धारा में

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पण्डित अनन्तलाल ठाकुर का सत्संग मुझे कुछ ही दिनों के लिए मिला था । वे दरभंगा के संस्कृत शोध संस्थान के निर्देशक के पद से सेवानिवृत्त होकर अपने एक आत्मीय के साथ रह रहे थे। मैं वहाँ दो तीन दिनो के लिए ठहरा था । अति सामान्य दिखनेवाले इस व्यक्ति की बातें सुनते रहना एक अद्भुत… Read more »

संस्मरणात्मक कहानी : वे दिन

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जिन्दगी के पथ पर चलते हुए बहुत सी एैसी घटनाएं घटित हो जाती हैं जो यादगार ही बनकर नहीं रह जाती,वल्कि हमेशा कुरेदती भी रहती है दिलों दिमाग को.क्या उम्र रही होगी मेरी उस समय?यही तेरह या चौदह वर्ष की.वयःसन्धि के उस मोड पर मन की उमंगें आसमान छूने की तम्मना रखती हैं.आज फिर जब… Read more »