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    Homeसाहित्‍यकविताभाई बहिन का रिश्ता

    भाई बहिन का रिश्ता


    भाई बहिन का ये रिश्ता,
    कैसा अजीब है ये रिश्ता।
    लड़ते झगड़ते है ये आपस मे,
    फिर भी टूटता ना ये रिश्ता।।

    लड़ झगड़ कर एक हो जाते,
    एक दूजे के बिन रह न पाते।
    जब हो जाते एक दूजे से नाराज,
    बिन मनाएं ये रह नहीं पाते।।

    भाई बहिन एक खून का रिश्ता,
    जो बनता है दो खूनो से रिश्ता।
    वैसे तो संसार में अनेकों रिश्ते,
    इससे बड़ा ना है कोई रिश्ता।।

    भाई बहिन का अटूट है बंधन,
    कभी नहीं टूटता है ये बंधन।
    भले ही उनकी शादी हो जाती,
    बना रहता है उनका ये बंधन।।

    भाई बहिन है आंख के दो तारे,
    मां बाप के है दोनों राजदुलारे।
    करते हैं मां बाप दोनों को प्यार,
    घर के वे है दोनों चमकते सितारे।

    बहिन जब सुसराल है चली जाती,
    भाई को बहिन बहुत याद है आती
    करता रहता बहिन से वह निहोरा,
    बहिन पीहर कभी कभी ही आती।

    रक्षा बंधन व भाई दौज पर
    बहिन भाई का इंतजार है करती।
    बनाती है वह अनेकों व्यजन
    माथे पर उसके वह तिलक लगाती

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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