प्रणय कुमार

शिक्षक, लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन। जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन। आईआईटी, कानपुर में 'शिक्षा सोपान' नामक सामाजिक संस्था की संकल्पना एवं स्थापना। हाशिए पर जी रहे वंचित समाज के लिए शिक्षा, संस्कार एवं स्वावलंबन के प्रकल्प का संचालन। विभिन्न विश्वविद्यालयों, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं में राष्ट्रीय, सनातन एवं समसामयिक विषयों पर अधिकारी वक्ता के रूप में उद्बोधन। जन-सरोकारों से जुड़े सामाजिक-साहित्यिक विमर्श में सक्रिय सहभाग।

आंबेडकर के विचारों को सही मायने और संदर्भों में आत्मसात करना ज़रूरी

भारतरत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर अपने अधिकांश समकालीन राजनीतिज्ञों की तुलना में राजनीति के…

विद्या-भारती जैसी शिक्षण-संस्था की साख़ एवं विश्वसनीयता असंदिग्ध रही है

भारतीय संस्कृति में सेवा, शिक्षा, चिकित्सा क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों-संस्थाओं के प्रति विशेष सम्मान रहा…

छत्रपति शिवाजी और राष्ट्रीय-जीवन में उनका अप्रतिम योगदान

राष्ट्रीय जीवन एवं ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में छत्रपति शिवाजी महाराज की महत्ता एवं योगदान को रेखांकित-मूल्यांकित…

अपनी संस्थाओं की उपलब्धियों पर गर्व कर ही हम उन्नत राष्ट्र की नींव रख सकते हैं।

लोकतांत्रिक मूल्यों एवं मानवाधिकारों की रक्षा का दंभ भरने वाले अमेरिका और पश्चिमी जगत के…