लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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पश्चिम बंगाल के बर्दवान में हुए बम धमाकों की जांच के सिलसिले में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जब बर्दवान जिले के खागड़ागढ़ पहुंचे, तो कुछ चौंकानेवाले तथ्य पूरे देश के सामने आये। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्फोट स्थल का मुआयना किया और कुख्यात आतंकी संगठन ज़मात-उल-मुज़ाहिदीन के बहुमंजिला मुख्यालय का भी निरीक्षण किया। बहुमंजिली ईमारत में बम बनाने का विशाल कारखाना था, बड़ी मात्रा में अलगाववादी और ज़ेहादी साहित्य था, बड़ी मात्रा में अवैध अत्याधुनिक आग्नेयास्त्र थे, भारत के विभिन्न महत्त्वपूर्ण नगर एवं प्रतिष्ठानों के नक्शे थे, पचासों कंप्यूटर थे, हज़ारों सीडी, पेन ड्राइव थे जिसमें भारत विरोधी और इस्लामी ज़ेहाद की प्रचार-सामग्री भरी थी। यही नहीं उस बहुमंजिली ईमारत से १.५ किमी की एक पक्की सुरंग भी मिली जिसका धड़ल्ले से आतंकवादी उपयोग करते थे। सुरक्षा बलों ने इसके अतिरिक्त विभिन्न स्थानों पर कार्यशील ६५ बम बनानेवाले कारखानों का भी प्रमाण के साथ पता लगाया।

आतंकवादियों ने इतना बड़ा नेटवर्क कोई एक दिन में नहीं खड़ा किया होगा। ऐसा भी नहीं हो सकता कि ज़मात-उल-मुज़ाहिदीन की गतिविधियों,  उसके बम के कारखानों और उसके बहुमंजिले मुख्यालय की सूचना पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस को न रही हो। बर्दवान न तो कश्मीर की तरह दुर्गम पहाड़ियों-घाटियों वाला क्षेत्र है और ना ही झारखण्ड जैसा दुर्गम वन-क्षेत्र। एक मैदानी इलाके में ऐसी दुर्दान्त आतंकवादी गतिविधियां चलती रहीं और राज्य सरकार कान में तेल डाल, आंखें बन्द कर सोती रही – सिर्फ तुष्टीकरण और वोट के लिये। इतने बड़े खुलासे के बाद भी ममता बनर्जी, वामपन्थी पार्टियां, सोनिया-राहुल, मेधा पाटेकर, अरविन्द केजरीवाल, लालू, मुलायम, नीतिश, नवीन, दिग्विजय आदि बड़बोले नेता बिल्कुल खामोश रहे। किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

क्या ये सेकुलरिस्ट भारत के सीरिया या इराक बनने का इन्तज़ार कर रहे हैं? इस देश में आतंकवाद या नक्सलवाद फल-फूल ही नहीं सकता है अगर उसे इन राष्ट्रद्रोहियों का समर्थन प्राप्त न हो। क्या उनकी आंखें तब खुलेंगी जब हिन्दुस्तान पैन इस्लाम की छतरी तले आ जायेगा? लेकिन तब पछताने के अलावा कुछ भी नहीं बचेगा।

3 Responses to “इन गद्दार सेकुलरिस्टों की आंखें कब खुलेंगी?”

  1. इंसान

    आप पूछते हैं “इन गद्दार सेकुलरिस्टों की आंखें कब खुलेंगी”? इन सेकुलरिस्टों की आँखे कभी बंद थी ही नहीं अन्यथा स्वार्थवश आँखे मूँदे अपने मालिकों को कैसे पहचान और देख पाते? इन सेकुलरिस्टों की भरी जेबों के कारण इनकी आँखे अवश्य झुकी रही हैं। क्यों न क्षण भर के लिए हम एक अभूतपूर्व तथ्य को याद करें और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय नागरिकों द्वारा सर्वसम्मति से भारतीय जनता पार्टी को केंद्र शासन सौंपने में सेकुलरिस्टों की हार देखें? इसके साथ साथ देखें कि आज नए विश्वसनीय राजनैतिक वातावरण में बर्दवान काण्ड को कुशल विधि व व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्र-हित कैसे सुलझाया जाता है। मोदी शासन द्वारा कल के सांप्रदायिक व राष्ट्र-द्रोही तत्वों पर कड़ी नज़र रखते हुए विषय पर मीडिया की गतिविधियों व परिणामस्वरूप मीडिया के उत्तरदायित्व में विशेष संतुलन व नियामक नियंत्रण स्थापित करना बहुत आवश्यक है।

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  2. abhaydev

    is desh me atankwad, maovad, naxlewad adi samasyao ka mool karan janpratinidhi chunne ki galat paddhati hai. namankan, jamanat rashi, chunav chinh, e.v.m., ye charo desh ki sabhi chhoti-badi samasyao ka janmdata aur poshak hai. bharat nirvachan ayog aur rashtrapati, pradhanmantri tatha sabhi rashtra hitaishi logo se nivedan hai ki janpratinidhi chunne ke vaidik chayan pranali lagoo karwaye.

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  3. mahendra gupta

    जब तक जनता इनके बहकावे में आ कर विवेक काम में लिए बिना वोट दे कर जिताती रहेगी, ये सत्ता में ऐसे ही आते रहेंगे आखिर तृणमूल भी तो कांग्रेस की ही मानस पुत्री है ,वह भी उसी के अनुरूप चलेगी

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