लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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manabआज

हरेक के जेब में मानव

हरेक के पेट में मानव

पेट से निकला है मानव

पेट से परेशान  है मानव

अन्तरिक्ष में क्रीड़ा कर रहा है मानव

सड़क पर लेटा है मानव

जोड़ – घटाव में व्यस्त है मानव

वैरागी बन रहा है मानव

मशीन बन रहा है मानव

समुद्र की लहरें गिन रहा है मानव

महामानव बनाने में जुटा है मानव

न्यूट्रान बम बना रहा है मानव

विश्व शांति की बात कर रहा है मानव

अपने ही घर में रोज  लड़ रहा है मानव

अच्छी-अच्छी बातें कर रहा है मानव

बुरे-बुरे काम कर रहा है मानव

सचमुच,

मानव के अस्तित्व के लिए आज

परेशानी का सबब बन रहा है मानव  !

One Response to “आज का मानव”

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