लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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-अनिल अनूप
हिन्दी फिल्मों में शीर्ष स्थान पाना बहुत ही मुश्किल होता है. आज के दौर में तो प्रतियोगिता है ही पहले भी सितारों में आगे जाने की होड़ लगी रहती थी. ऐसे में अभिनेत्रियों के लिए तो फिल्मों में खुद को सफल कराना और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों की लिस्ट में शामिल कराना और भी मुश्किल होता है. और जब बात दक्षिण की हिरोइनों के हिन्दी फिल्मों में आकर काम करने और जगह बनाने की हो तो वह तो और भी मुश्किल हो जाता है. दक्षिण सिनेमा से हिन्दी सिनेमा में सबसे पहले सफल होने वाली अभिनेत्रियों में वैजयंतीमाला का नाम सबसे ऊपर आता है. अपने अभिनय और कला के दम पर वैजयंतीमाला ने ऐसे मानक स्थापित किए जिस पर चलकर आज की नायिकाएं खुद को सफल बनाने की कोशिश करती हैं. एक क्लासिकल डांसर की छवि के साथ वैजयंतीमाला ने हिन्दी फिल्मों में नायिका के नृत्य को अहम बना दिया.
13 अगस्त, 1936 को जन्मी वैजयंतीमाला तमिल ब्राहमण परिवार से हैं. उनकी मां वसुंधरा देवी भी तमिल फिल्मों की एक प्रमुख नायिका रही हैं. वैजयंतीमाला का बचपन धार्मिक वातावरण में बीता. उनके पिता का नाम ए.डी.रमन था. पांच साल की उम्र में ही वैजयंतीमाला ने स्टेज शो किया. इस शो में उन्होंने पारंपरिक भारतीय नृत्य की प्रस्तुति दी थी. वैजयंतीमाला ने गुरु वझूवूर रमिआह पिल्लै से भरतनाट्यम सीखी. 13 साल की उम्र से ही उन्होंने स्टेज शो के द्वारा अपने भारतनाट्यम की कला को दिखाना शुरू कर दिया था.
वैजयंतीमाला का कॅरियर 1949 में साउथ की फिल्म वाझकई से अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत की. यह फिल्म एक हिट फिल्म साबित हुई. इस फिल्म का तमिल संस्करण भी एक हिट फिल्म साबित हुई थी जिसमें वैजयंतीमाला ने ही काम किया था.
1951 में वाझकई के हिन्दी संस्करण “बहार” के साथ वैजयंतीमाला ने हिन्दी फिल्मों में अपने कॅरियर की शुरुआत की. हिन्दी में भी यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई. वैजयंतीमाला पहली ऐसी दक्षिण की हिरोइन थीं जिन्हें अपने डायलॉग डब नहीं करने पड़े थे. उन्होंने हिन्दी में डायलॉग बोलने के लिए हिन्दी भी सीखी थी.
वैजयंतीमाला का डांस उनके अभिनय के साथ सोने पर सुहागा की तरह लगता था. वेस्टर्न के साथ क्लासिकल डांस को मिलाकर वैजयंतीमाला ने नृत्य की अनोखी कला इजाद की थी. 1954 में आई फिल्म “नागिन” उनकी पहली सफल फिल्म थी. इसके बाद 1955 में आई “देवदास” में उन्होंने चंद्रमुखी के किरदार को कालजयी बना दिया. इस फिल्म में वैजयंतीमाला के अभिनय को बहुत सराहना मिली और उन्हें पहला फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला. फिल्म “नया दौर” में दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा. “नया दौर” बॉलिवुड की सबसे सफल और बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है.
वैजयंतीमाला ने “संगम”,“साधना”,“सूरज”,“प्रिंस”,“मधुमती”,“गंगा जमुना”,“अमरपाली” जैसी हिट फिल्मों में भी अपने अभिनय का लौहा मनवाया. “मधुमती” और “गंगा जमुना” जैसी फिल्मों में लीक से हटकर निभाए गए उनके किरदारों को हर तरफ से सराहना मिली.
वैजयंतीमाला और दिलीप कुमार की जोड़ी को दर्शकों ने एक समय बहुत पसंद किया था. पर्दे और पर्दे के बाहर दोनों के रोमांस की कहानी दर्शकों की पसंद थी. वैजयंतीमाला ने दिलीप कुमार के साथ “मधुमती”, “नया दौर”, ‘पैगाम”,“लीडर” और “संघर्ष” जैसी हिट फिल्में कीं.
वैजयंतीमाला अभिनय के साथ भरत नाट्यम की भी एक अच्छी नृत्यांगना रही हैं. वैजयंतीमाला की उपल्ब्धियां
1956 में फिल्म “देवदास” के लिए पहली बार वैजयंतीमाला को सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार.
1958 में फिल्म “मधुमती” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड.
1961 में फिल्म “गंगा-जमुना” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड.
1964 में फिल्म “संगम” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड.
1996 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड.
फिल्मों में काम करने के बाद वैजयंतीमाला सक्रिय रुप से राजनीति में कार्यरत हैं. आज वैजयंतीमाला साउथ चेन्नई की सबसे ताकतवर राजनैतिक शख्सियतों में से एक हैं.
शादी की बजाय परिवार को तरजीह दिया इन अभिनेत्रियों ने
अक्सर लोग कहते हैं कि ग्लैमरस लाइफ छोड़ एक सादी जिंदगी जीना आसान नहीं है। वह भी फिल्म जैसी इंडस्ट्री में तो बिल्कुल नहीं, लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसी फेमस एक्ट्रेस से मिलवाएंगे। जिन्होंने बुलंदी छूते अपने करियर को शादी के लिए बीच में ही छोड़ दिया और परिवार को तरजीह दी। जिससे कई फेमस एक्ट्रेस ने बॉलीवुड से दूर रहकर एक साधारण जिंदगी भी जीनी पड़ी। मिलिए इन एक्ट्रेस से…
शर्मिला टैगोर:
शर्मिला टैगोर बॉलीवुड की टॉप क्लास की एक्ट्रेस में गिनी जाती रहीं। इन्होंने अमर प्रेम, आराधना जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया, लेकिन इन्होंने भी नवाब से शादी के बाद बॉलीवुड को अलविदा कह दिया।
नीतू सिंह:
नीतू सिंह को अपने जमाने की फेमस एक्ट्रेस में से एक हैं। इन्होंने दीवार, अदालत जैसी कई फिल्मों में शानदार अभिनय किया। नीतू ने ऋषि कपूर से शादी के बाद अपने परिवार को प्राथमिकता दी।
बबिता कपूर:
एक्ट्रेस बबिता भी इस सूची में शामिल हैं। इन्होंने भी दस लाख, फर्ज और औलाद जैसी बड़ी और हिट फिल्मों में काम किया। इन्होंने 1971 में रणधीर कपूर से शादी की। इसके बाद बच्चों और परिवार के लिए इन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
साधना:
बॉलीवुड एक्ट्रेस साधना भी काफी फेमस रहीं। लोगों ने इनके हेयरकट को साधना नाम देकर अपनाया। साधना ने हम दोनों, मेरे महबूब और वक्त जैसी फिल्मों में काम किया। 1966 में राम कृष्ण नय्यर से शादी रचाने के बाद बॉलीवुड से दूरी बना ली।
राजश्री:
ग्लैमरस दुनिया से दूर रहकर सादी जिंदगी जीने में एक्ट्रेस राजश्री का नाम भी शामिल है। फिल्म गीत गाया पत्थरों ने, जानवर और ब्रह्मचारी जैसी फिल्मों में इनके अभिनय के बल पर यह छा गई थीं, लेकिन बाद में ग्रेग चैपमैन से शादी के बाद करियर को अलविदा कह दिया।
माला सिन्हा:
फिल्म प्यासा, गुमराह, और आंखें जैसे फिल्मों में शानदार अभिनय करने वाली एक्ट्रेस माला सिन्हा भी काफी फेमस रहीं। चिदम्बर प्रसाद लोहानी से शादी करने बाद इन्होंने अपने परिवार को वरीयदा दी और बॉलीवुड छोड़ दिया।
मीनाक्षी शेषाद्रि:
मीनाक्षी शेषाद्रि का नाम भी इसमें शामिल है। जंग, घायल, और दामिनी जैसी फिल्मों में काम करने वाली मीनाक्षी ने भी शादी के बाद अपने परिवार के पीछे भागना शुरू कर दिया। इन्होंने बैंकर हरीश मैसूर से शादी की थी।
मुमताज:
आज भी एक्ट्रेस मुमताज के बड़ी संख्या में चाहने वाले मौजूद हैं। इन्होंने भी एक नहीं बल्कि कई हिट फिल्में दी, लेकिन जिस समय इनका करियर बुलंदियों पर था इन्होंने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। इन्होंने मयूर माधवानी से शादी की थी।
वैजयंती माला:
वैजयंती माला का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है। संगम और मधुमती जैसी फिल्मों में काम करने वाली वैजयंती माला ने भी शादी के बाद इस दुनिया से एक फासला बना लिया था।
किमी काटकर:
फिल्म टार्जन, वर्दी और पत्थर दिल जैसी फिल्मों में काम करने वाली एक्ट्रेस किमी काटकर भी इस सूची में शामिल हैं। इन्होंने फोटोग्राफर शांतनु शौरी से शादी करने के बाद बॉलीवुड को अलविदा कह दिया।

2 Responses to “दक्षिण सिनेमा से हिन्दी सिनेमा में सबसे पहले सफल होने वाली अभिनेत्री वैजयंतीमाला”

  1. रूप संतोषी

    बेहतरीन जानकारी जो लेखक ने इकट्ठी की है उसे हम तक पहुचाने के लिये प्रवक्ता को धन्यवाद!
    अनिल जी सफर जारी रहे मुकाम जल्दी ही आपको मिलेगाl

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    • अनिल अनूप

      धन्यवाद संतोषी
      मरी यायावरी यात्रा का अनवरत सिलसिला जारी है जो प्रवृत्तिवश मृत्यु पर्यन्त जारी रहेगा….
      सद्भाव बनाये रखें

      Reply

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