लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

Posted On by &filed under कविता, साहित्‍य.


aloneदुनिया तो है एक मेला

पर, देखिये

इस मेले में आदमी

कितना है अकेला .

घिरा है भीड़ से

पर,

कैसे खोजें अपनों को

अजनबियों के बीच से .

भीड़ समस्याओं की भी

लगी है चारों ओर .

हर तरफ है

शोर ही शोर .

समस्याओं के एक चक्रव्यूह से

निकलते ही ,

दूसरे में फंस जाता है.

क्या करे, न करे

समझ नहीं पाता है .

मेले में है,

झमेले में है,

अपनों से बिछुड़े हुए

एक अबोध बालक की तरह .

चौराहे पर खड़ा,

किंकर्तव्यविमूढ़ !

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *