हिंदुत्‍व

सुशासन के कीर्तिमान गढ़ने का समय

अब समय आ गया है जब भाजपा को प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए विशिष्ट आचार संहिता का प्रावधान करना चाहिए , जिसमें नैतिकता , सदाचार , इमानदारी, संवेदनशीलता और सहृदयता जैसे उच्च मानक हो जिनके पालन को सुनिश्चित कराया जाए । क्योंकि भले ही जनता ने मोदी जी और पार्टी की विचारधारा पर विश्वास करके भाजपा को वोट दिया हो परंतु रोजमर्रा की समस्याओं के लिए कार्यकर्ताओं जनता का साबका पार्षद , विधायको और सांसदों से ही पड़ता है ।अगर इन लोगों का आचरण विपरीत किस्म का होगा तो जनता का विश्वास टूटेगा और उसे दूसरे विकल्प की तरफ देखना पड़ेगा ।

हिंदुत्व नहीं, थोक वोट पर बहस की जाए

क्या हिंदुत्व को धर्म माना जा सकता है? वास्तव में हिंदुत्व न तो धर्म के वास्तविक हिसाब से धर्म है और न ही सांप्रदायिक अर्थ में धर्म है। यह शब्द ही अपने आप में एक पहेली है। हिंदू लोग जिन्हें अपने पवित्र धर्मग्रंथ मानते हैं, उनमें हिंदू शब्द का कहीं उल्लेख भर भी नहीं है। न वेदों में, न दर्शनों में, न उपनिषदों में, न गीता में! उल्लेख कहां से होता?

हिंदुत्‍व ही देश की राष्‍ट्रीय अस्मिता है : रूसी करंजिया

भारत के पत्रकारिता जगत में रूसी करंजिया के नाम से कौन अपरिचित है। स्‍व. करंजिया