देवदारु

मेरा एकालाप

बोल उठी तब त्रिपुरसुंदरी
तू डूबे क्यों,क्यों पार तरे?

तेरे समस्त गान, रुदन औ’ हास
ऊँ नमो मणिपद्मे हुं का पाठ
तेरा प्रचलन मेरी प्रदक्षिणा
तेरा कुछ भी मेरा सबकुछ

ओ मेरे प्यारे अबोध शिशु
गोद भरे,तू मुझमें नित-नूतन मोद भरे।