जे.एन.यू.

फर्क डी.एन.ए. का है

संघ का डी.एन.ए. सौ प्रतिशत भारतीय है। उसने अपने प्रतीक और आदर्श भारत से ही लिये। भगवे झंडे को गुरु माना। देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना तन, मन और धन लगाने वाले सभी जाति, वर्ग, क्षेत्र, आयु और लिंग के महामानवों को अपने दिल में जगह दी। हिन्दू संगठन होते हुए भी अन्य मजहब या विचार वालों से द्वेष नहीं किया। उन्हें समझने तथा शिष्टता से अपनी बात समझाने का प्रयास किया। शाखा के साथ-साथ निर्धन और निर्बल बस्तियों में सेवा के लाखों प्रकल्प खोले। अतः संघ धीरे-धीरे पूरे भारत में छा गया और लगातार बढ़ रहा है।

जे.एन.यू. और डी.यू. का डी.एन.ए.

जे.एन.यू. के पश्चात अब डी.यू. में जिस प्रकार आजादी के नारे लगाये गये हैं उनसे पता नहीं चलता कि ये छात्र अंतत: किससे आजादी चाहते हैं? क्या जिसका अन्न खाते हैं और हवा पानी प्रयोग करते हैं उसी मातृभूमि से ये अपनी आजादी चाहते हैं? यदि ऐसा है तो यह तो निश्चय ही देश के विरूद्घ युद्घघोष और विश्वासघात है। ऐसे विश्वासघात को और अधिक जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।