Kargil War

“करगिल युद्ध “का बिगुल

2 मई १९९९ का मनहूस दिन धरती के स्वर्ग ‘कश्मीर’ की किस्मत में चौथी बार युद्ध की सुगबुगाहट लेकर आया । करगिलके एक छोटे से गाँव गरकौन के कुछ चरवाहे अपनी याकों कि खोज में घूम रहे थे । इसी दौरान इनमें से एक ताषी नामग्याल ने बर्फ में मानव पदचिन्हों के निशान देखे ।