More
    Homeपर्यावरणदुनिया को मिलेगी पहली 'कार्बन शून्य' राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली

    दुनिया को मिलेगी पहली ‘कार्बन शून्य’ राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली

    यूके की नेशनल हेल्थ सर्विसेज ( एनएचएस -NHS) ने 2040 तक अपने को पूरी तरह कार्बन उत्सर्जन शून्य बनाने का फैसला किया है।

    अपने इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए एनएचएस ने हर साल अपनाये जाने वाले ठोस कदम तय किये हैं । गौरतलब है कि ब्रिटेन के सबसे बड़े एक हेल्थ केयर प्रोवाइडर (स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता) के रूप में वह देश के लगभग 4%कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है ।

    उसकी यह घोषणा उस समय जब पूरी दुनिया ज़हरीली हवा में साँस लेने के दुष्प्रभावों को बखूबी परख चुकी है। डॉक्टर और मरीज़ दोनों ही ज़हरीली हवा में साँस लेने की वजह से होने वाले अस्थमा, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़े के कैंसर जैसी जान लेवा बीमारियों से हर रोज़ जूझते रहते हैं । कोविद संक्रमण के छाए संकट में वायु प्रदूषण की वजह से हालत बाद से बदतर हो जाते हैं और ऐसे में कमज़ोर हो चुके फेफड़े अक्सर काम करना बंद कर सकते हैं विशेष कर बच्चों और बूढों में ।

    इन हालत के बीच एनएचएस की नेट जीरो कार्बन इमिशन प्रतिबद्धता का सीधा मतलब है जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों से हजारों लोगों की हिफाज़त है। उसने 2032 तक अपने उत्सर्जन को 80% कम कर लेने की योजना बनायी है । साथ ही इस मकसद को पूरा करने के लिए वह 2022 शून्य उत्सर्जन वाली एम्बुलेंस फ्लीट का इस्तेमाल करेगी । अपनी रिपोर्ट में इस घोषणा के साथ एन एचएस ने कहा है कि वह पहले ही अंतर्राष्ट्रीय मानक 1990 बेसलाइन की तुलना में अपनी कार्बन पदचिह्न में 62% तक कटौती कर चुकी है ।

    इस घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया व्ययक्त करते हुए प्रोफेसर के. श्रीनाथ रेड्डी, पब्लिक हेल्थ फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष ने कहा कि –

    “जलवायु परिवर्तन इस सदी और मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जैसा जैसे दुनिया कोविड महामारी से लड़ रही है वैसे वैसे , हमें एक बार फिर याद आ रहा है कि हेल्थ सिस्टम ही इस दुनिया को ठीक करके फिर से हरा भरा बना सकता है । आज की एनएचएस (NHS)की घोषणा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में स्वास्थ्य क्षेत्र के ऐसे नेतृत्व का एक जीता जगता उदाहरण है। जो दुनिया भर के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों को ऐसे कदम उतने के लिए प्रेरित करता है भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र भी अपने ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए रिन्यूएबिल ऊर्जा को अपनाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। हेल्थ केयर प्रोवाइडरों (स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं) के पास संभावित स्वास्थ्य खतरों से लोगों की रक्षा करने का यह एक बेहतरीन मौक़ा है।”

    एनएचएस (NHS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सर साइमन स्टीवंस ने कहा: “2020 में कोविड -19 का वर्चस्व रहा है और यह हमारे सामने आने वाली सबसे अधिक स्वास्थ्य संबंधी आपातकालीन स्थिति है। लेकिन निस्संदेह जलवायु परिवर्तन राष्ट्र के स्वास्थ्य के लिए सबसे गहरा दीर्घकालिक खतरा है।”

    “एनएचएस (NHS) के लिए वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली समस्याओं – अस्थमा से लेकर दिल के दौरे और स्ट्रोक तक – का केवल इलाज करना पर्याप्त नहीं है, हमें उन्हें स्रोत से निपटने में अपनी भूमिका निभानी होगी।”

    डॉ। टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक ने कहा: “दुनिया के हर हिस्से में स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कार्बन उत्सर्जन में कटौती आवश्यक है। मैं दुनिया में सबसे बड़ी एकल स्वास्थ्य प्रणाली, इंग्लैंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के नेतृत्व में, 2040 तक अपने स्वयं के संचालन में कार्बन तटस्थ होने के लिए और अपने आपूर्तिकर्ताओं और भागीदारों में उत्सर्जन में कमी लाने के लिए स्वागत करता हूं। स्वास्थ्य एक ग्रीन, सुरक्षित ग्रह की ओर हमें ले जा रहा है।”

    टी.एस. सिंह देओ, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़ सरकार ने एक राज्य स्तरीय स्वास्थ्य नेतृत्व पर वर्चुअल राउंड टेबल सम्मेलन में कहा:

    छत्तीसगढ़ उन राज्यों में से है, जहां खानों और खनिज आधारित उद्योगों की संख्या बहुत अधिक है। आज और आने वाला समय में प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हम बड़ी संख्या में हृदय रोगों, सांस की बीमारियों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ओबेसिटी (मोटापा) और अन्य बीमारियां देख रहे हैं और जो औद्योगिक क्षेत्रों के करीब हैं उन लोगों की चौंकाने वाली रिपोर्टें हैं। खनन और वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों से जनसंख्या का बहुत अधिक हिस्सा प्रभावित है। हम शुरुआती चरणों में हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय विचार राज्य के स्तर पर पहुंच रहे हैं और हम इन मुद्दों पर अधिक गंभीरता से ध्यान केंद्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में संसाधन की कमी है लेकिन हम सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं, हम एसडीजी लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं, और यदि संभव हो तो 2030 से जल्द उन तक पहुंचने की उम्मीद कर रहें हैं।

    बदलता मौसम और जलवायु प्रवृत्ति अति अधिक निरंतर हीटवेव और अत्यधिक मौसम की घटनाओं, जैसे बाढ़, ब्रिटेन में संक्रामक रोगों के संभावित प्रसार सहित, के लिए अग्रणी है। पिछली गर्मियों की हीटवेव से लगभग 900 लोग मारे गए थे, और लगभग 18 मिलियन रोगी ऐसे क्षेत्र में जीपी प्रैक्टिस में जाते हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण सीमा से अधिक है।वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्सर्जन में कटौती से शायद नए अस्थमा के मामलों में एक तिहाई कम किये जा सकता है, जबकि तापमान बढ़ने के साथ लाइम रोग और एन्सेफलाइटिस अधिक सामान्य होने की अपेक्षा हैं।

    अस्थमा यूके और ब्रिटिश लंग फाउंडेशन पार्टनरशिप के सीईओ केय बॉयकॉट ने कहा: “यह ऐतिहासिक रिपोर्ट एनएचएस (NHS) से वास्तविक प्रगति और इसकी कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करती है। जलवायु परिवर्तन फेफड़े के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है; गर्म और ठंडे मौसम में प्रदूषण और चरम सीमा के खतरनाक स्तर फेफड़ों की स्थिति वाले लोगों के लिए घातक हो सकता है, जिससे लक्षण भड़क सकते हैं और जान जोखिम में पड़ सकती हैं।”

    “फेफड़े के स्वास्थ्य में सुधार और हमारे द्वारा साँस लेने वाली हवा की सफाई कभी भी इतनी अधिक महत्वपूर्ण नहीं रही है, इसलिए इस रिपोर्ट पर सलाह देने वाले विशेषज्ञ पैनल का हिस्सा बनना और यह सुनिश्चित करना एक वास्तविक विशेषाधिकार रहा है कि रोगी की आवाज इस प्रक्रिया के केंद्र में है। हम एनएचएस (NHS) के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हैं, ताकि उनकी देखभाल में मदद मिल सके, जिसमें सुरक्षित रूप से कम कार्बन इनहेलर्स पर स्विच करना, आभासी देखभाल के लाभ को बढ़ाना और अस्पतालों से वापस परिवहन लिंक की समीक्षा और स्केलिंग करना शामिल है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि फेफड़ों की स्थिति वाले लोगों की देखभाल से समझौता किए बिना इन लक्ष्यों को पूरा किया जाए और इन चुनौतियों का सामना करने के लिए आगे एनएचएस (NHS) के साथ सहयोग करने के लिए तत्पर रहें।”

    अंततः सवाल उठता है क्या भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के लिए ऐसा कुछ करना संभव है?

    निशान्त
    निशान्त
    लखनऊ से हूँ। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को हिंदी मीडिया में प्राथमिकता दिलाने की कोशिश करता हूँ।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    11,662 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read