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    कोरोना का विकराल होता स्वरूप

    वायरस एवं मानवजाति के बीच संघर्ष लगभग 100 वर्ष पुराना है जितना अभी तक ज्ञात है इनमें से स्पेनिश फ्लू, प्लेग, सार्स, मार्स इबोला जैसे विषाणुओं ने समय-समय पर मानवता पर चोट पहुचाई है और यही कारण रहा है कि विज्ञान ने जैसे-जैसे तरक्की की हमें इनके बारे में अध्ययन एवं शोध करने का अवसर मिला । यद्यपि मानव जाति आज 21वी सदी में वायरस के उत्तपन्न होने के कारण एवं इससे निजाद पाने के सभी उपाय विकसित कर सका है अथवा नहीं ? इस प्रश्न का उत्तर कोरोना वायरस की महामारी से पता चलता है । यद्यपि हमनें चेचक, पोलियो आदि बहुत से वायरस जनित बीमारियों के टीके बनाये है और इन्हें जड़ से खत्म भी किया है ।

    विज्ञान की इस उपलब्धि के पश्चात भी अभी हमें बहुत कुछ सीखना है, जिसमें सबसे पहली कड़ी प्रकृति के मूल स्वरूप को बचाये रखना और “जियो और जीने दो” के साथ जीवन प्रणाली को विकसित करना है ।

    यदि हम कोरोना के वैश्विक महासमारी को देखें तो एक बात तो सिद्ध हो जाती है कि आज भी मानव का कद प्रकृति के समक्ष बौना ही है ।   चीन के वुहान से निकला कोरोना वायरस वर्तमान समय में विश्व के लगभग 215 देशों को अपनी चपेट में ले लिया है । इस वायरस से पूरे विश्व में लगभग 1.5 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा लगभग 93 लाख लोग ठीक भी हो चुके है और लगभग 6 लाख 30 हजार लोगों की मृत्यु हो चुकी है ।

    चीन के वुहान से निकला कोरोना इटली,ईरान, अमेरिका यूरोप,भारत आदि में ऐसी गति से फैला कि किसी को भी सम्हलने का अवसर नहीं मिला ।

    और सबसे हैरान कर देने वाली बात यह कि कोरोना वायरस मनुष्य के छीकने, खाँसने, बोलने से निकले ड्रॉपलेट्स से फैला और 4 से 5 महीने से भी कम समय में इसने विकराल रूप के साथ विश्व के लगभग सभी देशों तक फैल गया ।

    विश्व भर में कोरोना के कुल ऐक्टिव केस 53 लाख से अधिक हैं । भारत भी इससे बिल्कुल अछूता नहीं भारत में भी लगभग 12 लाख 41 हजार लोग संक्रमित हुए और दुर्भाग्य वश 30 हजार लोगों की मृत्यु हो हो गई । 

    यह आंकड़े यह बात सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं कि इस वायरस के संक्रमण की गति कितनी तेज है तथा यह सभी आयुवर्ग के लोगों यहाँ तक की बच्चों को भी संक्रमित कर रहा है और साथ-साथ कुछ पशुओं को भी ।

    अब प्रश्न यह है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान (सी फ़ूड मार्केट) से अस्तित्व में कैसे आया यह वायरस कैसेे 6 से 7 महीनों में लगभग सम्पूर्ण विश्व तक व्यापक रूप से फैला और मृत्यु लीला रच डाली, मनाव समाज, तमाम महाशक्तियां सब कुछ देखते हुए भी किंकर्तव्यविमूढ़, मूक दर्शक बन कर रह गई जबकि चीन जहां से यह वायरस शुरू हुआ, में इसी समय कोरोना से मुक्ति पाने का जश्न मनाया गया जो समूचे विश्व को मुह चिढाने जैसा था । यह प्रश्न उठना लाजमी है कि चीन ने कौन सी जड़ी बूटी तैयार कर ली जो दुनिया भर के अन्य डाक्टर, वैज्ञानिक नही तलाश सके ! 

    यह गम्भीर और जांच का विषय है, किन्तु ध्यान देने की बात यह भी है कि WHO प्रमुख के चीन दौरे पर जाने के बाद और वहाँ की स्थिति को देखने के बाद भी यह कैसे नहीं समझ सके कि यह मनुष्य से मनुष्य में तेजी से फैल रहा है ।

    यह निश्चित तौर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान में की गई देरी और मिथ,लापरवाही तथा चीन की तानाशाही रवैये का परिणाम है जिसे सम्पूर्ण विश्व अपने देशों में कोरोना से बिगड़ते हालात व फैलते संक्रमण, मृत्यु से चुका  रहा है । इसके साथ साथ दोहरी मार यह कि लाकडाउन और उपजी परिस्थितियों ने पूरे विश्व को वैश्विक महामारी के बाद वैश्विक मंदी के कगार पर ला कर खड़ा कर दिया है ।

    2002 (SARS) के समय भी चीन ने बिल्कुल यही रवैया अपनाया था और (SARS) के विषय में भी दुनिया से यह बात छपाई थी । यह उस समय WHO प्रमुख #डॉक्टर_ग्रो_हार्लेम_ब्रंटलैंड की दूरदर्शिता और चीन दौरे के बाद इस वायरस के प्रकोप से दुनियाँ को आगाह किया था और तत्काल ही इसे वैश्विक महामारी घोसित कर दी थी । चीन में पशुओं के गलत खान-पान और शी फ़ूड मार्केट के अमानवीय कृत्य को देख कर यह चेतावनी दे दी थी कि दुनियाँ बहुत अधिक समय तक किसी नये वायरस की महामारी से मुक्त नहीं रह सकेगा।

    अब जैसा कि हम देख रहे कि निमोनिया जैसे लक्षणों को प्रदर्शित करने वाला वायरस दुनिया भर में तबाही का कारण बन चुका है ।

    चुकी कोरोना वायरस के संदर्भ में अधिक शोध अथवा अध्ययन अभी तक मौजूद नहीं है इसलिये इस वायरस के सन्दर्भ में कोई विशेष जानकारी नहीं है । कोरोना चुकि एक RNA वायरस है जो म्यूटेट भी कर सकता है, का टीका बनाना कठिन है तथा इसके इलाज के लिए कोई विशिस्ट उपचार पद्धति नही है ।

    इस वायरस की संरचना देखें तो इसके चारों ओर लिपिड की झिल्ली है तथा वसा की एक पर्त के बीच RNA गुणसूत्र मौजूद है। सेनेटाइजर अथवा साबुन से हाथ साफ करने पर इसके वसा का बाहरी आवरण नष्ट हो जाता है और RNA गुणसूत्र भी टूट कर समाप्त हो जाता है ।

    यद्यपि इस वायरस की मृत्यु दर बहुत कम लगभग 3-4% है किंतु इसके संक्रमण फैलाने की गति क्षमता अन्य वायरस की अपेक्षा दस गुनी अधिक है ।

    हाल में ही WHO ने यह भी स्वीकार किया कि छीकने अथवा खाँसने से मुख से जो ड्रापलेट्स निकते है वह 2 मीटर तक आसानी से बहुच सकते हैं किंतु इन्ही ड्रापलेट्स में कुछ अति छोटे ड्रापलेट्स भी होते हैं जो कि हल्के होने के कारण हवा में काफी समय तक तैर सकते हैं अब चुकी कोरोना वायरस बेहद शूक्ष्म (लगभग .23 माइक्रॉन ) हैं ऐसी स्थिति में छोटे से छोटे ड्रापलेट्स में यह सैकड़ों की संख्या में हो सकते है और 1 घण्टे बाद भी उस जगह से गुजरने वाले व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं ।

    फिलहाल बेहतर चिकित्सा प्रणाली अथवा टीके की खोज तक हमें बेहद सावधानी और ऐतिहात बरतने की जरूरत है ।

    बाहर निकलते समय मास्क लगाना आप के लिये काफी मदतगार हो सकता है, हाथ को साबुन से से साफ करके ही हमें भोजन करना चाहिए और सम्भव हो तो गर्म खाना ही खाना चाहिए, आयुर्वेद की भारतीय पद्धति जैसे हल्दी, सेंधानमक को गुनगुने जल में मिला कर गरारा करना,चाय की जगह काढ़ा पीना, तुलसी दल, गिलोय, एलोविरा और संतुलित आहार के साथ अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढाने का कार्य करना चाहिये जिससे हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से इस वायरस के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित कर सके ।

    मृदुल चंद्र श्रीवास्तव
    मृदुल चंद्र श्रीवास्तव
    लेखक,डायरेक्टर-SVM अकेडमी (महसों-बस्ती) Contact : 7007923729

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