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    मीठी वाणी

    -प्रभुदयाल श्रीवास्तव- poem

    छत पर आकर बैठा कौवा,
    कांव-कांव चिल्लाया|
    मुन्नी को यह स्वर ना भाया,
    पत्थर मार भगाया|

    तभी वहां पर कोयल आई,
    कुहू कुहू चिल्लाई|
    उसकी प्यारी प्यारी बोली,
    मुनिया के मन भाई|

    मुन्नी बोली प्यारी कोयल,
    रहो हमारे घर में|
    शक्कर से भी ज्यादा मीठा,
    स्वाद तुम्हारे स्वर में|

    मीठी बोली वाणी वाले,
    सबको सदा सुहाते|
    कर्कश कड़े बोल वाले कब,
    दुनिया को हैं भाते|

    प्रभुदयाल श्रीवास्तव
    प्रभुदयाल श्रीवास्तव
    लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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