लेखक परिचय

दानसिंह देवांगन

दानसिंह देवांगन

बीएससी गणित, एमएम भाषा विज्ञान में गोल्ड मेडेलिस्ट और बीजेएमसी तक आपकी शिक्षा हुई है। विगत दस सालों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। जनसत्ता, दैनिक भास्कर, देशबंधु, नवभारत और जनमत टीवी से काफी समय तक जुड़े रहे। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर बेबाकी से राय देने के लिए जाने जाते हैं। संप्रति आप दैनिक स्वदेश, रायपुर के संपादक हैं।

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-दानसिंह देवांगन

आजादी की मांग को लेकर एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में आग लगी हुई है। कुछ भाड़े के कट्टरपंथी पाकिस्तान के इशारे पर सड़क पर उतरकर भारत की संप्रभुता को तार-तार करने में तुल गए हैं। उनमें से कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें हम और आप बड़ी इज्‍जत भरी निगाहों से देखते और सुनते रहे हैं। अब ये लोग भी जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं मानते और आजादी की मांग करने लगे हैं।

नई दिल्ली में पिछले दिनों कमेटी फार रिलीज आफ पालिटिकल प्रिजनर नामक संगठन के बैनर तले अरूंधती राय, गिलानी, प्रो अब्दुर्रहमान, नजीब बुखारी, शेख शौकत हुसैन जैसे लोगों ने जो विचार रखे। उस पर मैंने काफी विचार-मंथन किया। आखिर इतने बड़े लोग आजादी की बात कर रहे हैं तो कुछ तो बात होगी। हो सकता है वे सही हो, ये भी हो सकता है कि वे कश्मीरवासियों को मौत के मुंह में धकेल रहे हों। मंथन में कुछ सवाल बाहर निकले, जिनका जवाब मैं इन महानुभावों से पूछना चाहता हूं। पहला ये कि आखिर वे कैसी आजादी चाहते हैं? क्या वे भारत से आजाद होकर पाकिस्तान में मिलना चाहते हैं। यदि ऐसा है तो क्या उन्हें पाकिस्तान में उतनी आजादी मिलेगी, जो अब उन्हें मिल रही है। क्या वे पाकिस्तान में मिलकर अमन और खुशहाली का जीवन जी पाएंगे। यदि ऐसा है तो पाक अधिकृत कश्मीर में 50 साल बाद भी शांति और खुशहाली क्यों नहीं लौट पाई। क्या इसका जवाब हैं आपके पास।

मेरा दूसरा सवाल है, क्या आप भारत से अलग होकर स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर जम्मू कश्मीर की आजादी चाहते हैं। यदि ऐसा है तो मुझे बताइए कि एक तरफ पाकिस्तान है जो विगत 60 सालों से जम्मू-कश्मीर पर कब्जा जमाने का सपना पाल रहा है, क्या आपको चैन से बैठने देगा? क्या गारंटी है कि स्वतंत्र राष्ट्र होने के बाद पाकिस्तान आपके खिलाफ साजिश नहीं करेगा? अभी तो भारत जैसा शक्तिशाली राष्ट्र है, जिसकी वजह से पाकिस्तान की हिम्मत नहीं होती, सीधी टक्कर लेने की। आजादी मिलने के बाद आपको कब मसल कर रख देगा, आपको पता भी नहीं चलेगा। दूसरी ओर चीन भी भारत से टक्कर लेने के लिए आप पर हुकूमत नहीं करना चाहेगा, इसकी क्या गारंटी है? क्या चीन धरती के स्वर्ग पर कब्जा करना नहीं चाहेगा? क्या आजाद कश्मीर के पास इतना सामर्थ्य होगा, जो अकेले अपने दम पर पाकिस्तान या चीन से मुकाबला कर सके।

जिस पाकिस्तान के दम पर गिलानी और अरूंधती राय जैसे लोग जम्मू-कश्मीर की आजादी की मांग कह रहे हैं, पहले उन्हें एक माह तक एक आदमी की तरह पाकिस्तान में रहकर देखना चाहिए। उन्हें समझ में आ जाएगा कि जम्मू-कश्मीर की भलाई भारत के साथ रहने में है या स्वतंत्र रहने में। एक तरफ तेजी से विश्व की ताकत बनता भारत है, जहां कुल आबादी के 70 फीसदी लोगों को दो व तीन रूपए किलो चावल देने की तैयारी हो रही है। उधर, पाकिस्तान सदी के सबसे विकराल बाढ़ से पीड़ित लोगों को दो वक्त की रोटी मुहैया नहीं करा पा रहा है। एक तरफ भारत के दर्जनभर उद्योगपति विश्व की कई बड़ी कंपनियों को खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, उधर उद्योग तो दूर वहां के कालेज और अस्पताल भी बिकने के कगार पर हैं। भारत का आईटी प्रोफेशनल्स से अब अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भी खौफ खाने लगे हैं। यही वजह है कि आउटसोर्सिंग पर अमेरिका में राजनीति गरम है। उधर, पाकिस्तान आज भी 18 वीं सदी में जी रहा है। यही नहीं, भारत में आज इतना अनाज पैदा होता है कि लाखों टन अनाज गोदाम के अभाव में यूं ही खुले आसमान के नीचे रखे होते हैं। उधर, पाकिस्तान में जब तक अमेरिका भीख में डालर नहीं देता, गोदाम में अनाज तो क्या लोगों के घर चूल्हा नहीं जलता।

ये तो कुछ उदाहरण हैं, जो ये समझने के लिए काफी है कि जम्मू-कश्मीर का सुनहरा भविष्य कहां है। अब वहां की जनता को तय करना है कि उन्हें भारत के साथ रहकर शांति और विकास की राह पर चलना है या पाकिस्तान के साथ आतंकवाद और बर्बादी की राह पर। वैसे भी आज जो कश्मीर की हालत है, उसके लिए भी यही कट्टरपंथी जिम्मेदार हैं। यदि ये लोग जितनी ताकत जम्मू-कश्मीर को आजाद कराने में लगाते हैं,उससे 50 फीसदी ताकत भी यदि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास में लगाते तो शायद जम्मू-कश्मीर की वादियों में आग नहीं, बल्कि आज सोने का धन बरस रहा होता। अंत में मैं जम्मू-कश्मीर की जनता से करबध्द प्रार्थना करना चाहता हूं कि आप भी हमारे अपने भाई-बहन हैं, किसी के बहकावे में न आएं और अरूंधती राय व गिलानी जैसे

लोगों को मुंहतोड़ जवाब दें ताकि फिर कोई देशद्रोही इस तरह खुलेआम भारत की संप्रभुता पर हमला करने की सोच भी न सके।

5 Responses to “कैसी आजादी, कौन सी आजादी चाहते हैं आप”

  1. तरुणराज गोस्वामी

    आपने बिल्कुल सही कहा कि आखिर कश्मीर के लोग ( या कट्टरपंथी ) कैसी आज़ादी और किससे आज़ादी चाहते हैँ , एक ओर पाकिस्तान जैसा विफल राष्ट्र और इंसानियत को गोलियोँ से भुनने या भुनाने वाले उसके झण्डाबदर है तो दूसरी ओर भारत है जो लाख कठिनाईयोँ और विषम परिस्थितियोँ के बावजूद एक होकर दुनिया का शक्तिशाली राष्ट्र बनने की ओर अपने कदम द्रढ़ता से बढ़ा रहा है । इसे राजनीति का घिनौनापन नहीँ तो और क्या कहेँगे कि एक क्षेत्र के लोग चौसठ सालोँ मेँ राष्ट्र के रुप मेँ भारत के लोगोँ और उसके संविधान से एकाकार नहीँ हो पाये ? कश्मीर के मामले मेँ मानवाधिकार की दुहाई देने वालोँ से क्या नहीँ पूछा जाना चाहिये कि विश्व के किस देश के मानवोँ को देश मेँ रहकर देश का राष्ट्रध्वज जलाने का अधिकार है ?
    यह सरकार की कौनसी नीति है कि लाखो लोगोँ को उनके घरोँ से उजाड़कर भगा दिया जाता है और उनके दुखोँ को उठाने वालोँ को साम्प्रदायिक ठहरा दिया जाता है जबकि भारत विरोधी नारे लगाने वालो को बात करने के लिये मनाने के वास्ते सरकार कमर झुकाये खड़ी रहती है ।यह भारत की सरकारोँ की विफलता ही तो है कि धारा 370 के रुप मेँ विशेष अधिकार और करोड़ो के पैकेजोँ के बावजूद सपौले भारत की एकता को डसने की कोशिशे करते रहते हैँ । सरकार अगर वाकई कश्मीर मामले का हल चाहती है तो उसे मामले को लटकाये रखने के बजाय द्रढ़ता से विभाजनकारी नीतियोँ का फन उठाने वाले साँपोँ को कुचलना चाहिये । सरकार को बातचीत के लिये गिड़गिड़ाने के बजाय भारत विरोधियोँ को देश निकाला दे देना चाहिये । नहीँ तो आगे भी कश्मीर के कारण देश की सामरिक , आर्थिक और राजनीतिक ऊर्जा का ह्रास होता रहेगा और विश्व मेँ भारत की छवि दबावोँ मेँ झुकने वाले राष्ट्र के रुप मेँ बनेगी ।

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  2. ateet Gupta

    बहुत अच्छा लेख
    हमारे देश में क्या है यह बताने की जरुरत आज नहीं है,बस नहीं है तो अछि लीडरशिप नहीं है,
    आज हमारे देश में दुनिया के सबसे ज्यादा युवा है लेकिन राजनीती में न के बराबर है,
    इसलिए युवाशक्ति को आगे आना होगा तभी देश का विकाश होगा और वोट बैंक की राजनीत खत्म होगी तो ये गिलानी जैसे कुत्ते अपने आप भोंकना बंद कर देंगे

    अतीत गुप्ता

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  3. Sushil Gupta

    पता नहीं आखिर सरकार इनसे क्यूँ कांपती है. इन सबको एक बार कुछ महीने के लिए राष्ट्र द्रोह के केस मैं J & K से बाहर किसी जेल में Hard core nationalists criminals के साथ बंद कर देना चाहिए. इन्हें आजादी का मतलब अपने आप समझ आ जाएगा.
    लेकिन ऐसा कुछ होगा नहीं, Because we are a country without any leadership .

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  4. Anil Sehgal

    कैसी आजादी, कौन सी आजादी चाहते हैं आप -by – दानसिंह देवांगन

    दानसिंह देवांगन साहेब आपने, मेरी समझ अनुसार, तीन स्थिति बताई:

    (१) अलग देश

    (२) पाकिस्तान का हिस्सा

    (३) वर्तमान स्थिति.

    पहले दो विकल्प तो सपना मात्र हैं – भारत जिंदा देश है; J&K is integral and will remain so

    मेरा नुक्सा ———-

    जम्मू-कश्मीर का विकास क्यों नहीं हो रहा, रोज़गार क्यों नहीं है ?

    यह इस कारण से है कि वहां के लोगों को देश के शेष भाग के साथ मिल कर व्यापार, उद्योग नहीं करने दिया जाता.
    विश्वास पैदा नहीं करने देते नेता लोग.
    अपना उल्लू सीधा करने में लगें हैं नेता.

    यह आर्थिक पहलु है.

    आर्थिक पहलु सुधारो, राजनैतिक पहलु संभलना बहुत सुगम हो जायगा.

    नवयुवक स्वयं शेष भारत के गले लगेगा.

    J & K के युवक को शेष भारत नौकरी दे, और रोज़गार प्रस्तुत करे.

    इन नेताओं की फूक निकल जायगी.

    Economics will manage politicians

    यह कर के देखो

    Nothing succeeds like success

    – अनिल सहगल –

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  5. सुमित कर्ण

    सुमित कर्ण

    अरूंधती राय, गिलानी, प्रो अब्दुर्रहमान, नजीब बुखारी, शेख शौकत हुसैन जैसे लोग,जो हमारे देश के सिविल सोसाइटी का एक हिस्सा है,और हमारे देश में हुई कई आन्दोलन गतिविधि में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा चुके है,अगर इस तरह के बयान देते है तो मुझे इन लोगों को देशद्रोही कहने में कोई
    अतिश्योक्ति नहीं होगी.
    अब भारत के सामने यह दुविधा है कि इस तरह कि बयानबाजी के बाद अगर इन लोगों को जेल में डाला जाये तो बात कुछ ज्यादा ही तूल पकड़ लेगी और अगर इन्हें यूँ ही छोड़ दिया जाये तो फिर कट्टरपंथियों द्वारा इस तरह कि बयानबाजी निस्संदेह देखने को मिलेगी..सरकार कुछ करे या न करे कम से कम ” कमेटी फार रिलीज आफ पालिटिकल प्रिजनर ” नामक संगठन को बैन अवश्य कर देना चाहिए.
    “सुमित कर्ण”..नई दिल्ली

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