लेखक परिचय

नीरज कुमार दुबे

नीरज कुमार दुबे

नीरज जी लोकप्रिय हिन्दी समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी डॉट कॉम में बतौर सहयोगी संपादक कार्यरत हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा हासिल करने के बाद आपने एक निजी संस्थान से टीवी जर्नलिज्म में डिप्लोमा हासिल कीं और उसके बाद मुंबई चले गए। वहां कम्प्यूटर जगत की मशहूर पत्रिका 'चिप' के अलावा मुंबई स्थित टीवी चैनल ईटीसी में कार्य किया। आप नवभारत टाइम्स मुंबई के लिए भी पूर्व में लिखता रहे हैं। वर्तमान में सन 2000 से प्रभासाक्षी डॉट कॉम में कार्यरत हैं।

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नीरज कुमार दुबे

कभी कथित ‘भगवा आतंकवाद’ का भय दिखाकर तो कभी आतंकवाद की घटना के बहाने राजनीतिक लाभ उठाने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की ओर से अल कायदा प्रमुख को ‘ओसामा जी’ कह कर पुकारा जाना हो या फिर ओसामा बिन लादेन को समुद्र में दफनाए जाने का विरोध करना हो, दोनों ही बेहद आपत्तिजनक बाते हैं। लेकिन वोट बैंक की राजनीति के इस दौर में सही या गलत की परवाह किसे है। यह वोट बैंक की राजनीति और साम्प्रदायिकता नहीं तो और क्या है कि हमारे नेता यह सोचते हैं कि लादेन के साथ जो हश्र हुआ उसको सही ठहराने से कहीं एक वर्ग की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचे। लेकिन वह भूल जाते हैं कि लादेन का किसी धर्म से वास्ता नहीं था वह सिर्फ अमेरिका का ही नहीं बल्कि इंसानियत का भी दुश्मन था और उसके द्वारा संचालित हमलों में मुस्लिम सिर्फ मारे ही नहीं गये बल्कि लादेन और उसके संगठन के कार्यों की बदौलत विश्व भर में संदिग्ध नजरों से देखे भी गये। ऐसा व्यक्ति जो अपनी कौम का ही दुश्मन बन गया हो उसके मारे जाने पर शोक कैसा? उसे सम्मानजनक तरीके से संबोधित कर यह कल्पना करना कि इससे किसी वर्ग को लुभाया जा सकेगा, बेकार की बात है।

 

दिग्विजय सिंह के इन बयानों से कांग्रेस पार्टी ने दूरी बनाकर सही किया क्योंकि पार्टी पर पहले ही आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई बरतने और दोषियों की सजा पर कार्रवाई में देरी करने जैसे आरोप लगते रहे हैं। खबरों में कहा गया कि कांग्रेस ने इस विषय पर दिग्विजय सिंह को तलब भी किया है लेकिन खुद दिग्विजय ने ऐसी किसी बात से इंकार किया। दिग्विजय को यह देखना चाहिए कि उनके इस कदम ने उनको किन लोगों के साथ और किस श्रेणी में खड़ा किया। जहां एक ओर दिग्विजय लादेन को ‘ओसामा जी’ कह कर संबोधित कर रहे थे तो दूसरी ओर हुर्रियत कांफ्रेंस के उग्रपंथी गुट के सैय्द अली शाह गिलानी थे जो लादेन के लिय्ो जनाजे की नमाज का आह्वान कर रहे थे। तीसरी ओर कोलकाता की स्थानीय् टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम मौलाना नूरूर रहमान बरकती थे, जिन्होंने लादेन की ‘‘आत्मा की शांति‘‘ के लिए विशेष नमाज अदा की तो चैथी ओर केरल का वह व्यक्ति अथवा संगठन था, जिसकी ओर से ओसामा के मारे जाने के खिलाफ पर्चे बंटवाने की खबर आई। इससे पहले चुनावों के समय एक बार बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान की रैली में एक शख्स ओसामा के वेष में लोगों को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा था।

 

पार्टी की कथित दोगली नीतियों के चलते दूर हुए मुस्लिम मतदाताओं को वापस कांग्रेस से जोड़ने के प्रयास में दिग्विजय सिंह जब तब कोई न कोई तीर छोड़ते रहते हैं। इससे पहले उन्होंने दिल्ली में हुए विस्फोटों के बाद हुए बाटला मुठभेड़ कांड पर सवाल उठाते हुए आजमगढ़ का दौरा किया था। हालांकि उस समय दिग्विजय ने यही कहा था कि वह सच्चाई का पता लगाने के लिए इलाके का दौरा कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को रिपोर्ट भी सौंपी थी लेकिन जब सरकार, मानवाधिकार आयोग जैसे संस्थान मुठभेड़ को सही ठहरा चुके हों तो किसी पार्टी महासचिव की रिपोर्ट का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इस मामले में भी दिग्विजय पर वोट बैंक की राजनीति करने के आरोप लगे थे। यही नहीं उन्होंने तो मुंबई हमले के दौरान हेमंत करकरे की शहादत पर भी एक तरह से सवाल उठाया था जब उन्होंने यह कहा था कि करकरे ने उन्हें फोन कर बताया था कि वह मालेगांव धमाके की जांच के सिलसिले में संघ परिवार के निशाने पर हैं।

 

दिग्विजय की हालिया कथित उपलब्धियों की बात की जाए तो उनके हिस्से में ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द को प्रचलित कराने का श्रेय भी है। साथ ही वह इस बात के लिए भी विख्यात हैं कि पार्टी संगठन में राज्यों के प्रभारी मात्र होने के बावजूद राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अन्य विषयों पर भी खूब बोलते हैं। दूसरों की संपत्ति की जांच की मांग करना उनका प्रिय शगल है तो साथ ही अपने पर हमला बोलने वाले पर तेजी से आक्रामक होना उनकी विशेष रणनीति है। बहरहाल, ओसामा को सम्मानपूर्वक संबोधन से पूर्व दिग्विजय जी को उन परिवारों या पीडि़तों के हाल पर नजर दौड़ा लेनी चाहिए थी जो विश्व भर में ओसामा की आतंकी गतिविधियों के शिकार हुए।

 

जय हिंद, जय हिंदी

4 Responses to “ओसामा को सम्मान देने से आखिर क्या फायदा होगा दिग्विजय जी”

  1. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    meediyaa ke wyavhaar ko samajhne mein sahaayataa mile, is hetu kuchh pramaanik w mahatwpurn saamagri yahaan par prastut hai;

    WHO CONTROLS INDIAN MEDIA?
    Dec 15 2007 | Views 4139 | Comments (11) | Report Abuse
    Tags: inian media is biased and only playing the tune of their foreign masters ibn7 ndtv star news
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    This morning I received an interesting mail from one of my RESEARCHER friends. He has no political leanings. But, if the facts he has brought out are true, it shows the reasons for the BIASED RANTINGS of Indian MEDIA, both Print & Electronic.How can you believe them?
    I was particularly surprised by the BIG TALKING NDTV and its DYED- IN -TRUTH -CEO, Mr Prannoy Roy and his Pakistan connection with Musharref. Here are the basic Contents of the Mail.

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    Who owns the media in India ?

    There are several major publishing groups in India, the most prominent
    among them being the Times of India Group, the Indian Express Group, the
    Hindustan Times Group, The Hindu group, the Anandabazar Patrika Group, the Eenadu Group, the Malayalam Manorama Group, the Mathrubhumi group, the Sahara group, the Bhaskar group, and the Dainik Jagran group.

    Let us see the ownership of different media agencies.

    NDTV: A very popular TV news media is funded by Gospels of Charity in Spain that supports Communism. Recently it has developed a soft corner towards Pakistan because Pakistan President has allowed only this channel to be aired in Pakistan. Indian CEO Prannoy Roy is co-brother of Prakash Karat, General Secretary of Communist party of India.His wife and Brinda Karat are sisters.

    India Today which used to be the only national weekly which supported BJP is now bought by NDTV!! Since then the tone has changed drastically and turned into Hindu bashing.

    CNN-IBN: This is 100 percent funded by Southern Baptist Church with its
    branches in all over the world with HQ in US. The Church annually allocates
    $800 million for promotion of its channel. Its Indian head is Rajdeep
    Sardesai and his wife Sagarika Ghosh.

    Times group list: Times Of India, Mid-Day, Nav-Bharth Times, Stardust , Femina, Vijaya Times,Vijaya Karnataka, Times now (24- hour news channel) and many more. Times Group is owned by Bennet & Coleman. ‘World Christian Council’ does 80 percent of the Funding, and an Englishman and an Italian equally share balance 20 percent. The Italian Robertio Mindo is a close relative of Sonia Gandhi.

    Star TV: It is run by an Australian, Robert Murdoch, who is supported by St. Peters Pontificial Church Melbourne.

    Hindustan Times: Owned by Birla Group, but hands have changed since Shobana Bhartiya took over. Presently it is working in Collaboration with Times Group.

    The Hindu: English daily, started over 125 years has been recently taken over by Joshua Society, Berne, Switzerland. N.Ram’s wife is a Swiss national.

    Indian Express: Divided into two groups. The Indian Express and new Indian Express (southern edition) .ACTS Christian Ministries have major stake in the Indian Express and latter is still with the Indian counterpart.

    Eeenadu: Still to date controlled by an Indian named Ramoji Rao. Ramoji Rao is connected with film industry and owns a huge studio in Andhra Pradesh.

    Andhra Jyothi: The Muslim party of Hyderabad known as MIM along with a
    Congress Minister has purchased this Telugu daily very recently.

    The Statesman: It is controlled by Communist Party of India. Kairali TV: It
    is controlled by Communist party of India (Marxist)

    Mathrubhoomi: Leaders of Muslim League and Communist leaders have major investment.

    Asian Age and Deccan Chronicle: Is owned by a Saudi Arabian Company with its chief Editor M.J. Akbar.

    The ownership explains the control of media in India by foreigners. The
    result is obvious.

    I suppose this leaves out Doordarshan and ZEE NEWS and AAJ TAK. don’t they have their own political agenda? Have your own assessment and views. If you wish to find out about the OWNERSHIP of SULEKHA–it is your headache.

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  2. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    अज्ञानी जी आप अब तक इस मीडिया से आशा लगाये बैठे हैं ? श्री राजाराम जी की रपट है की ये सब विदेशी चर्च और विदेशी कार्पोरेशनों ले हाथों कभी के बिक चुके हैं. तभी तो देश विरोधियों को इतना सम्मान मिलता है और देश भक्तों की उपेक्षा यह मीडिया करता है.

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  3. अज्ञानी

    दिग्विजय शायद ओसामा को ओबामा का करीबी रिश्तेदार मानते हैं तभी तो ओबामा जी को प्रसन्न करने के लिए ओसामा जी बोktल दिया 🙂 दिग्विजय सिंह जैसे भोंपुओं की आवश्यकता क्या है और मीडिया उन्हें इतनी कवरेज क्यूँ देता है ये बात आज तक मेरे पल्ले नहीं पड़ी !

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  4. डॉ. मधुसूदन

    डॉ.मधुसूदन उवाच

    नीरज कुमार दुबे कहते हैं==> “ऐसा व्यक्ति जो अपनी कौम का ही दुश्मन बन गया हो उसके मारे जाने पर शोक कैसा? उसे सम्मानजनक तरीके से संबोधित कर यह कल्पना करना कि इससे किसी वर्ग को लुभाया जा सकेगा, बेकार की बात है।”<===
    नीरज जी दिग्विजय सिंह को, चुनाव जीतने का सूत्र पता है। और जो सूत्र आज तक सच प्रमाणित हुआ है, वह दिगवा से छूट नहीं सकता।
    पर जिस दिन उनपर से "कृपा दृष्टि" हट जाएगी, तो वह दूसरा "मणी शंकर अय्यर" हो जाएगा। फिर तूती बोलना बंद होगी। तभी तक राह देखनी होंगी।
    अब उन्हें अभ्यास हो गया है।उसीका गुलाम तोता है।
    —जय हिंद, जय हिंदी—

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