“वर्धा हिन्दी शब्दकोश के बहाने से हिन्दी के विकास के संबंध में विचार”

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-डॉ. मधुसूदन- प्रो. महावीरजी जैन का आलेख पढ़ने पर, उसी आलेख के एक बिंदू पर ही लक्ष्य़ केंद्रित कर, यह अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता हूं। मात्र तर्क के आधार पर यह प्रस्तुति रहेगी। (एक) प्रो. जैन कहते हैं। प्रो. जैन: “स्वाधीनता के बाद हमारे राजनेताओं ने हिन्दी की घोर उपेक्षा की। पहले यह तर्क दिया… Read more »