लेखक परिचय

चन्द्र प्रकाश शर्मा

चन्द्र प्रकाश शर्मा

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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ist2_5569861-china-dragonचीन ने पहले अप्रैल में भारत में 19 किलोमीटर अन्दर घुसकर तम्बू गाड कर एक तरह से दुसरे कारगिल की तैयारी कर दी थी  .अब 17 जून को चीन ने लद्दाख के चुनार में भारतीय सेना के बनकर ध्वस्त कर दिए और चीनी सैनिको पर नजर रखने के लिए केमरे  तोड़ डाले उनकी तारें काट दी .कुछ केमरे अपने साथ भी ले गये .  इस घटना पर अभी तक विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने चुप्पी साध रखी  है . भारत के विरोध जताने पर रक्षा मंत्री के चीन दोरे से एक दिन पहले टूटे कैमरे लोटाये जो वे अपने साथ ले गये थे .चीन अपने सिकियांग प्रान्त से पकिस्तान की ग्वादर बंदरगाह तक 200 किलोमीटर लम्बी  सुरंग भी तैयार करने में लगा हुआ है और एक  अभी हाल ही में हुए एक  समझौते में 820 किलोमीटर लम्बा कारीडोर बनाने पर भी समझौता हुआ है .  ये सुरंग और कारीडोर पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरेगी . मतलब साफ़ कि एक विवादस्पद स्थान को चीन इस तरह पाक का हिस्सा मान कर मान्यता दे रहा है और हम बेबस होकर सब कुछ देखने पर मजबूर हैं . चीन हमारे सभी पड़ोसिओ नेपाल,भूटान, म्यामार ,बांग्लादेश ,मालदीप , श्री लंका  से धन बल और बाहुबल से अपने पक्ष में करके हमें कमजोर करने  में लगा हुआ है और समुद्री क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करके हमे चारो तरफ से घेरने की नीति पर चल रहा है।  चीन  और  अमेरिका ने पाक को  भरपूर सैनिक मदद देकर हमारे लिए एक गंभीर चुनौती खडी कर दी है . ये चीन -पाक का नापाक  गठजोड़ भारत के लिए कितना खतरनाक साबित होगा इस तरफ भारत बिलकुल आंखें बंद किये हुए है या जानते हुए भी बेबस बना हुआ है . भारत आखिर क्यों नहीं अंतराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाता और अपने पक्ष में विश्व जनमत तैयार करता .      .   अफ़सोस इस बात का है कि देश की एकता और अखंडता पर बार बार  कुलहाड़ी चलाई जा रही है  लेकिन भारत की बैगरत और नपुंसक सरकार अभी भी  ठंडी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही है .

होना तो ये चाहिए था कि पूरी भारत सरकार -विपक्ष सारे  आपसी मतभेद भुला कर इस मुद्दे को पूरे जोर शोर से राष्ट्रिय अंतर राष्ट्रिय स्तर पर उठाते, चीन से व्यापारिक सम्बन्ध निलंबित कर दिए जाते . पूरे देश में रेप मामले की तरह जोर शोर से प्रदर्शन होता, पूरा मीडिया इस मुद्दे को एक ज्वलंत मुद्दा बनाता, भारत इस मुद्दे पर मित्र देशो से सम्पर्क करता, चीन पर सैनिक, राजनितिक, कुटनीतिक और व्यापारिक दबाव बनाता लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ . . चीन जानता है  कि उसे उसके हर  दुस्साहस की भारत की तरफ से ठंडी प्रतिक्रिया ही मिलेगी .भारत उसे निकालने  के लिए सैनिक कारवाई  की हिमाकत नहीं सकता   पहले वो इंच दर इंच  फिर फुट, फिर गज , फिर मीटर , फिर किलोमीटर , फिर  बीस किलोमीटर और किसी दिन सीधा 10 जनपथ पर तम्बू गाड लेगा .

 

भारत का कमजोर नेतृत्व उसकी चाल नहीं समझ पा  रहा। चीन सीधे सीधे हमारे पड़ोसियो  नेपाल, भूटान, श्रीलंका  मालदीव म्यामार आदि को अपनी ताकत , धोंस और आर्थिक मदद के बल पर भारत को चारो तरफ से घेर कर मारना चाहता है लेकिन ये बात किसी की समझ में नहीं आ रही      हमारे रहनुमा चुपचाप तमाशा देख रहे हैं हमारे देश के नेताओ और जनता का खून ठंडा हो चुका है . हमारे बाज़ार चीन के माल से अटे पड़े हैं .किसी व्यापारी ने चीन के माल का बहिष्कार नहीं किया .हमारे लिए पहले रोजी रोटी , मोटा प्रॉफिट/मार्जिन ज्यादा महत्वपूर्ण है . देश जाये भाड़ में . कोई भी देश वासी इस  मुद्दे पर बात ही करता नजर नहीं आता . ये हमारे दुर्दिनो की निशानी है .

देशवासियो को मानसिक रूप से तैयार हो जाना चाहिए ड्रैगन की भारत को सीधे सीधे निगलने की स्पीड तेज हो गयी है .जहाँ चीन सैनिक शक्ति के मामले में भारत से काफी आगे निकल चुका है वहीँ भारत राजनीतिक स्तर पर दिवालिया हो चुका है और एक नये 1962 की पुनरावृति होने जा रही है . अभी भी  ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ा है चीन को उसकी ही भाषा में जबाब दिया जाना चाहिए और कडा सन्देश देना चाहिए कि चीन भारत को कम आंकने की हिमाकत न करे। भारत अपने किसी भी इलाके में कहीं बंकर,हवाई पट्टी बनाये और सेना और लड़ाकू विमान तैनात करे। ये भारत का आंतरिक मुद्दा है चीन होता  कोन है भारत को निर्देश देने वाला।  यदि हम अब भी नहीं संभले तो एक दिन चीन  अरुणाचल समेत पूरे पूर्वी भारत को निगल लेगा .

 

वतन की फ़िक्र कर नादां मुसीबत आने वाली है, तेरी बरबादियो के तज्करे हैं आसमानों में ,

संभल जाओ  ओ हिन्दुस्ता वालो तुम्हारी दास्ताँ तक ना होगी दास्तानों में .

 चन्द्र प्रकाश शर्मा

2 Responses to “चीन का फिर दुस्साहस”

  1. शिवेंद्र मोहन सिंह

    शर्मा जी चीन ये हरकतें नहीं कर रहा है बल्कि भारत के लोग ही चाह रहे हैं की चीन ये सब करता रहे, या यहीं १० जनपथ तक आ जाए। ये मेरी ओपिनियन नहीं है …. ये ही भारत के लोगों की मंशा हैं, अगर ऐसा नहीं होता तो लोग सडकों पर आते, सरकार पर दबाव बनाते। और तो और ६३ सालों से कांग्रेस की सरकार बनवा कर लोग और क्या कर रहे हैं ? कांग्रेस कोई अपने आप तो सत्ता में आ नहीं जाती है। हर ५ साल बाद चुनाव होते हैं। और जनता फिर फिर इन्हों को ही सत्ता देती है, इसका साफ़ मतलब है की जनता की ही रजामंदी है। फिर इनका क्या दोष? हम आप सरीखे सिर्फ अपना खून ही जला सकते हैं और कुछ नहीं।


    सादर,

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