त्योहार और बाजार…!!

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तारकेश कुमार ओझा कहते हैं बाजार में वो ताकत हैं जिसकी दूरदर्शी आंखे हर अवसर को भुना कर मोटा मुनाफा कमाने में सक्षम हैं। महंगे प्राइवेट स्कूल, क्रिकेट , शीतल पेयजल व मॉल से लेकर फ्लैट संस्कृति तक इसी बाजार की उपज है। बाजार ने इनकी उपयोगिता व संभावनाओं को बहुत पहले पहचान लिया और… Read more »

नृत्य, जब महारास में बदल जाये

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प्रत्येक पर्व एवं त्योहार हमारी जीवन-यात्रा के लिए कुछ न कुछ प्रकृति प्रेम का संदेश लेकर आता है. भारत में मेलों और उत्सवों का उदय भी इसी का क्रमबद्ध रुप था और ये मेले और उत्सव प्रकृति की गोद में, नदी के किनारे या खेती से प्राप्त लाभ की उमंग के रुप में उदय हुए और सामूहिक रुप… Read more »