सिनेमा और जनमानस का मनोविज्ञान – डॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी

Posted On by & filed under सिनेमा

सिनेमा वर्तमान युग में समस्त कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यमों में सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। किसी भी जाति, धर्म ,वर्ग , संस्कृति के लोगों को सीधे प्रभावित करने में यह समर्थ है। दृश्य एवं श्रव्य माध्यम के साथ ही कथा, अभिनय , संवाद, संगति, वातावरण सबके सहयोग से यह दर्शकों तक कोई भी संदेश… Read more »

मनोरंजन-सिनेमा-बदलती फिल्मी दुनिया

Posted On by & filed under सिनेमा

जीवन की घटनाओं को पर्दें पर जीवित करने की जो पहल दादा साहब फलके ने की थी, उसके पीछे एक मकशद हुआ करता था। लेकिन जैसे वक्त बदलता गया, सिनेमा के मायने भी बदलते गये। कभी सिनेमा का इस्तेमाल जागरूकता के लिए किया गया तो कभी इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन करने तक ही सीमित रहा।… Read more »

समान्तर सिनेमा के प्रभाव की तरह का एक नाटक ‘लाल देद’

Posted On by & filed under सिनेमा

प्रमोद कुमार बर्णवाल समान्तर सिनेमा की एक उल्लेखनीय विशेषता चीजों, घटनाओं, स्थितियों, परिस्थितियों, अवस्था और दशा को ठीक उसी तरह से प्रकट करना रहा है जैसा कि वह है। कई बार फिल्मकार कहानी की मांग कहकर वह सब पर्दे पर प्रदर्शित करते रहे हैं जिसका यथार्थ से संबंध नहीं रहा है। फिल्मकारों का आरोप रहा… Read more »

ये परदा हंसता है…

Posted On by & filed under प्रवक्ता न्यूज़

-केशव आचार्य सिनमाई परदा बहुत कुछ कहता है…मसलन ये ना सिर्फ मंनोरंजन एक माध्यम है बल्कि अभिव्यक्ति का एक हस्ताक्षर भी है। इस माध्यम से अभिव्यक्ति का एक सशक्त हस्ताक्षर है..हास्य। सिनमाई परदें पर एक्शन से भी ज्यादा लोगों हास्य को स्वीकार किया है। यही कारण साल भर में रिलीज होनेवाली फिल्मों में ज्यादातर फिल्म हास्य प्रधान… Read more »

गुरुदत्त और फिल्म सिनेमा- आलोक नंदन

Posted On by & filed under मनोरंजन, सिनेमा

गुरुदत्त के बिना वर्ल्ड सिनेमा की बात करना बेमानी है। जिस वक्त फ्रांस में न्यू वेव मूवमेंट शुरु भी नहीं हुआ था, उस वक्त गुरुदत्त इस जॉनरा में बहुत काम कर चुके थे। फ्रांस के न्यू वेव..