कहर बरपा रहा है कोरोना वायरस

योगेश कुमार गोयल

            चीन में अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण से डेढ़ हजार से भी अधिक मौतें हो चुकी हैं और पचास हजार से ज्यादा लोगों में इसके संक्रमण के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण को अब आतंकवाद से भी गंभीर बताया गया है। दरअसल कोई नहीं जानता कि कोरोना संक्रमण से हो रही मौतों का यह अनवरत सिलसिला आखिर कहां तक जाएगा। चीन के बाद जिस प्रकार दूसरे देशों में भी कोरोना संक्रमण के मामले एक-एक कर सामने आ रहे हैं, उसे लेकर पूरी दुनिया में हड़कंप मचना स्वाभाविक ही है। चीन के बाद चंद दिनों के भीतर दो दर्जन से भी ज्यादा देशों में कोरोना संक्रमण के मामले मिल चुके हैं। भारत में भी केरल में कोरोना संक्रमण के तीन मामले सामने आ चुके हैं और चीन से आए कुछ अन्य लोगों में भी कोरोना जैसे ही लक्षण दिखाई दिए हैं, जिन्हें दिल्ली के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भारत के अलावा ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, थाईलैंड, जापान, मलेशिया, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, यूएई, रूस, इटली, इंग्लैंड, वियतनाम, फिनलैंड, कम्बोडिया, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, हांगकांग, मकाऊ, ताइवान, फिलीपींस इत्यादि देशों में भी कोरोना वायरस के मामले सामने आ चुके हैं। यही कारण है कि कोरोना संक्रमण को लेकर पूरी दुनिया में दहशत के माहौल को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस आपात स्थिति को खतरनाक बताते हुए इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जा चुका है।

            कोरोना का सर्वाधिक आतंक इस समय चीन के वुहान शहर में है, जहां करीब सात सौ भारतीय छात्र पढ़ते हैं। इन भारतीय छात्रों पर कोरोना के मंडराते खतरे के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा गत दिनों 647 भारतीय छात्रों को एयरलिफ्ट कराकर भारत लाया जा चुका है। इसी तर्ज पर अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों ने भी वुहान से अपने नागरिकों को निकाल लिया है या उन्हें निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। कोरोना वायरस के संबंध में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग का मानना है कि कोरोना वायरस का वर्ष 2003 में चीन में आतंक मचा चुके सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स) से जुड़ाव खतरनाक है। कुछ वर्षों पहले ‘सार्स’ (गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम) नामक खतरनाक बीमारी का संबंध भी चीन से ही था, जिसके चलते करीब आठ सौ लोगों की मौत हो गई थी। जब चीन में सार्स की शुरूआत हुई थी तो चीनी सरकार लगातार उसका खंडन करती रही थी, जिसका नतीजा यह हुआ था कि वह वायरस देखतेे ही देखते 34 देेशों में फैल गया था। 2003 में फैले सार्स के बारे में पाया गया था कि चमगादड़ों ने बिल्ली जैसे जीवों को सार्स से संक्रमित किया था और फिर इंसानों द्वारा उन बिल्लियों को खाए जाने पर वह इंसानों में फैल गया था और उसके बाद वह पूरी दुनिया में फैलता गया था। 2012 में खाड़ी देशों में मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (मर्स) वायरस भी खोजा गया था, जो ऊंट के जरिये इंसानी शरीर में पहुंच था।

            नए प्रकार के कोरोना वायरस के आतंक की शुरूआत एक करोड़ से भी अधिक आबादी वाले चीन के हुबेई की राजधानी वुहान से हुई थी, जहां कोरोना वायरस का पहला मामला पाया गया था। अध्ययन पत्रिका ‘मेडिकल वाइरोलॉजी’ में प्रकाशित चीन में पेकिंग यूनिवर्सिटी हेल्थ साइंस सेंटर के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित हुए मरीज थोक बाजार में वन्यजीवों के सम्पर्क में आए होंगे, जहां सीफूड, मुर्गियां, सांप, चमगादड़ और पालतू मवेशी बिकते हैं। इस अध्ययन में कोरोना वायरस से हाल ही में फैले निमोनिया की उत्पत्ति के बारे में जानकारी दी गई है। नया चीनी कोरोनो वायरस काफी हद तक सार्स की ही तरह है और इस वायरस को लेकर माना जा रहा है कि चीन में वुहान के सीफूड बाजार से ही इस खतरनाक वायरस के फैलने की शुरूआत हुई। चीन के शंघाई शहर में सीफूड का सबसे बड़ा बाजार है, जो वुहान शहर में ही है। उसी बाजार में कस्तूरी बिलाव, भेडि़ये के बच्चे, जीवित लोमड़ी, मगरमच्छ, सलामैंडर, सांप, चूहे, मोर, साही, ऊंट इत्यादि विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव खुलेआम बिकते हैं, जिनका मांस वहां के लोग खाते हैं और कस्तूरी बिलाव तथा कुुछ अन्य वन्य जीवों का संबंध चीन में पहले भी महामारियां फैलाने से रहा है।

            हालांकि चीन में कई जंगली जानवरों के व्यापार पर प्रतिबंध है लेकिन कहा जा रहा है कि वन्यजीव तस्करी की निगरानी में ढ़ील के कारण कोरोना वायरस से संक्रमित जंगली जानवर बाजार में बेचे गए, जिनका सेवन करने के बाद लोगों में यह वायरस प्रवेश कर गया और यह बीमारी इतने बड़े पैमाने पर फैल गई। चिंता की बात यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वयं यह स्वीकार कर रहा है कि विश्वभर में संक्रामक रोग अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं और 1970 के दशक से प्रतिवर्ष नए-नए रोगों के बारे में जानकारी मिल रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक छह प्रकार के कोरोना वायरस की ही जानकारी थी लेकिन वुहान में नए प्रकार के कोरोना वायरस का पता चलने के बाद अब इनकी संख्या बढ़कर सात हो गई है। दरअसल कोरोना वायरस वैसे तो कई किस्म के होते हैं लेकिन अभी तक कुल छह किस्म के इन वायरसों को ही इंसानों को संक्रमित करने के लिए जाना जाता रहा है। नए कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के विश्लेषण से इसके संबंध में खुलासा हुआ है कि यह दूसरे कोरोना वायरसों की तुलना में ‘सार्स’ के ज्यादा करीब है।

            कोरोना वास्तव में वायरसों का एक बड़ा समूह है, जो कुछ जंगली जानवरों में पाया जाना एक आम बात है। इसकी स्थिति मर्स तथा सार्स से काफी मिलती जुलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वायरस को 2019-एनसीओवी (नोवेल कोराना वायरस) नाम दिया है। संगठन के अनुसार कोरोना वायरस (सीओवी) एक जूनोटिक है, जिसका अर्थ है कि यह 2019-एनसीओवी के जरिये जानवरों से मनुष्यों में फैला है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीएस) के मुताबिक यह वायरस जानवरों से मनुष्यों तक पहुंच जाता है। कोरोना वायरस अब मनुष्य से मनुष्य में फैल रहा है। इस वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के सम्पर्क में आने से यह आसानी से फैल सकता है। एक अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है कि नया कोरोना वायरस औसतन एक मरीज से दस लोगों में फैल रहा है। यह इतना संक्रामक है कि खांसी, छींक अथवा हाथ मिलाना भी इसके जोखिम का कारण बन सकता है। किसी संक्रमित व्यक्ति के छूने और फिर अपने मुंह, नाक अथवा आंखों को छूने से भी इस वायरस का संक्रमण हो सकता है। इसके संक्रमण के बाद सामने आने वाले लक्षणों में बुखार, खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश, कभी-कभी सिरदर्द इत्यादि प्रमुख हैं। निमोनिया, फेफड़ों में सूजन, छींक आना, अस्थमा का बिगड़ना भी इसके लक्षण हैं। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें कोरोना संक्रमण के बाद भी कोई लक्षण नजर नहीं आए। ऐसे मामले काफी खतरनाक साबित हो रहे हैं। बुजुर्ग और बच्चे इसके आसान शिकार हैं तथा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए तो यह काफी घातक है। कोरोना वायरस के संक्रमण का अभी तक कोई इलाज नहीं है क्योंकि न तो अब तक इसकी कोई वैक्सीन बनी है और न ही 2019-एनसीओवी की। अमेरिका के नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ हैल्थ सहित कुछ और शोधकर्ताओं द्वारा फिलहाल कोरोना वायरस के वैक्सीन पर शोध किए जा रहे हैं। भारत में भी राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान पुणे तथा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की दस प्रयोगशालाओं में नए कोरोना वायरस पर शोध कार्य शुरू कर दिया गया है।

            कोरोना से बचने का एकमात्र तरीका इससे बचने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त उपाय अपनाया जाना ही है। किसी बीमार, जुकाम या निमोनिया से ग्रसित व्यक्ति के सीधे सम्पर्क में आने से बचें, मास्क पहनें, अपनी आंखों, नाक और मुंह को न छुएं तथा हाथों को बार-बार अच्छी तरह से साबुन से धोएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने अथवा उसे कम करने के लिए जो सावधानियां बरतने को कहा है और इस वायरस के संक्रमण के खतरे को कम करने के जो उपाय बताए हैं, उनके अनुसार अपने हाथ साबुन और पानी या अल्कोहल युक्त हैंड रब से साफ करें, खांसते या छींकते समय अपनी नाक और मुंह को टिश्यू या मुड़ी हुई कोहनी से ढ़कें। जिन व्यक्तियों को सर्दी या फ्लू जैसे लक्षण हों, उनके साथ करीबी सम्पर्क बनाने से बचें। जंगल और खेतों में रहने वाले जानवरों के साथ असुरक्षित सम्पर्क न बनाएं और मीट तथा अंडों को अच्छे से पकाकर ही खाएं।

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