कोरोना आपदा में “हंसाने के लिए” धन्यवाद स्वरा भास्कर

विवेक कुमार पाठक
हाल ही में दिल्ली के एक सेकुलरटाइप पत्रकार ने जब ट्विटर पर अपना विचार व्यक्त किया कि कोरोना पर नियंत्रण के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी को एक नयी टीम को जरुरत है तो मोदी सरकार और खासतौर से पीएम नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जहरीली नफरत लगातार प्रदर्शित करने वाली स्वरा भास्कर अपना आपा खो बैठीं। आपदा में अवसर ढूंढ़ते हुए उन्होंने अपनी राजनैतिक कुंठा और नफरत को बदले हुए शब्दों में पेश की। वैश्विक और राष्ट्रीय कोरोना आपदा के समय स्वरा ने लिखा कि अब भारत को नए पीएम की जरुरत है।
मित्रों पहले तो ये कि दो चार दस पचास और कुछ हजार और यहां तक की लाख दस लोग और कुछ करोड़ स्वरा जैसे समर्थक भी चाहें तो भी कोई सेकुलरवादियों का चहेता नेता इस विशाल देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है।
हमारा भारत कुछ एजेंडाशुदा कथित बुद्धिजीवियों, सेकुलरों और राष्ट्रवादी विचार को दिन रात कोसने वाले लोगों की चाहतों से नहीं चलता। आजादी के बाद से ये देश स्वस्थ लोकतंत्र से चल रहा है। देश में करोड़ों जनता जिसे लायक समझती है वो देश का नेतृत्व करता है। भारत में नरेन्द्र मोदी ने कोई आकाश से उतरकर नईदिल्ली के सिंहासन का अपहरण नहीं कर लिया है। 2014 में सवा अरब आबादी वाले इस देश ने 10 साल के कुशासन और भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए यूपीए सरकार की इमारत को जमींदोज कर दिया था। उस वक्त एनडीए की सरकार तब बनी थी जब पूर्ण बहुमत से भी ज्यादा समर्थन देश ने मोदी के नाम पर दिया था। अगर मोदी से पहले की सरकारों का देश के विकास में योगदान को कथित बुद्धिजीवी खारिज नहीं करते तो फिर एक चुनी हुई सरकार के प्रति घोर असहिष्णुता उनके मन में क्यों है। क्या ये भारत के जनमत का अपमान नहीं है। अगर एनडीए और नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार देश की सेवा करने में सक्षम नहीं थी तो फिर देश की जनता ने 2019 में उन पर किस आधार पर अपना प्रचण्ड विश्वास जताया।
स्वरा भास्कर, कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवाणी क्यों भूल जाते हैं कि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद और प्रचंड जनादेश लेकर 2019 में भारत के दुबारा प्रधानमंत्री बने थे। क्या भारत की जनता इतनी मूर्ख है कि पांच साल मतलब करीब 1825 दिन, करीब 43800 घंटे के दीर्घ समय बीतने के बाद भी वो यह तय करने में सक्षम नहीं है कि भारत की बागडोर मौजूदा विकल्पों में से किसे सौंपी जानी चाहिए। निश्चित ही पहले 2014 में भारत की जनता ने पदलोलुप और भ्रष्टाचार में कंठ तक डूबी सरकार के खिलाफ जनादेश दिया था लेकिन 2019 का जनादेश नरेन्द्र मोदी सरकार पर देश की विश्वसनीयता का प्रतीक था। अपनी कुंठाओं और नरेन्द्र मोदी के प्रति नफरत में स्वरा भास्कर भूल जाती होंगी मगर हम नहीं भूल सकते कि 2019 में देश में विपक्ष के किसी दल और नेता की इतनी भी विश्वसनीयता नहीं बची थी कि उन्हें संसद में विपक्ष का दर्जा दिया जाए। विपक्ष के प्रति यह घोर अविश्वास क्यों स्वरा भास्कर, कन्हैया कुमार सरीखे लोग नहीं पचा पा रहे हैं।
कोई दो राय नहीं कि उन्हें सरकार के कामकाज की आलोचनाओं का लोकतांत्रिक अधिकार है। केवल स्वरा भास्कर को ही नहीं बल्कि देश के हर नागरिक को सरकार के कामकाज पर स्वस्थ आलोचना और विचार रखने का अधिकार है। कोरोना महामारी केवल भारत की नहीं बल्कि समूचे विश्व पर आयी आपदा है। जब मार्च 2020 से समूचे अमेरिका, कनाडा, इटली में कोरोना से लगातार मौत हो रहीं थी और जब इन देशों में हर क्षण शवों के आंकड़े दुनिया को दहला रहे थे तब दुनिया की दूसरी आबादी का सबसे बड़ा लाॅकडाउन नरेन्द्र मोदी सरकार की दूरदर्शिता का परिणाम था। विकासशील भारत ने तब कोरोना के साथ अर्थव्यवस्था, कमजोर वर्ग को जीवन सुरक्षा से लेकर कई मोर्चे पर संघर्ष किया था और पहली लहर से देश को लगभग सकुशल बचा लिया था। उस समय में आयात की गई पीपीई किट से लेकर एक साल में वैक्सीन बनाकर हम दुनिया को भी वैक्सीन बांट चुके हैं। इस एक साल में इन उपलब्धियों के बाबजूद हमने आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जो काम किया वो निश्चित रुप से 2021 की दूसरी लहर के शुरुआत में कमतर साबित हुआ है। भारत सरकार ने दूसरी लहर के लिए आॅक्सीजन की सतत आपूर्ति के जो इंतजाम किए वे भरपूर और बेहतरीन तो नहीं कहे जा सकते। सच है कि सवा अरब की आबादी वाले देश में अस्पताल और बेड कम पड़े हैं मगर निरंतर युद्ध स्तर पर वे बढ़ाए भी जा रहे हैं। निश्चित ही अस्पतालों में आॅक्सीजन के लिए हायतौबी मची है मगर इसी सरकार ने आॅक्सीजन एक्सप्रेस से लेकर वायुसेना तक को इस आपदा के नियंत्रण के लिए उतारकर स्थितियां तेजी से काबू में की हैं और आगे का इंतजाम किया जा रहा है। कोरोना से दहलती दुनिया को पहली लहर में हाॅइड्रोक्लोरोक्वीन दवा लगातार भेजकर भारत ने मानवता का फर्ज निभाया था आज दूसरी लहर के चरम पर शेष दुनिया भारत के साथ आ खड़ी हुई है। अगर भारत ने कई महीने पहले दुनिया के विकसित और विकासशील देशों को कोरोना वैक्सीन की मदद की थी तो अमेरिका , बिट्रेन, रुस, आॅस्ट्रेलिया सरीखे तमाम देश भारत को स्वप्रेरणा से वैक्सीन और वैक्सीन बनाने की सामग्री प्रतिउत्तर में भेज रहे हैं। संकट के समय दूसरे देशों के प्रति भारत की भलाई आज भारत के काम आ रही है। क्या ये विदेशी मदद नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति को देश के समाने स्पष्ट नहीं करती।
निसंदेह कोरोना की दूसरी लहर से निबटने केन्द्र और राज्य सरकारों की अपेक्षित दूरदर्शिता और रणनीति में कुछ चूक हुई है और अगर इसकी देश में अनेक लोग आलोचना कर रहे हैं तो नेतृत्वकर्ता को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। जो काम करेगा गलतियां भी उसी से होंगी, कमियां भी उसी से होंगी और उसकी पूर्ति भी वही करेगा और उसे ही करना चाहिए। मोदी सरकार ने भी आॅक्सीजन की शुरुआती कमी सामने आने के बाद न केवल देश के विभिन्न औद्योगिक संयंत्रों को आॅक्सीजन उत्पादन केन्द्र में तब्दील कर दिया बल्कि पूरे देश में दिल्ली से लेकर जिला और ब्लाॅक स्तर तक आॅक्सीजन प्लांट युद्ध स्तर पर लगाना शुरु कर दिए। बीच की अवधि में आॅक्सीजन की आपूर्ति एक राज्य से दूसरे राज्य वायुसेना के विमानों और आॅक्सीजन एक्सप्रेसों से सुचारु कराकर पूरे देश में आपूर्ति को बहाल किया है। इसके अलावा दवाओं और आॅक्सीजन बेड की किल्लत के लिए युद्ध स्तर पर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के मुख्यमंत्री काम कर रहे हैं।
संघीय व्यवस्था वाले भारत में प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री ही नहीं पूरी सरकारी मिशनरी दिन रात काम कर रही है। जो सफलताएं 2020 के पहले लाॅकडाउन से मिलीं वे पीएम , सीएम, नौकरशाही सबकी थीं तो 2021 की लहर में जो कुछ कमी रही वे भी संघीय भारत में सबकी हैं। इन सबके बाबजूद केन्द्र और 28 राज्यों और 7 केन्द्र शासित प्रदेशों वाले भारत में कोरोना के खिलाफ एकजुटता से यह जंग निर्णायक रुप से लड़ी जा रही है। इस समय नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री के रुप में इस लड़ाई के मुख्य नेतृत्वकर्ता हैं तो विपक्ष से लेकर बुद्धिजीवियों, मीडिया और आम नागरिक भी उनकी स्वस्थ आलोचना से लेकर उन्हें सलाह और नसीहतें देने के हकदार हैं। सुनने और सुनकर सबक लेने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है मगर इन सबके बीच आपदा में देश को अस्थिर करने का अवसर ढूंढ़ने वाली घृणित राजनीति के अनुभवियों को शर्म आनी चाहिए। हम जानते हैं कि आपको पीएम नरेन्द्र मोदी से पल पल प्रति क्षण होने वाली अत्यंत घृणा है। राष्ट्रवादी विचार वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अवचेतन और चेतन मन के सभी आयामों तक घृणा है। आपको राममंदिर के नाम और उसके निर्माण के हर समाचार से घृणा है। आपको सनातन परंपराओं और हिन्दुत्व जीवनशैली विचार से भी घृणा है मगर देश के नागरिक होने के नाते आपदा में एक निवेदन इस नागरिक का भी सुनिए। इस निरंतर सिंचित घृणा में दिन रात घुटते हुए केवल मनवांछित नेता और दल विशेष को सत्ता न दिला पाने की अपनी कुंठाओं को हमेशा न सही मगर कृपया कर कोरोना की वैश्विक आपदा में तो दूर रखिए। आप समय समय पर गाल बजाकर मीडिया में लोकतंत्र की बात करते हैं तो इस देश की चुनाव प्रक्रिया में भी पूरा विश्वास रखिए। 2024 में फिर आम चुनाव होंगे तब पीएम परिवर्तन के लिए अपनी पूरी बिग्रेड को साथ लेकर यलगार अवश्य करिएगा मगर केवल तब तक के लिए कृपया भारतवर्ष द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तो सहन कर लीजिए। माथा ठंडा करके जरा पानी पीजिए फिर सोचिए कि आपके चाहने भर से आपके प्रिय नेता या नेत्री को जनादेश खारिज करके लोकतांत्रिक भारत कतई सहन नहीं कर सकता। अंत में एक बात के लिए धन्यवाद आपका हक है।
आपके मूर्खतापूर्ण सपनों से महामारी से जूझता भारतवर्ष कुछ क्षण के अवश्य ही हास्य आसन करेगा जिसके लिए आपका पुनः बारंबार धन्यवाद स्वरा।

3 thoughts on “कोरोना आपदा में “हंसाने के लिए” धन्यवाद स्वरा भास्कर

  1. उसके “मूर्खतापूर्ण सपनों” को लेकर विवेक कुमार पाठक जी द्वारा प्रवक्ता.कॉम पर प्रस्तुत अभिनेत्री के नाम व्यक्तिगत संदेश न केवल अंग्रेजी भाषा के माध्यम में पढ़ पाश्चात्य सोच से प्रभावित भारतीय-समाज में लगे कुछ एक दीमकों, अपितु उन दीमकों को अनावश्यक आश्रय देती देश की राजनीति में सेंध लगाए राष्ट्र-विरोधी पत्रकारिता के मुंह पर तमाचा है। आज कोरोनावायरस जैसी भयानक महामारी से जूझते राष्ट्रीय शासन व भारतीय जनसमूह में परस्पर सूझबूझ, सहभागिता, व परानुभूति पर आधारित योगदान की आवश्यकता है।

  2. स्वरा भास्कर उन लोगों में से हैं जिन की अपनी कोई औक़ात ही नहीं हैं मोदी का विरोध कर जीने वाली बदजात औरत से ज़्यादा वह कुछ नहीं यह अख़बारों में छपने दलाल मीडिया की वाह वाह लेने के लिए अपनाए जाने के हथकंडे हैं जिन्हें बता कर ये खुद को बुद्धिजीवी कहने का ढोंग करते हैं
    इस महिला से मोदी का विकल्प पूछिए ये टुकडेल कलाकार नाम छपवाने के लिए देश का विरोध करते हैं ऐसे लोगों का बहिष्कार किया जाना चाहिए

Leave a Reply

37 queries in 0.373
%d bloggers like this: