जाधव

बातचीत से सुलझ सकता है जाधव का मसला

जाधव के मामले में पाकिस्तानी राजनीति में जूतम पैजार शुरु हो गई है लेकिन यह संतोष का विषय है कि भारत में पक्ष और विपक्ष एकजुट हैं। भारत सरकार, खासतौर से हमारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बधाई की पात्र हैं, जिन्होंने जाधव के मामले में इतनी दृढ़ता और कर्मण्यता दिखाई लेकिन अभी खुशी से फूलकर कुप्पा हो जाना ठीक नहीं है। पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखना जरुरी है। सभी दक्षेस देशों, इस्लामी राष्ट्रों और महाशक्तियों से फोन करवाए जाएं और संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव अंतानियो गुतरस भी मध्यस्थता करें तो बेहतर हो।

जाधव को सजा-ए-मौत क्यों?

सिर्फ जाधव के बयानों के आधार पर उनको फांसी दी जा रही है, यह अंतरराष्ट्रीय कानून का सरासर उल्लंघन है। खुद पाकिस्तान में इस मुद्दे को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने भी जाधव की फांसी का विरोध किया है, क्योंकि वे सिद्धांततः सजा-ए-मौत के विरुद्ध है।