शिक्षक दिवस विशेष :: ज्ञान का उजियारा फैलाकर बच्चों की जिंदगी संवारने के साथ निभा रहे है सामाजिक जिम्मेदारी


,भगवत कौशिक –
तकनीक के इस दौर में गुरु-शिष्य की परंपरा बदल गई है। गुरु भी कुछ बदले हैं। छात्र भी कुछ बदले हैं। फिर भी दोनों के बीच का रिश्ता बहुत नहीं बदला है। पढ़ाई में किताबें आएंगी तो गुरु भी आएंगे ही, लेकिन ‘जिंदगी की किताब’ को पढ़ाने वाले गुरुओं का सम्मान पहले भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा, क्योंकि हर अंधेरे से निकलने के लिए रोशनी तो वही दिखाते हैं।कोरोना काल में हर क्षेत्र को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शिक्षा के क्षेत्र पर ज्यादा असर पड़ा। ऐसी विकट परिस्थितियों में भी कुछ शिक्षकों ने चुनौतियों को स्वीकार किया और अपने नवाचार के जरिये जितना संभव हो सका, बच्चों के भविष्य को संवारने की प्रक्रिया को जारी रखा।
1. स्नेहिल पाण्डेय (राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2020)
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के नवाबगंज के राजकीय माडल प्राथमिक विद्यालय सोहरामऊ मे प्राथमिक शिक्षिका के पद पर कार्यरत स्नेहिल पाण्डेय किसी परिचय की मोहताज नहीं है।इनके नाम की चर्चा यूपी और हमारे देश तक ही नहीं अपितु विदेशों मे भी इनकी काबिलियत और शिक्षा के प्रति इनके योगदान का जिक्र होता है।जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र मे पिछडे हुए यूपी जैसे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों मे शिक्षा की ऐसी अलख जगाई कि लोग इनके मुरीद हो गए।इनके अथक प्रयासों का नतीजा ही है कि कभी शिक्षा से जी चुराने वाले बच्चे इनके दवारा शिक्षित होने पर शिक्षा की उच्च बुलंदियों को छू रहे है।
■ शिक्षा के क्षेत्र मे इनका योगदान
●बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिवर्ष वेतन से साइकिल पुरस्कार में देना 
●जनपद में सर्वाधिक नामांकन, 266 विद्यालय की अपनी वेबसाइट का होना 
●आईसीटी का प्रयोग, स्मार्ट क्लासेज,स्मार्ट टेक्नोलॉजी के माध्यम से कोविड क्लासेस देना, कोरोना के समय में भी बच्चों को पढ़ाना।
●पुरातन छात्र समिति ,जॉयफुल लर्निंग ,फुटबॉल क्लब, जागरूक मां समूह, गेस्ट स्पीकर क्लासेज ,स्पोर्ट्स, विद्याज्ञान ,नवोदय जैसी परीक्षा में बच्चों का सफल होना 
● स्मार्ट 30 टीम का निर्माण,थीम पार्टी कराना, अभिभावक पुस्तकालय अभिभावक वाचनालय और जितना नामांकन उतना वृक्षांकन, एवं अभिभावकों का जन्मदिन मनाना आदि कुछ ऐसे कार्य है जो प्राथमिक विद्यालय सोहरामऊ को राष्ट्रीय स्तर तक ख्याति दिलाते हैं।
■ राज्य मे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को गठित स्क्रीनिंग कमेटी सदस्य
माननीय उपमुख्यमंत्री जी की कमेटी में उत्तर प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर एक गठित मीटिंग में शासन के तहत उन्नाव से प्रधान शिक्षिका सोहरामऊ स्नेहिल पांडे को स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य बनाया गया है ।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को लेकर गठित टास्क फोर्स ने अगस्त महीने में उप मुख्यमंत्री जी उच्च शिक्षा तथा माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में इस कार्य में 28 सदस्यीय संचालन समिति गठित की गई है। जिसमें अपर मुख्य सचिव आईसीडीएस रेणुका मिश्रा ,एडीजी पुलिस विभाग, निदेशक आईसीडीएस उत्तर प्रदेश , महानिदेशक विजय किरन आंनद ,स्कूल शिक्षा निदेशक कौशल विकास मिशन को सदस्य बनाया गया है इसके अलावा इसमें ऐसी निदेशक मध्यान भोजन प्राधिकरण निदेशक साक्षरता वैकल्पिक शिक्षा और को भी नामित किया गया है तथा प्रधान शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय के एवम् समस्त जनपद के लिए गौरव की बात है।

■ पोस्टर वुमन -“मिशनशक्ति” उत्तर प्रदेश सरकार
स्नेहिल पाण्डेय उत्तर प्रदेश मे मिशनशक्ति की पोस्टर वुमन भी रही है।
2 .डॉक्टर दिव्या कौशिक

समय ही इंसान को नहीं बदलता कुछ इंसान ही समय को बदल देते हैं।समय सबसे कीमती वस्तु है, इसकी तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है।। यह हमेशा आगे की ओर सीधी दिशा में चलता है और न कि पीछे की ओर जीवन एक लंबी दौड़ है विजेता वही होता है जो कम समय में अपने लक्ष्य पर पहुँच जाए ।मनुष्य की पहली पहचान उसकी नम्रता है|” आदमी को अपनी पहचान बनाने के लिए अपने अंदर कुछ गुणों को होना जरूरी है। किसी किसी में ये गुण जन्मजात होते है विद्यमान गुणों को हमें थोड़ा और चमकाना पड़ता है, आप अगर आपकी जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ते जाते है तो आपकी पहचान अपने आप बनती जाती है। ऐसी ही अपनी अलग सी पहचान 22 दिसंबर 1982,अम्बाला में जन्म लेने वाली दिव्या कौशिक जी ने बनाई है ।
■ महिला सशक्तीकरण व शिक्षा को बनाया हथियार
दिव्या जी बचपन से ही सिविल सर्वेंट बनना चाहती थी और अधिक से अधिक लोगों की मदद करना चाहती थी अपनी एमफिल की परीक्षा शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात,वर्तमान में वह सरस्वती विद्या निकेतन अंबाला कैंट मे प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत हैं उनका कहना है कि शिक्षा हमारे उज्जवल भविष्य के लिए आवश्यक माधयम है।जो मनुष्य जीवन में कभी न कभी ज़रूर उपयुक्त साबित होती है ।जिसमें मनुष्य स्वयं और अपनी पहचान के बारे में एक स्पष्ट और अद्वितीय दृष्टिकोण विकसित करता है । आत्म-अवधारणा , व्यक्तित्व विकास और मूल्य सभी पहचान निर्माण से निकटता से संबंधित हैं।इसी शिक्षा को माध्यम बनाकर  प्रत्येक असंभव कार्य संभव कर दिखाया जिसने सभी महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए उन्हें अनेक सम्मान तथा पुरस्कारों से नवाज़ा गया जिनमें से कुछ एक ने उन्हें एक अलग प्रसिद्धि एवं पहचान दी है।

■ शिक्षा व सामाजिक क्षेत्र मे डा.दिव्या कौशिक की उपलब्धियां

●शिक्षा के क्षेत्र में अथक योगदान के लिए थियोफनी विश्वविद्यालय, Haiti व अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक संगठन, संयुक्त राष्ट्र द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि।
● अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप विश्वविद्यालय द्वारा (आईएसडीजीसी) 2021 को आयोजित एक कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित। 
●अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप विश्वविद्यालय द्वारा (ISDGC) 2021 को आयोजित एक कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित। 
●SIETIIE द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए, कुलपति, प्रोफेसरों और प्राचार्यों के साथ मंच साझा किया और सर्वश्रेष्ठ मुख्य वक्ता के रूप में चुनी गई। 
●SIETIIE नवीनीकरण और अनुसंधान और आदर्श विश्व शिक्षा (IDEAL WORLD EDUCATION) में ट्रस्टी।
●सीबीएसई सहोदय, उत्तराखंड द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में अतिथि वक्ता ।
● द्वितीय वितीय वितीय राष्ट्रीय एडुलीड कॉन्क्लेव (Edulead conclave) में भीष्म द डिटरमिनेशन अवार्डस से सम्मानित
● दैनिक भास्कर समूह द्वारा सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित
●श्री आरजे खंडेराव, क्षेत्रीय निदेशक सीबीएसई द्वारा एक मेगा कार्यक्रम की मेजबानी के लिए अंबाला का गौरव से सम्मानित। 
●ऐसे कार्यक्रमों की एंकरिंग की जिसमें माननीय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, सीएम और  श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (पूर्व मुख्यमंत्री) जैसे प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति मुख्य अतिथि थे। स्कूल प्राधिकरण द्वारा संचालन की सराहना की गईं।
●वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर टॉक शो होस्ट करें।
●हरिद्वार में राष्ट्रीय शिक्षक कार्यशाला में भाग लिया।
●12, विंग एएफ स्टेशन चंडीगढ़ में ऑक्सफोर्ड के सहयोग से सीआईईएफएल, हैदराबाद द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में वायु सेना स्कूल का प्रतिनिधित्व किया।
●स्प्रिंग रिंग डेट स्कूल, इस्माइलाबाद में अंग्रेजी भाषा शिक्षण और ध्वन्यात्मक कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित की। 
●इंटरनेशनल डेली राइजिंग स्कूल, जम्मू के लिए प्रभावी शिक्षाशास्त्र पर कार्यशाला आयोजित की Anee’s स्कूल, मोहाली में अखिल भारतीय प्रधानाध्यापक संघ द्वारा गतिशील नेतृत्व पुरस्कार।
●स्मार्ट सर्किट इनोवेशन द्वारा इंटरनेशनल एजुकेशन सिम्पोजियम एंड अवार्ड्स में इनोवेटिव प्रिंसिपल ऑफ द ईयर अवार्ड 2020।
●मिश्रित शिक्षण और शिक्षा-समय की आवश्यकता विषय पर एनआईएसए द्वारा किंगफिशर में आयोजित माइक्रो इनोवेशन अवार्ड समारोह में अतिथि वक्ता।
●अकाल अकादमी द्वारा प्रूडेंट प्रिंसिपल अवार्ड।
●शिक्षा बचाओ अभियान पर NISA द्वारा आयोजित कार्यशाला में अतिथि वक्ता।
●अटल स्मृति मंच द्वारा आमंत्रित अतिथि वक्ता।
●आरईपीसीआई फाउंडेशन द्वारा हैप्पी क्लासरूम फॉर माइंडफुलनेस लर्निंग पर अतिथि वक्ता।
●FIZ रोबोटिक सॉल्यूशन द्वारा विशेषज्ञ सम्मेलन श्रृंखला में अतिथि वक्ता
●ऑल इंडिया प्रिंसिपल एसोसिएशन द्वारा एनईपी 2020 पर समूह चर्चा में पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित ।
●इंटरनेशनल ओलंपियाड फाउंडेशन द्वारा शिक्षा उद्योग के लिए नए अवसरों और चुनौतियों पर एक पैनल चर्चा में अतिथि वक्ता।
●इंटरनेशनल डेली राइजिंग स्कूल जम्मू द्वारा गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में आमंत्रित।
● सतयुग दर्शन ट्रस्ट, फरीदाबाद द्वारा विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित।
● राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह की ओर से  सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन शिक्षा अवार्ड 2021ग्लोबल प्रिंसिपल अवार्ड 
● भारत रत्न विजेता हस्तियों पर आधारित वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स लंदन से सम्मानित प्रशस्ति पत्र
●आर्दिशनी पुस्तक में 70 महिलाओ में चयनित एवं सम्मानित।
 दिव्या जी ने बताया कि कभी भी सफलता का मार्ग आसान नहीं होता।हमारी ज़िन्दगी में भी कुछ ऐसे तूफ़ान आने तय हैं , ज़रुरत इस बात की है कि हम स्वयं को पहले से तैयार कर के रखें।और दूरदर्शी बने ।हम भी कुछ ऐसा करें कि कह सकें – ” जब हवा चलती है तो मैं सोता हूँ।”आपने एक सुप्रसिद्ध कहावत सुनी होगी कि शाम सूरज को ढलना सिखाती है।शमा परवाने को जलना सिखाती है ।गिरने वाले को होती है तक़लीफ़ ,पर ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है।उनका कहना था कि मैंने हमेशा अपने संघर्षमय यात्रा का आनंद लिया, कभी भी निराश नहीं हुई। सकारात्मकता ,सहनशीलता और धैर्य को एक महिला की शक्ति  कहा गया है इसलिए शक्ति और प्रतिभा को पहचान कर हम सभी को हमेशा कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। 
आर्थिक तंगी और कठिन हालातों के बीच बनाई अपनी पहचान
मुझे भी बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। मैं एक मेधावी छात्रा थी, लेकिन आर्थिक तंगी, पिता जी अस्वस्थ्यता ,उचित मार्गदर्शन समर्थन की कमी के कारण मुझे भी कई जगह  अपने क़दम पीछे हटाने पड़े ।फिर भी मैंने अपने हालात को ख़ुद पर कभी हावी नहीं होने दिया।मैंने 17 साल की उम्र से कमाई के साथ साथ अपनी शिक्षा जारी रखी ।मुझे अपनी ज़िंदगी के पूर्व हालातों और मजबूरियों पर कोई पछतावा नहीं है अपितु मैं बहुत गर्व अनुभव करती हूँ क्योंकि संघर्ष जितना कठिन होगा सफलता भी उतनी बड़ी और शानदार होंगी। यदि जीवन में आपको सफल होना है तो अपको रास्ते भी स्वयं चुनने होंगेऔर मंज़िलों तक भी स्वयं ही पहुँचना होगा उनका मानना है कि सीखना एक कला है और यह अनंत है। आवश्यकता है केवल परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की

3.मनोज कुमारी 

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नरहड मे जन्मी मनोज कुमारी की शादी हरियाणा के भिवानी जिले के गांव गोठडा मे हुई।पति और परिवार के सहयोग के बलबूते शिक्षा विभाग मे प्राथमिक शिक्षिका के रूप मे अध्यापन का कार्य शुरू करनेवाली बहुमुखी प्रतिभा की धनी जेबीटी शिक्षिका मनोज कुमारी अपने काम के प्रति समर्पण भाव के चलते आज शिक्षकों में अलग स्थान बनाने में कामयाब रही है।जिसके चलते हरियाणा सरकार ने उनका चयन राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया है।
◆बच्चों को पढ़ाने के लिए नए तरीके खोजे तथा उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया। 
लोहारु शिक्षा खंड के तहत राजकीय प्राथमिक स्कूल गिगनाऊ में प्राथमिक अध्यापक के रूप में सेवाएं दे रही मनोज कुमारी ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं के हुनर को निखारने का कार्य किया। इनकी वजह से स्कूल की टीम चाहे खेल की बात हो या सांस्कृतिक कार्यक्रमों की हमेशा अव्वल स्थान पर रही है। प्ले वे सामग्री तैयार करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।  उन्होंने छात्रों के लिए काउंटिंग व्हील, स्पेलिंग मशीन, एडिशन सब स्ट्रेशन मशीन के साथ हिंदी और अंग्रेजी भाषा, गणित जैसे विषयों को समझाने के लिए कई टीचिंग लर्निंग मैटीरियल तैयार कर पढ़ाने के तरीके अपनाए। 
◆कोरोना काल मे निभाई अहम एव निर्णायक भूमिका
शिक्षिका मनोज कुमारी ने जहां शिक्षक का धर्म तो निभाया ही वही साथ साथ मानवता का धर्म निभाते हुए कोरोना काल मे गरीब एव असहाय लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करवाने का काम किया।इसके साथ साथ उन्होंने कोरोना महामारी के लडने के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ साथ जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाने मे अहम भूमिका निभाई।
4.डा. संजीव खत्री
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध बहुमुखी प्रतिभा के धनी झज्जर जिले के गांव कुलासी के स्वतंत्रता सेनानी परिवार मे जन्मे डा. संजीव खत्री जो माडल संस्कृति स्कूल बहादुरगढ़ मे जीव विज्ञान के प्राध्यापक के पद पर शोभित है का चयन हरियाणा सरकार ने राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए किया है।1996 मे शिक्षा विभाग मे ज्वाईन करने के बाद अपनी मेहनत के बलबूते इन्होंने वर्ष 2000 मे पीएचडी की उपाधी प्राप्त की।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण व रचनात्मक गतिविधियों को दिया प्रोत्साहन 
जिस जीव विज्ञान शब्द को सुनकर ही बडे बडो का पसीना निकल जाता है।बच्चे जीव विज्ञान विषय को लेने से घबराते थे।ऐसे मे जीव विज्ञान प्राध्यापक के रूप मे डा. संजीव खत्री के सामने एक बहुत बडा चैंलेज बच्चों मे विषय के प्रति रूचि पैदा करना था।ऐसे मे इन्होंने खेल खेल मे पढाने वाली ऐसी अनेक विधियों का उपयोग किया कि बच्चों का झुकाव जीव विज्ञान की तरफ होने लगा फलस्वरूप इनके द्वारा पढाए गए विद्यार्थी जिला व राज्यस्तरीय विज्ञान एंव क्विज प्रदर्शनियों मे अव्वल आने लगे।डा. संजीव खत्री स्वयं कार्यशालाओं एंव सैमिनारो मे अग्रणी भूमिका निभाते है।
आधुनिक तकनीको का प्रयोग करने व शोध कार्यों के चलते राज्य स्तर पर छाएं
कोरोना काल से पहले जहा आनलाईन शिक्षा नाममात्र की होती थी उसी टाईम से पहले से ही डा. संजीव खत्री ने बच्चों को आनलाईन शिक्षा से जोडना शुरू कर दिया था।स्मार्ट बोर्ड, पीपीटी एंव आधुनिक शिक्षा संसाधनों के प्रयोग से इन्होंने बच्चों के लिए शिक्षा को आसान बना दिया।
इनके द्वारा खरीफ एवं रबी फसलों की बेहतर पैदावार के लिए किए गए शोध कार्यों पर लेख राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं मे प्रकाशित हो चुके है।इसके अतिरिक्त सामाजिक कार्यों के लिए इनके लेख उदघोष व शिक्षा सारथी पत्रिकाओं मे इनके लेख छपते रहते है।
एनसीसी अधिकारी के रूप मे इनका योगदान अतुलनीय रहा है।इनके द्वारा तैयार किए गए विद्यार्थी राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय परेडों मे अपनी काबिलियत का लौहा मनवा रहे है।इनकी बेटी जहा एमएनसी पूने मे साफ्टवेयर इंजीनियर है वही बेटा आईआईटी रूडकी से इंजीनियरिंग कर रहा है।वहीं इनकी पत्नी गणित प्राध्यापिका के रूप मे शिक्षा विभाग मे अपनी सेवा दे रही है।
5. डॉ स्नेह लता
डा. स्नेहलता पी जी टी राजनीति विज्ञान, राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गुरूगाम में कार्यरत हूँ।सरकारी स्कूल में मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद वनस्थली विद्यापीठ विश्वविद्यालय से मास्टर आफ फिलासफी, डॉ आफ फिलासफी की उपाधि प्राप्त की। 18 महीने विश्वविद्यालय में लेक्चरर पद पर आसीन रहने के बाद 1999 से हरियाणा सरकार के विधालय में कार्यरत हूँ। 22 साल के कार्यकाल में मैने शिक्षा विभाग में शिक्षक प्रशिक्षण हेतु मास्टर ट्रेनर ओर रिसोर्स पर्सन कार्य किया है। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में लेख प्रकाशित एवं पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। विधार्थियों का शिक्षा के साथ सर्वागीण विकास करना इनका मकसद है। 
■ सांस्कृतिक गतिविधियों एंव कल्चरल गतिविधियों ने दिलाई पहचान शिक्षा के अतिरिक्त अन्य कार्य पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, स्वच्छता अभियान, रोड़ सेफ्टी जागरूकता, कला उत्सव, बाल रंग, बेटी बचाओ अभियान, लिगल लिटरेसी प्रतियोगीता,राष्ट्रीय पर्व  गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस एवं स्टूडेंट पुलिस कैडेटस में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई है। विधार्थियों के साथ  एडवेंचर एवं शैक्षणिक शिविरों में भी राज्य स्तर पर भाग लेकर पुरस्कार जीते हैं। स्टूडेंट पुलिस कैडेटस में विधालय की अलग पहचान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 
■ शिक्षा एंव सामाजिक कार्यों के लिए मिला सम्मान
शिक्षा के साथ सामाजिक कार्यो में सराहनीय कार्य करने के लिए कई बार सम्मानित किया गया है:एमपावरड वूमन अवार्ड, वूमन आफ दि मिलेनियम अवार्ड, आइडल वूमन अवार्ड प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति करनाल द्वारा, शान ए हरियाणा अवार्ड अखिल भारतीय महिला रक्षा मचं द्वारा, शिक्षा विभाग के सयुक्त निदेशक द्वारा हरियाणा शिक्षक गौरव सम्मान, जिला प्रशासन गुरूगाम की तरफ से शिक्षा मंत्री माननीय श्री राम विलास शर्मा जी द्वारा प्रशंसा पत्र, जिला बाल कल्याण परिषद गुरूगाम द्वारा निर्णायक मंडल के लिए, हरियाणा बाल कल्याण परिषद गुरूगाम द्वारा निर्णायक मंडल के लिए माननीय श्री कृष्ण ढुल जी द्वारा प्रशंसा पत्र, गुरूगाम पैनडेमिक वूमन अचीवरस अवार्ड से सम्मानित किया गया है। मास्टर एथलीट फेडरेशन आफ इंडिया में राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेकर प्रशंसापत्र प्राप्त किया। बोर्ड परीक्षा में शत प्रतिशत रिजल्ट के साथ विधार्थी उतीर्ण होते हैं। 
6. श्रीमती दलवंती

उम्र के किसी भी पड़ाव से आदमी जब सच्ची लगन और ईमानदारी के साथ मेहनत शुरू करता है तो सफलता ही उसका कदम चूमने लगती है।  ऐसे बहुत सारे उदाहरण हमारे आसपास में अनायास ही मिल जाते हैं।  ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया झज्जर जिले के राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय भदानी में बतौर विद्यालय प्रभारी कार्यरत दलवंती ने। हाल ही में हरियाणा सरकार द्वारा जारी वर्ष 2020 के हरियाणा राज्य शिक्षक पुरस्कार सूची में अपना स्थान बनाने वाली जिले की एकमात्र प्राथमिक शिक्षिका दलवंती न केवल जिले के लिए बल्कि राज्य भर के बहुत सारे शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
 सामाजिक तथा लेखन गतिविधियों के अलावा शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन की ध्वजवाहक हैं ये शिक्षिका

 उम्र के जिस मुकाम पर आकर लोग थक जाते हैं उस पड़ाव पर आकर दलवंती ने इंटरनेट, वीडियो ग्राफी तथा आईसीटी के विभिन्न प्रयोग सीखे जिसका परिणाम यह रहा कि हरियाणा सरकार द्वारा एजुसेट पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में इनकी अलग-अलग वीडियो चयनित हुई वही सरकार के द्वारा इनके द्वारा तैयार की गई शिक्षण प्रशिक्षण सामग्री की प्रशंसा भी की गई। इसी के चलते हैं बहुत सारी सामाजिक संस्थाओं ने भी दलवंती को अनेक मंचों पर सम्मानित किया। 

 पुरस्कार के लिए नहीं आत्म संतुष्टि के लिए करती है काम
शिक्षिका दलवंती की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह एक ऐसी शिक्षिका हैं जो किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि आत्म संतुष्टि के लिए काम करते हैं।  इनके अनुसार जब तक यह बच्चों की शिक्षा से जुड़ा हुआ काम प्रतिदिन नए रूप से नहीं कर लेती तब तक इनको चैन नहीं आता।  शायद इसी का यह परिणाम है कि साथी मित्रों के कहने पर जब उन्होंने पहली बार राज्य पुरस्कार के लिए आवेदन किया तो पहली बार में ही इनका चयन हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा राज्य पुरस्कार  के लिए कर लिया गया। इतना ही नहीं इनके द्वारा तैयार की गई वीडियो एजुसेट पर लगातार प्रसारित की जाती रहती है जिनको बच्चे बड़े चाव से देखते हैं। 
■प्रोजेक्ट बुनियाद के लिए लगा दिए सारे रविवार
दलवंती सहरावत की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि आज पड़ोस के क्षेत्रों में एक भट्टों पर मजदूरी करने वाले मजदूर माता-पिता के बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच पाते हैं।  ऐसे बच्चों को चिन्हित करके विद्यालय पहुंचाना अति आवश्यक था । बहुत प्रयास करने के बाद भी जब बच्चे विद्यालय तक नहीं पहुंच पाए तो उन्होंने संकल्प लिया कि विद्यालय को बच्चों तक पहुंचाया जाए और बुनियाद एक भट्टा पाठशाला नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया। कार्यक्रम के तहत ईट भट्टों पर ऐसे बच्चों को चिन्हित किया गया जो विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं तथा जिनकी पढ़ने में दिलचस्पी है । ऐसे बच्चों के लिए दलवंती ने एक भट्टा पाठशाला शुरू की और दर्जनों बच्चों को शिक्षित करने का काम किया। शिक्षिका बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट के बाद उनका आत्मविश्वास और ज्यादा मजबूत हुआ तथा विभाग के द्वारा भी इस प्रोजेक्ट को काफी सराहा गया। ■ शिक्षिका के साथ-साथ एक लेखिका की भी अलग पहचान
दलवंती सहरावत की छवि एक शिक्षिका होने के साथ-साथ एक लेखिका के रूप में भी है। समय-समय पर पत्रों के लिए लेख लिखना उनकी रुचि रही है । इतना ही नहीं काव्य संकलन ‘मैं तेरी आवाज माँ’ ‘  साझा काव्य संकलन ‘नवरस’  इन के सानिध्य में प्रकाशित हुआ। अगला संकलन लघुकथा लेखन प्रकाशन के लिए तैयार है। 

■ चैंपियन टीचर ऑफ द वीक ने दी और मजबूती

बकौल दलवंती आदमी को मनोवैज्ञानिक रूप से उत्साहवर्धन मिलना अति आवश्यक है । मेरे लिए वह बड़ा अचरज वह खुशी से भरा पल था जब मुझे जिले का चैंपियन टीचर ऑफ द वीक बनाया गया।  यह वह समय था जब मुझे अपने आप को सर्वश्रेष्ठ तरीके से प्रस्तुत करना था तथा अन्य लोगों की सहायता भी करनी थी।  उस समय ने मुझे और ज्यादा मजबूत किया तथा शिक्षण तथा सामाजिक गतिविधियों में लगातार बने रहने के साथ-साथ बदलाव करने के लिए प्रेरित किया। 

7.चंचल शर्मा

चंचल शर्मा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मुल्लाहेड़ा गुरुग्राम मे हिंदी अध्यापिका के पद पर तैनात है।इनकी शैक्षणिक योग्यता – एम ए हिंदी, प्राप्य प्रशिक्षण हिंदी, एम ए अंग्रेजी है।वर्ष 2000 से 2015 तक कक्षा 6 से 10 तक के स्तर की कक्षाएं ली l अब कक्षा 6 से 8 कक्षाओं के अध्यापन कार्य किया जा रहा है l वर्ष 2000 से ही अध्यापन के साथ-साथ विद्यालय के सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना वह मंच संचालन तथा विभाग द्वारा दिए गए सभी प्रतियोगिताओं को करवाना तथा  विद्यालय के अतिरिक्त प्रतियोगिता संबंधी जहां भी मुझे मौका दिया गया बड़े उत्साह व कुशलतापूर्वक सराहनीय कार्य किया है l
 ■ शिक्षा के क्षेत्र मे मिला सम्मान————–

 प्रशस्ति पत्र– (22-11-2010 से 25-112010) 24 हरियाणा स्टेट प्राइमरी स्कूल टूर्नामेंट एस ए मेंबर ऑफ रिकॉर्ड रिजल्ट एंड सर्टिफिकेट कमेटी l
प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह (05-09-2017) – शिक्षक सम्मान प्रशस्ति पत्र फ्रॉम हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स एसोसिएशन इंडिया हरियाणा यूनिट l
 प्रशस्ति पत्र(28-05-2019) – विद्यालय की प्राचार्य द्वारा आउटस्टैंडिंग कंट्रीब्यूशन इन एवरी फील्ड रिलेटेड टू स्कूल
 प्रशंसा पत्र (2018-19)-स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट हरियाणा फॉर आउटस्टैंडिंग कमिटमेंट सपोर्ट एंड डेडीकेशन इन क्विज कंटेस्ट एट वैरीयस लेवल्स फॉर द पीरियड फ्रॉम 2018-2019.
 प्रशंसा पत्र(13-11-2018)- जिला स्तरीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता गुरुग्राम 2018-19 को क्विज के आर पी के रूप में सराहनीय कार्य के लिए सलवान पब्लिक स्कूल सेक्टर 15 में सम्मानित किया गया l
प्रशंसा पत्र (07-02-2020)-हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर अवार्डेड फॉर सर्विंग एज़ अ ज्यूरी मेंबर इन बाल महोत्सव 2019 इन सहयोगी एवं स्वयंसेवक सम्मान समारोह l
 प्रशंसा पत्र(14-11-2019)-हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद शाखा गुरुग्राम द्वारा अवॉरडीड फॉर सर्विंग एस ज्यूरी मेंबर इन क्विज बाल महोत्सव कंपटीशन l


गुरूजी को सादर प्राणाम – कविता जेबीटी अध्यापक कैथल

हमें प्यार से सहलाकर
हर कमी को अपनाकर
अच्छे बुरे का भेद बताकर
कराया हमें अतुलनीय ज्ञान
गुरु जी को मेरा सादर प्रणाम।

देखा हमनें इतना समर्पण
सारा जीवन शिक्षा को अर्पण
समाज को दिखाकर दर्पण
करते हैं ये देश निर्माण
गुरु जी को मेरा सादर प्रणाम।

जीवन की राह दिखाकर
ज्ञान का दीपक जलाकर
अंधेरे में उजियारा फैलाकर
ये ही तो हैं साक्षात भगवान
गुरु जी को मेरा सादर प्रणाम।

जिंदगी की ये नींव बनाए
सबकी नैया पार कराए
ऊंच-नीच का भेद मिटाए
देते हैं ये विद्या दान
गुरु जी को मेरा सादर प्रणाम।

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