चुनाव का बाजार लगा हुआ है |

चुनाव का बाजार लगा हुआ है |
देखो ! ये कितना सजा हुआ है ||
चारो तरफ पोस्टर लगे हुये है |
बैनर और झंडे भी लगे हुये है ||

कोई नहीं यहाँ दुकान व सामान |
बिक रहा है यहाँ धर्म व इमान ||
वोट व वोटर की कीमत यहाँ लगती |
झूठे आश्वानो पर है ये यहाँ बिकती ||

नेता यहाँ खरीदार बने हुये है |
अपनी जेबों में नोट भरे हुये है ||
पिछले पांच सालो में जो कमाया |
उसको उन्होंने दाव पर लगाया ||

ये बाजार आज बहुत गरम है |
पर नेता यहाँ बहुत नरम है ||
हाथ जोड़ते ये यहाँ फिर रहे है |
अपने वोटरों को टटोल रहे है ||

पांच साल के बाद ये यहाँ आते |
वोटरों को अपना शीश झुकाते ||
जब चुनाव खत्म हो जाते |
फिर ये नजर नहीं है आते ||

वोट तुम, तुम उसको देना |
जो कैन्डीडेट हो चरित्रवान ||
जो करे देश का विकास |
और बढाये देश सम्मान ||

आर के रस्तोगी

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