More
    Homeराजनीतिकहीं पंजाब न बन जाये महाराष्ट्र कांग्रेस की लड़ाई

    कहीं पंजाब न बन जाये महाराष्ट्र कांग्रेस की लड़ाई

    महाराष्ट्र कांग्रेस के आपस के झगड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं और डर यही है कि कही पंजाब की तरह यहां भी नेताओं के आपसी अहं का टकराव और लड़ाई इतनी नहीं बढ़ जाये कि राज्य में भी कांग्रेस पूरी तरह खत्म हो जाये. पहले ही कांग्रेस राज्य में चौथे नंबर की पार्टी बन गयी है औऱ उसके पास केवल 42 बयालीस ही विधानसभा के सदस्य बचे हैं . उनमें से भी कई बीजेपी जाने को बेकरार है बस सत्ता के कारण टिके हुये हैं.
    हमें मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र में बीजेपी ने एक सर्वे कराया है जिसमें बताया गया है कि अगर अभी चुनाव होतें हैं तो सबके कमजोर कड़ी कांग्रेस ही साबित होगी और कांग्रेस के विधायकों की संख्या 28 तक हो सकती है इसलिए बीजेपी ने अपनी रणनीती बना ली है पहली तो ये कि वो एक तरफ एनसीपी और शिवसेना के नेताओँ और मंत्रियों पर हमले करके उनको संभलने का मौका नहीं देगी दूसरी तरफ वो कांग्रेस के विधायकों को पहले तोड़ने और फिर उनको चुनाव में हराने की कोशिश करेगी . असल में बीजेपी को उम्मीद है कि वो कांग्रेस को सीधी टक्कर में हरा सकती है क्योंकि कांग्रेस के नेता आपस में ही उलझे हुये हैं. यही रणनीति वो बीएमसी के चुनाव में भी करने वाली है . बीएमसी में भी अभी कांग्रेस के 28 नगर सेवक ही जिनकी सीटों पर बीजेपी सीधे जीतकर अपनी संख्या इतनी बढ़ाना चाहती है कि बीएमसी पर उसका कब्जा हो जाये इसलिए उसने कांग्रेस के कृपाशंकर सिंह से लेकर राजहंस सिंह तक सभी उत्तर भारतीयों को तोड़ लिया है.
    महाराष्ट्र में असल में बीजेपी को लगता है कि अगर अभी चुनाव हुये तो शिवसेना कम से कम 55 और एनसीपी 53 सीट जीत सकती है जबकि कांग्रेस ही इकलौती पार्टी है जो सबसे कमजोर है .असल में कांग्रेस के पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा सदस्य विदर्भ से ही चुनकर आये थे और वहां पर उसकी सीधी टक्कर बीजेपी से ही है. इस बार मजेदार बात ये है कि बीजेपी के देवेन्द्र फणनवीस और कांग्रेस के नाना पटोले दोनों ही विदर्भ के है और दोनों पहले एक ही पार्टी में काम कर चुके है. नाना पटोले भी सिदधू की तरह ही कई पार्टियों में और आखिर में बीजेपी में थे और बाद में कांग्रेस में आकर पार्टी अध्यक्ष तक पहुंचे .उनकी स्टाइल भी सिद्धू की तरह है जहां वो खुद ही अपने गठबंधन की सरकार और कांग्रेस के ही मंत्रियों के कामकाज पर सवाल उठाते रहते हैं.नाना की तो विदर्भ से मंत्री विजय वडेटटीवार , नितिन राउत , सुनील केदार औऱ यशोमती ठाकुर किसी से नहीं बनती .
    असल मे नाना पाटोले को जब विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया तो उनका कद बढ़ गया था औऱ उनको मुख्यमंत्री या कांग्रेस के चेहरे के तौर पर माना जाने लगा लेकिन उसके बाद नाना ने पार्टी प्रेसीडे़ंट बनने के लिए सिद्धू की तरह ही इस्तीफा दे दिया . कुछ दिन बाद नाना को समझ में आया कि पार्टी अध्यक्ष के साथ साथ ठसक के लिए मंत्री पद भी चाहिये अब नाना कई महीनों से कोशिश कर रहे है लेकिन आलाकमान और महाराष्ट्र कांग्रेस के उनके ही साथी मंत्री नहीं बनने दे रहे है .उधर बीजेपी ने राज्यपाल के सहारे विधानसभा का अध्यक्ष पद भी एक साल से खाली रखा है. ऐसे में नाना की हताशा बढ़ती जा रही है . उन्होनें कांग्रेस के लगभग सारे बड़े नेताओँ से दुश्मनी मोल ले रखी है यही वजह है कि आलाकमान कुछ भी कहे महाराष्ट्र में कांग्रेस का कोई बड़ा आंदोलन खड़ा ही नहीं हो पा रहा है यहां तक कि डिजिटल मेंबरिशप भी बुरी तरह नाकाम रही और बहुत कम ही सदस्य बन पाये .
    अब राज्य के 20 से ज्यादा विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुये है . जहां वैसे तो उनको सोशल मीडिया ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है पर वो आलाकमान को चिठठी लिखकर नाना पटोले और बाकी मंत्रियो की शिकायत कर रहे है कि उनका काम नहीं हो रहा है .इस बीच एनसीपी ने अगले चुनाव की तैयारी कर रखी है . खुद शऱद पवार हर 15 दिन में इलाके के हिसा से बैठक करते है वहां के विधायक को बुलाकर कहा जा रहा है कि सरकार से तीन से चार काम करा लें ताकि अगले चुनाव का इँतजाम हो सके.
    इसी बीच महाराष्ट्र के प्रभारी एच के पाटिल लगातार आलाकमान से डांट खा रहे है .यहां तक कि उनको कर्नाटक वापस भेजने की तैयारी हो गयी है.असल में पाटिल की नाना पटोले से नहीं बन रही है और भी हरीश रावत की तरह ही चुनाव के लिए अपने राज्य कर्नाटक वापस जाना चाहते है. असल में कांग्रेस आलाकमान को महाराष्ट्र का राजनीतिक इतिहास समझ नहीं आ रहा है . महाराष्ट्र में कांग्रेस की राजनीति हमेशा से क्षत्रपों के सहारे ही चली है लेकिन विलासराव देशमुख के निधन के बाद से लगातार दिल्ली इस बात की कोशिश कर रही है कि इस राजनीती को खत्म कर दिया जाये . राहुल गांधी किसी ओबीसी को ही बढ़ाना चाहते है जबकि ये वोट बैंक विदर्भ के अलावा कही और पर कांग्रेस के साथ कभी नहीं रहा . इस पर शिवसेना और बीजेपी की पकड़ है . कांग्रेस को राजय में मराठा ,अल्पसंख्यक और दलित इन वोट बैंक पर ही कोशिश करनी चाहिये .तभी कांग्रेस महाराष्ट्र में बच पायेगी नहीं तो पंजाब की तरह ही कांग्रेस की हालत राज्य में हो जायेगी तब शायद इसका इलाज भी किसी के पास नहीं रहेगा.

    संदीप सोनवलकर
    संदीप सोनवलकर
    लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं.

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    12,262 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read