मिलने के बाद भी कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले आवश्यक सुरक्षा मानकों और अन्य नियामकीय शर्तों को पूरा करना होगा। सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत और शुल्क व्यवस्था को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
स्टारलिंक की एंट्री से आम ग्राहकों को क्या फायदा हो सकता है?
स्टारलिक की सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर ब्रॉडबैंड पहुंचाना कठिन है। इससे दूरदराज के गांवों, छोटे कारोबारों और इंटरनेट की सीमित सुविधा वाले क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है हालांकि, इसका वास्तविक फायदा सेवा की कीमत, उपकरणों की लागत, नेटवर्क की गुणवत्ता और नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करेगा। भारत जैसे बड़े और विविध आय वाले देश में केवल बेहतर तकनीक पर्याप्त नहीं होगी; इंटरनेट का किफायती होना भी उतना ही जरूरी है।
एलन मस्क की बौखलाहट: भारत में स्टारलिक को लेकर अनर्गल
टिप्पणी कर रहे अमेरिकी धनकुबेर, अंबानी पर भी बयानबाजी
भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिक की व्यावसायिक शुरुआत को लेकर बहस तेज हो गई है। मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिक की भारत में एंट्री के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी कंपनियों के लिए नियामकीय प्रक्रिया निष्पक्ष और समान है। मस्क की अनर्गल बयानबाजी का अंदाजा इसी बात से लगता है कि उन्होंने इंटरनेट पर अंबानी का समर्थन करने वाले लोगों को भी निशाने पर लिया है।
बड़बोले धनकुबेर की बयानबाजी
बकौल मस्क, ‘अंबानी के इंटरनेट समर्थकों की फौज के बेतुके तर्क समझ से परे हैं। एक तरफ तो वे कहते हैं कि स्टारलिंकभारत में अंबानी के लगभग एकाधिकार द्बारा दी जा रही अविश्वसनीय रूप से कम कीमतों का मुकाबला नहीं कर सकता, और फिर उसी क्षण वे दावा करते हैं कि स्टारलिंक एक बहुत मजबूत प्रतिस्पर्धी होगा! यह सरासर पाखंड है।’
क्या कंपनियों के मुनाफ़े पर असर पड़ सकता है?
मस्क का तर्क है कि भारतीय बाजार में स्टारलिंकजैसी नई सेवा आने से ग्राहकों को इंटरनेट के अधिक विकल्प मिलेंगे। उनका कहना है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से मौजूदा कंपनियों के मुनाफ़े पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे उनका कारोबार खत्म नहीं हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्टारलिंक की सेवाएं महंगी होंगी, तो ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी को अपनी कीमतें किफायती रखनी होंगी।
कमल हासन ने एलन मस्क को दिया जवाब
स्टारलिक विवाद के बीच अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने मस्क के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी देश की नीतियां कोई अरबपति तय नहीं कर सकता, चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और नीतिगत स्वतंत्रता पर जोर दिया।
हासन ने कहा कि भारत को सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भारतीय और विदेशी, दोनों तरह की कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेवाओं की कीमत आम लोगों की पहुंच में होनी चाहिए, खासकर उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत के दूरसंचार नेटवर्क और स्पेक्ट्रम केवल व्यावसायिक संसाधन नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति हैं। उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा से जुड़े मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता।
कुनाल कपूर ने भी उठाए सवाल
अभिनेता कुनाल कपूर ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पश्चिमी देशों के बड़े टेक उद्योगपतियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे एक ऐसी मानसिकता से जोड़ा, जिसमें विदेशी कंपनियां किसी देश में अपनी तकनीक को प्रगति का समाधान बताकर पेश करती हैं और विरोध होने पर वहां की व्यवस्था पर सवाल उठाने लगती हैं। कपूर ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी देश की नीतियों और संस्थाओं को लेकर असहमति होने का अर्थ यह नहीं है कि बाहरी कारोबारी खुद को उस देश का उद्धारकर्ता समझने लगें। उनकी टिप्पणी को स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर जारी बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत सरकार ने एलन मस्क के स्टारलिंक को भारत में बैन कर दिया है?
नहीं, भारत में स्टारलिंक बैन नहीं है. कंपनी को जीएमपीसीएस लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार है.
चीन और रूस में स्टारलिंक सर्विस क्यों बंद है?
चीन अपने कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों और टेलीकॉम पर सरकारी नियंत्रण के कारण विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट को अनुमति नहीं देता है. वहीं रूस में अनधिकृत इस्तेमाल रोकने के लिए खुद स्पेसएक्स ने सेवाओं को ब्लॉक किया हुआ है.
स्टारलिंकआम मोबाइल टावर वाले इंटरनेट से कैसे अलग है?
आम मोबाइल इंटरनेट जमीन पर लगे टावरों और फाइबर केबलों से चलता है. स्टारलिंक
सीधे अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट्स से यूजर के डिश एंटीना तक बिना किसी केबल के इंटरनेट तरंगें भेजता है.