प्रणय कुमार

शिक्षक, लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन। जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन। आईआईटी, कानपुर में 'शिक्षा सोपान' नामक सामाजिक संस्था की संकल्पना एवं स्थापना। हाशिए पर जी रहे वंचित समाज के लिए शिक्षा, संस्कार एवं स्वावलंबन के प्रकल्प का संचालन। विभिन्न विश्वविद्यालयों, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं में राष्ट्रीय, सनातन एवं समसामयिक विषयों पर अधिकारी वक्ता के रूप में उद्बोधन। जन-सरोकारों से जुड़े सामाजिक-साहित्यिक विमर्श में सक्रिय सहभाग।

सांस्कृतिक अस्मिता को राजनीति के केंद्र में स्थापित करने वाले जननेता- कल्याण सिंह

कल्याण सिंह का देहावसान राजनीति के एक युग का अंत व अवसान है। वे भारतीय राजनीति के शिखर-पुरुष के रूप...

इस्लामिक देशों में बदलाव की बयार और जगती उम्मीदें

प्रणय कुमार परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। युगीन आवश्यकता एवं वर्तमान परिस्थिति-परिवेश के अनुकूल परिवर्तन सतत चलते रहना चाहिए।...

योग एवं आयुर्वेद वैकल्पिक ही नहीं, मुख्य चिकित्सा-पद्धत्ति बनने की दिशा में अग्रसर

शब्द-संख्या:- 997 निःसंदेह योग एवं आयुर्वेद को देश-दुनिया तक पहुँचाने में स्वामी रामदेव का योगदान अतुल्य एवं स्तुत्य है। उन्होंने...

सोए हुए पौरुष और स्वाभिमान को जागृत-झंकृत करने वाली वीरांगना के नाम!

- बलिदान-दिवस विरला ही कोई ऐसा होगा जो महारानी लक्ष्मीबाई के साहस, शौर्य एवं पराक्रम को पढ़-सुन विस्मित-चमत्कृत न होता...

समस्या एलोपैथ या आयुर्वेद नहीं, समस्या स्वामी रामदेव और उनका गैरिक वस्त्र है।

निःसंदेह योग एवं आयुर्वेद को देश-दुनिया तक पहुँचाने में स्वामी रामदेव का योगदान अतुल्य एवं स्तुत्य है। उन्होंने योग और...

राष्ट्रीय-चारित्र्य की दृष्टि से इजरायल से सीखने वाली बातें

युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं होता। शांति, संवाद, सहयोग, सह-अस्तित्व का कोई विकल्प नहीं। विश्व-मानवता के लिए यह सुखद...

वर्ष 2020 या कोविड-काल के सशक्त सारथी एवं जागरूक प्रहरी: योद्धा संन्यासी योगी आदित्यनाथ

सच ही कहा गया है कि एक संन्यासी ही अच्छा राजा हो सकता है। प्राचीन भारत में तो ऐसे अनेक...

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