“जिंदगी” क्या है

आज “जिंदगी” संभल गई,
कल सब कुछ संभल जायेगा।
आज जिंदगी न संभली तो,
कल सब कुछ बिगड़ जायेगा।।

“जिंदगी” संवारने को तो,
सारी जिंदगी पड़ी है।
ये लम्हा संवार लो तुम,
जहा जिंदगी खड़ी है।।

“जिंदगी” है तो सब कुछ है,
जिंदगी नहीं तो कुछ नहीं।
अगर जिंदगी न रही तो,
सारा जहान कुछ नहीं।।

“जिंदगी” जिंदादिली का नाम है,
बाकी सब बेकार के नाम है।
अगर ये जिंदगी न रहीं तो,
समझ लो हम नाकाम है।।

ये बुरा वक़्त आया है,
कभी अच्छा भी आयेगा।
इस वक़्त जिंदगी संभाल,
ये बुरा वक़्त टल जायेगा।।

“जिंदगी” एक अनमोल पेड़ है,
इसमें फल जरूर आयेगे।
अगर ये पेड़ न रहा तो
फल कहां से हम खायेंगे।।

“जिंदगी” है तो जहान है,
वरना ये फूटा मकान है।
इसे संभाल कर तू रख,
वरना रहेगा तू वीरान है।।

आर के रस्तोगी

Leave a Reply

%d bloggers like this: