देह के बाद अनुपम

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अरुण तिवारी जब देह थी, तब अनुपम नहीं; अब देह नहीं, पर अनुपम हैं। आप इसे मेरा निकटदृष्टि दोष कहें या दूरदृष्टि दोष; जब तक अनुपम जी की देह थी, तब तक मैं उनमें अन्य कुछ अनुपम न देख सका, सिवाय नये मुहावरे गढ़ने वाली उनकी शब्दावली, गूढ से गूढ़ विषय को कहानी की तरह… Read more »

मेरा कुर्ता पकड़कर अब कौन खींचेगा ? – राजेन्द्र सिंह

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अनुपम स्मृति तालाब जितने सुंदर व श्रेष्ठ होंगे, अनुपम की आत्मा उतना सुख पायेगी – राजेन्द्र सिंह प्रस्तुति: अरुण तिवारी हम सभी के अपने श्री अनुपम मिश्र नहीं रहे। इस समाचार ने खासकर पानी-पर्यावरण जगत से जुडे़ लोगों को विशेष तौर पर आहत किया। अनुपम जी ने जीवन भर क्या किया; इसका एक अंदाजा इसी… Read more »

पानीदार “”अनुपम” के लिए भीगी आंखें

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मनोज कुमार मीठे पानी की तरह अनुपम। अपने नाम को सार्थकता प्रदान करते हुए अनुपम ने 68 वर्ष की जिंदगी में सुप्त और लुप्त होते समाज में पानी के प्रति चेतना जागृत करने की जो कोशिशें की, उन कोशिशों के बीच अनुपम मिश्र नाम का यह व्यक्तित्व हमारे साथ रहेगा, चलेगा और हमें दिशा देता… Read more »