काव्य प्रेमियों के लिए बेशकीमती उपहार है मार्गेश राय(मार्गदर्शन) की खुशबू बिखेरती पगडंडियाँ

मोबाइल और टीवी के बढ़ते चलन की वजह से कहानी और कविता पढ़ने के प्रति लोगों का रुझान ख़त्म हो गया था। पिछले वर्ष कोरोना लॉकडाउन के बाद एक बार फिर से पढ़ने वालों की तादाद बढ़ी है। अपने ख़्यालात, अपने जज़्बात को पेश करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम होती हैं कविताएं।
कविताओं के माध्यम से कवि पाठकों को जीवन के विभिन्न रंगों से रुबरु करवाता है। कुछ कविताएं विपरित परिस्थितियों में प्रोत्साहित करने का अनमोल कार्य करती हैं तो कुछ कविताएं पाठकों को प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूब जाने को मजबूर करती हैं।

अपनी पहली अंग्रेज़ी काव्य संग्रह “पोयट्री – अ गारलैंड ऑफ वर्ड्स” की अपार सफलता के बाद, मार्गेश राय(मार्गदर्शन) की नई प्रस्तुति है “खुशबू बिखेरती पगडंडियाँ”। 120 कविताओं को इस संग्रह में सहेजते हुए मार्गेश राय(मार्गदर्शन) ने लोगों को प्रेरणा से भरपूर मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है। जितनी सहजता के साथ इस युवा कवि ने अपनी भावनाओं को काव्य के माध्यम से प्रकट किया है उससे एक बात स्पष्ट होती है कि मार्गदर्शन जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं और जीवन के हर पहलू पर इनकी तगड़ी पकड़ है। वैसे तो सारी कविताएं मुझे बेहतरीन लगी, पर 8-10 कविताएं ऐसी है जो मेरे जेहन में बस चुकी है।
आइए नज़र डालते हैं खुशबू बिखेरती पगडंडियाँ पुस्तक की कुछ सदाबहार कविताओं की चुनिंदा पंक्तियों पर-

1- कलम की ताकत
एक बार फिर मैं प्रेम रंग में डूबकर लिखूँगा
तेरी नशीली आंखों के जाम पीकर लिखूँगा
एक बार फिर बिन मौसम बरसात होगी
मैं उस बारिश में भीगकर लिखूँगा……

2- लक्ष्य
कर्मवीर है तू, बस अपना काम किए जा
सफलता असफलता की ना सोच, संघर्ष के पथ पर चले जा
चट्टानों से तेरा सामना होगा, तूफान भी तेरा रास्ता रोकेंगे
पर तू बेपरवाह बढ़े जा…….

3- सुबह का मंज़र
सुबह का ये मंज़र तो देखो
प्रकृति का मनोरम नज़ारा तो देखो
सूरज के किरणों की लालिमा तो देखो
काली कोयलिया की मधुर आवाज़ को सुनकर
मीठी निंद्रा को त्यागकर संसार को देखो…….

4- मेरी कलम
जब जब मैं बेज़ार पड़ जाता हूँ मेरी कलम बोलती है,
जो राज़ मेरे दिल में दफन हैं, वो मेरी कलम खोलती है
जब तन्हा होता हूँ तो मैं उठाता हूँ अपनी कलम,
बेहद गहरे मौन को काग़ज़ के पन्नों पर तौलती है…….

5- वैरागी हो जाऊँ
मैं मस्तमौला सा अपनी ही धुन में झूमता रहूँ
मैं वैरागी हो जाऊँ
मैं अपने मन पर अंकुश लगा पाऊँ
मैं वैरागी हो जाऊँ……..

6- नेता
आया रे आया देखो शहर में नेता आया है
जुमलों का पिटारा अपने संग लेकर आया है
बड़े बड़े ख़्वाब दिखाने, जनता को बेवकूफ़ बनाने
नेता के रूप में एक बहुरूपिया आया है
स्कीम्स की भरमार लेकर आया है वो
पर वास्तव में वो स्कैम करने आया है…….

कोरोनाकाल के दौरान लोग हताशा,निराशा और भय से घिरे हुए हैं। काव्य जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले कवि मार्गेश राय(मार्गदर्शन) की “खुशबू बिखेरती पगडंडियाँ” ऐसे वक्त में किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। कविता और जीवन की लय में काफी समानताएं हैं। युवा कवि ने इसी लय को बरकरार रखने की कोशिश की है और वो इसमें क़ामयाब भी हुए हैं। अगर आप हिन्दी कविताएं पढ़ने के शौकीन है, तो आप ये काव्य संग्रह पढ़ सकते हैं।

पुस्तक- खुशबू बिखेरती पगडंडियाँ
लेखक- मार्गेश राय(मार्गदर्शन)
प्रकाशक- इविंसपब पब्लिशिंग
मूल्य- 249 Rs.

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