लवरात्रि से लवयात्री के बीच विवादों की यात्रा

विवेक पाठक
सलमान खान ने अपने जीजाजी के करियर का सिनेमाई आगाज करने साल भर पहले से फिल्म बना रहे हैं लवयात्रि। यह लवयात्रि पर्दे पर पहुंचने से पहले ही विवादों की यात्रा कर आई है। विवादों की इस यात्रा में बहुत हद तक निर्माता और सिनेमाई दबंग एक्टर सलमान खान सफल भी हुए हैं। आज हम तमाम रचनाधर्मी फिल्मकारों और अदाकारों से अलग अगर लवयात्रि जैसी रंगरुट फिल्म और उसके अनजाने एक्टर आयुष शर्मा की बात कर रहे हैं तो यह विवादों से उपजी पहचान ही है।
जी हां नवरात्रि में लवरात्रि नाम से भले ही अब लोग फिल्म न देखेंगे मगर सलमान का व्यावसायिक दिमाग फिल्म को कैसे न कैसे चर्चा में ले ही आया है। अब लवरात्रि को लवयात्री नाम रखकर वे होशियार निर्देशक के रुप में लोगों का गुस्सा कम करते हुए फिल्म देखने लाने की अंतिम कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल अब जिस फिल्म का साल भर में दुबारा नामकरण सलमान खान ने लवयात्री नाम से किया है वो नवरात्रि के उल्लास के भरोसे बनाई गई लवरात्रि फिल्म है। सलमान खान लवरात्रि के नाम पर विवाद रचकर फिल्म को हक से ज्यादा मीडिया में चर्चा दिला ले गए हैं। इस फिल्म में हीरो वे आयुष शर्मा हैं जो दबंग सलमान की बहन अर्पिता के पति हैं सो सबको सिनेमा में उतारने वाले सलमान ने साल भर पहले लवरात्रि से उनकी रीलांचिंग की है लवरात्रि के नाम से। इस फिल्म का नाम लवरात्रि ऐसे ही नहीं रखा गया था। सलमान चाहते तो लवरात्रि को लवयात्री नाम पहले दिन से दे सकते थे मगर गरबा पंडाल और नवरात्रि में लवलीला दिखाने पर विवाद कहां पैदा होता। विवाद के बिना अनजानी फिल्म का भला कौन सिनेप्रेमी नाम लेता। तो किस्सा कुछ ऐसे शुरु हुआ। तसल्ली से जानिए।
 अपने नाम की घोषणा मात्र से देश के तमाम हिन्दू संगठनों के विरोध का सामना कर चुकी इस फिल्म के हीरो आयुष शर्मा एकदम अनजाना चेहरा हैं। वे फिल्म के रिलीज होने की तारीख आने तक सिर्फ इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि वे सलमान के जीजाजी हैं। नाम और काम दोनों में नए हीरो के साथ काम करना करियर के साथ खतरनाक खेल होता है। यही कारण रहा कि बॉलीबुड की स्थापित हीरोइन लवरात्रि में आयुष के अपोजिट आने से रहीं तो फिल्म चले कैसे फिर। सहिष्णु हिन्दुस्तान में हर मुश्किल का हल ढूंढ़ा जाता  रहा है और नए नवेले हीरो की फिल्म को चर्चा में लाने का सस्ता रास्ता अपनाया गया।
 जीहां फिल्म पर विवाद खड़ा करके उसे कैसे न कैसे दिखाने का आइडिया लंबे समय से मुंबई सिनेमा में अपनाया जा रहा है। लवरात्रि फिल्म उसी रास्ते का पत्थर है। भारतीय समाज खासकर हिन्दुओं के लिए नवरात्रि पावन मंगलमय त्यौहार है ऐसे में इस त्यौहार के नाम पर आधी कटिया डालकर फिल्म का नाम लवरात्रि रखा गया।
सहज सवाल है कि फिल्म अगर प्रेम पर केन्द्रित थी तो उसे लव और प्रेम के कई आयामों से जोड़कर रखा जा सकता था। प्यार लव और धोखा से लेकर लव का लॉकेट डालकर कई फिल्मों का नामाकरण हुआ है मगर लवरात्रि नवरात्रि के नाम पर जुबान पर चढ़ने वाले सिनेमाई कोशिश रही।
ऐसा नहीं है कि फिल्म का नाम लवरात्रि अकेला रखकर ही सलमान खान हिन्दु त्यौहार पर सिनेमाई प्रयोग पूरा कर निकल लिए थे। फिल्म में नवरात्र के गरबा पंडाल में आई लव यू और यू लव मी के लिए जगह बनाई गई है। सलमान ऐसा करने के अपने सुनियोजित फिल्मी व्यापार में सफल भी हुए हैं।
अगर इस फिल्म का नाम नवरात्रि और गरबा पंडाल में प्रेमालाप का प्रचार प्रसार करना न होता तो क्या आज हम इस पर चर्चा कर रहे होते। क्या सलमान के प्रिय जीजाजी का नाम भी अच्छे से सिनेमा प्रेमियों को अभी याद है सिवाए इस फिल्म से रोजगार पाने वालों व  सीडी बेचने वालों के।
 हकीकत है कि फिल्मों की सीडियां और टॉकीज का पर्दा प्रतिभा नहीं जानता। वो अदाकारी क्या होती है कतई नहीं जानता।
 उस पर वितरक से आई हर दोयम दर्जे और सुपरहिट फिल्म का प्रदर्शन एक जैसा होता है।
अंतर सिर्फ नीचे कुर्सियां पर होता है। कहीं भरपूर दर्शक होते हैं तो कहीं कुर्सियां पर बैठने से लेकर पैर फैलाने और यहां वहां हाथ फटकारने की पूरी स्वतंत्रता होती है। आसपास और आगे पीछे की खाली कुर्सियां तमाम फलॉप फिल्मों के दौरान कई दर्शकों को शारीरिक फैलाव का अघोषित अवसर दे जाती हैं।
सलमान खान और उनके जैसे जमे हुए कई अभिनेता और निर्देशक मुंबई सिनेमा में पैसा कमाने का गणित बखूबी जानते हैं। बिना अदाकारी और सशक्त अदाकारी की फिल्म विवादों में लाकर कुछ लाख दर्शक तक पहुंचायी जा सकती है। राजकुमार हीरानी, आमिर खान सहित तमाम फिल्मी कारोबारी दिमाग के धनी ऐसा करके पैसा कूटने में सालों से कामयाब हैं। उनकी कहानियां इतनी लंबी हैं कि अलग अलग बात किए बिना काम नहीं चलेगा। सबका लक्ष्य मजाक मजाक और हल्के फुल्के माहौल में हिन्दुत्व की जड़ों पर प्रहार ही है। पीके में असहाय भागते हुए महादेव, भगवावेश में ढोंगी संत दरअसल धर्म विवाद खड़ा करने वालों के लिए प्रिय विषय है। दुनिया का इकलौता बहुसंख्यक हिन्दू समाज अपने धर्म, संस्कृति और आचार विचार मान्यताओं को सदियों के अतिक्रमण सहता हुआ आज यहां तक आया है। जिस आक्रांता से जो बना हिन्दू और हिन्दुत्व के विचार पर किसी न किसी तरह से दिखने वाले और न दिखने वाले कई तरह के हमले किए।
लवरात्रि फिल्म का नामाकरण भी एक हमला ही है।
 हिन्दू नौ दिनों तक मां की भक्ति जिन रात्रियों में जगराते करते हुए करते हैं वो नवरात्रि हैं। इनमें शक्ति, साधना और आत्मशुद्धि से लेकर मन विचार और देह संयम शामिल है। इन दिनों उपवास और व्रत पूरी मान्यता के साथ रखे जाते हैं नौ दिन तक मन विचार और व्यवहार का संयम रखकर मां के दरबार में नवरात्रि का उल्लास मनाया जाता है। साल के 365 दिनों में नवरात्रि के 18 दिन रात उन शेष काली रात्रियों से ज्यादा प्रकाशवान और उल्लास वाले होते हैं। दिन और रात शक्ति का नव संदेश देने वाली मां शक्ति रुप को समर्पित होते हैं। वे अंधकार को मिटाकर उल्लास जगाने वाली रात्रियां हैं तभी नवरात्रि हैं मगर सलमान खान की फिल्म उन पावन नवरात्रि की गरिमा पर अतिक्रमण हैं। अगर धार्मिक तीज त्यौहारों पर ही प्रेम की लीला सलमान के लिए फिल्म का मनपसंद विषय था तो उन्होंने ईद का दिन और ईद की रात्रि विषय पर भी विचार किया होता। ईद मुबारक के बीच मोहब्बत मुबारक के तमाम दृश्य दीदार हो जाते। सिवाइयों की महक में प्रेम के पींगे पनपने दिखाए जा सकते थे। क्रिसमस की पार्टी भी दिन में कहां होती है। क्रिसमस नाइट पर तमाम जोड़े ईशु को प्रेम करते करते कब युवा दिनों के प्रेम के पथ पर बढ़ जाते फिल्म में खूब देखा जाता। ईद और क्रिसमस के उल्लास में एक दूसरे को मुबारकबाद और चीयर करते करते प्रेम की कहानी खूब बुनी जा सकती थी मगर ऐसा सलमान खान और सलमान नहीं करते। वे ईद पर प्रेमी जोड़ों की प्रेमलीला पर्दे पर नहीं दिखा सकते। युवाओं का प्रेम ईद के गले मिलन में पाबंदशुदा है मगर नवरात्रि उन्हें प्रेम और प्रेमालाप का उत्सव नजर आता है। वे गरबा पंडाल को लवलीला का खुला ठिकाना बताना चाहते हैं। वे मां की नवरात्रि को प्रेम में पगी लवरात्रि दिखाना चाहते हैं और इसी विवाद पर अपने जीरो नायक को हीरो बनाना चाहते हैं मगर लवरात्रि सिर्फ विवाद खड़ा कर सकती है करियर नहीं।
सलमान ने लवरात्रि के नाम पर असफल कोशिश की है देखते नई लवरात्रि से लवयात्रि तक प्रायोजित विवाद पर्दे पर क्या गुल खिलाता है।

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