क्यों बनती हाई प्रोफ़ाइल लड़कियां काल गर्ल

-अनिल अनूप

 

कई समय से कालगर्ल के धंधे के बारे में जानने की जिज्ञासा थी कि क्यों हाई सोसाइटी में रहने वाली लड़कियां इसे कर रही हैं? आजकल तो इस धंधे के बढाने में इंटरनेट के योगदान को भी कम नहीं आंका जा सकता। यह माध्यम पूरी तरह से सुरक्षित है। इसमें सारी डीलिंग ई-मेल द्वारा की जाती है। इन्टरनेट पर दिल्ली की ही कई सारी साइटें उपलब्ध है, जिसमें कई माडल्स के फोटो के साथ उनके रेट लिखे होते हैं।
एक परिचित के माध्यम से मेरी मुलाकात लवजीत से हुई जो दिल्ली के सबसे बड़े दलाल के लिए काम करता है। उसने एक पांच सितारा होटल में माया से मेरी मुलाकात का समय तय किया। उसका कहना था कि माया एक इज्जतदार घर की लड़की है और इंगलिश बोलती है। बातचीत के दौरान लवजीत का मोबाइल फोन बजता रहता है। एक के बाद एक इंक्वाइरी जारी रहती है। ‘इस धंधे में हमेशा बिजी रहना पड़ता है’, उसका कहना है। चलने से पहले वो मुझे ठीक वक्त पर पहुंचने की ताकीद करता है। अगर जगह या समय बदलना है तो उसे बताना होगा। पीले टॉप और नीली जीन्स में माया बिल्कुल सही वक्त पर पहुंच जाती है। अभिवादन खत्म और उसे यह जानकर हैरत होती है कि मैं सिर्फ उससे जानकारी चाहता हूं। थोड़ा वक्त जरूर लगता है लेकिन वह अपने धंधे के बारे में बात करने के लिए राजी हो जाती है।
‘हां, अब मुझे इस जिंदगी की आदत हो चली है। अच्छा पैसा और मौज मजा।’ उसके अधिकतर ग्राहक बिजनेसमैन हैं और उनमें से कुछ तो वफादार भी।
क्या उसे अजनबियों से डील करना अजीब नहीं लगता? वह कहती है, ‘देखिए हम लोग एक स्थापित नेटवर्क के जरिये काम करते हैं जो बिना किसी रूकावट के धंधे में मददगार है। टेंशन की कोई बात ही नहीं’।

माया का दावा है कि महज एक सप्ताह के काम के उसे साठ से अस्सी हजार मिल जाते हैं। जब उसने शुरूआत की थी तो अच्छे घरों की लड़कियां इस धंधे में बहुत नहीं थीं, लेकिन अब बहुत हैं, ‘अब तो यह लगभग आदरणीय हो गया है’, वह व्यंग्य करते हुए कहती है। दिल्ली के उच्च वर्ग, पार्टी सर्किल और सोशलाइटों के बीच ‘गुड सेक्स फॉर गुड मनी’ एक नया चलताऊ वाक्य बन गया है। यही वजह है कि दिल्ली पर भारत की सेक्स राजधानी होने का एक लेबल चस्पां हो गया है।
आंकड़ों की बात करें तो मुंबई में दिल्ली से ज्यादा सेक्स वर्कर हैं। लेकिन जब प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को सेक्स मुहैया करवाने की बात आती है तो दिल्ली ही नया हॉट स्पॉट है। ये प्रभावशाली और रसूखदार लोग हैं राजनेता, अफसरशाह, व्यापारी, फिक्सर, सत्ता के दलाल और बिचौलिए। यहां इसने पांच सितारा चमक अख्तियार कर ली है।पुलिस का अनुमान है कि राजधानी दिल्ली में देह व्यापार का सालाना टर्न आ॓वर 600 करोड़ के आसपास है। पांच सितारा कॉल गर्ल्स पारंपरिक चुसी हुई शोषित और पीड़ित वेश्या के स्टीरियोटाइप से बिल्कुल अलग हैं। न तो ये भड़कीले कपड़े पहनती हैं और न बहुत रंगी-पुती होती हैं और न ही उन्हें बिजली के धुंधले खंभों के नीचे ग्राहक तलाश करने होते हैं। पांच सितारा होटलों की सभ्यता और फार्महाउसों की रंगरेलियों में वे ठीक तरह से घुलमिल जाती हैं। वे कार चलाती हैं, उनके पास महंगे सेलफोन होते हैं।
जैसा कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि हाल ही के एक छापे के दौरान पकड़ी गई लड़कियों को देखकर उन्हें धक्का लगा। वे सब इंगलिश बोलने वाली और अच्छे घरों से थीं। कुछ तो नौकरी करने वाली थीं, जो जल्दी से कुछ अतिरिक्त पैसा बनाने निकली थीं।

34 साल की सीमा भी एक ऐसी ही कनवर्ट है। उसे इस धंधे में काफी फायदा हुआ है। किसी जमाने में वह फैशन की दुनिया का एक हिस्सा थी लेकिन उसके करियर ने गोता खाया और वह सम्पर्क के जरिये अपनी किस्मत बदलने में कामयाब हो गई। अब वह दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी में रहती है और कार ड्राइव करती है। उसे सस्ती औरत कहलाने में कोई गुरेज नहीं है। उसके मां-बाप चंडीगढ मे रिटायर्ड जीवन जी रहे हैं। सीमा हर तीन महीने में उनसे मिलने जाती है, हालांकि उन्हें मालूम नहीं है कि वो क्या करती है। लेकिन कई औरतों के लिए इस तरह की दोहरी जिंदगी जीना इतना सरल नहीं है। सप्ताह के दिनों में पड़ोस की एक स्मार्ट लड़की की तरह रहना और वीकएंड पर अजनबियों के साथ रातें गुजारना- अनेक पर काफी भारी पड़ता है।
‘अगर आप अकेले हैं तो तो ठीक है, लेकिन अगर परिवार के साथ रहते हैं तो काफी मुश्किल हो जाती है। कुछ लड़कियां दकियानूसी परिवारों से आती हैं और रात को बाहर रहने के लिए उन्हें बहाने खोजने पड़ते हैं’, सीमा कहती है।
मध्यवर्गीय परिवारों की लड़कियां इस धंधे में किक्स और त्वरित धन की खातिर उतरती हैं। हालांकि कुछ एक या दो बार ऐसा करने के बाद धंधे से किनारा कर लेती हैं पर कई इसमें लुत्फ लेने लगती हैं। जैसा कि माया कहती है, ‘चूंकि पैसा अच्छा है, इसलिए हम बेहतर वक्त बिता सकते हैं, गोआ में वीकएंड या फिर विदेश यात्रा।’
कुछ लड़कियां बगैर दलाल के स्वतंत्र रूप से काम करती हैं लेकिन किसी गलत किस्म का ग्राहक फंस जाने का खतरा उनके साथ हमेशा रहता है। हालांकि पुलिस का कहना है कि औरतें दलाल के बगैर बेहतर धंधा करती हैं। गौर से देखें तो दिल्ली के रूझान के हिसाब से कॉल गर्ल्स आजाद हो चुकी हैं। दलालों की संख्या कम हो रही है। दिल्ली में धंधा इसलिए बढ़ा है कि बतौर राजधानी सारे बड़े-बड़े सौदे यहीं होते हैं। राजनेताओं और अफसरशाहों को इंटरटेन किए जाने की जरूरत होती है। इसके अलावा आसपास काफी पैसा बहता रहता है। कनॉट प्लेस के खेरची दूकानदार से लेकर रोहिणी के रेस्टोरेंट मालिक और गुडगांव के रियल एस्टेट डेवलपर तक सब खर्च करने को तैयार हैं। उनकी सुविधा के लिए ऐसे कई गेस्ट हाउस कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं जो चकलों का काम भी करते हैं। दक्षिण दिल्ली में तो धंधा आवासीय कॉलोनियों से भी चलता है और सामूहिक यौनाचार के लिए किराये पर लिए गए फार्महाउसों पर तो पुलिस के छापे पड़ते ही रहते हैं। हाल ही में दक्षिण पश्चिम दिल्ली के वसंतकुंज में पड़े एक छापे में तीन औरतें और पांच दलाल पकड़े गए थे। उनमें से एक महिला जो बंगलूर से अर्थशास्त्र में स्नातक थी, महीने में पंद्रह दिन दिल्ली में रहती थी और उस दौरान दो लाख रूपया बना लेती थी। बाकी औरतें भी एक रात के दस से पन्द्रह हजार रूपये वसूला करती थीं। उनके ग्राहक बिजनेसमैन और वकील थे।
दिल्ली में इस धंधे में सबसे बड़ा नाम क्वीन बी का है जो ग्रेटर कैलाश से सारे सूत्र संभालती है। एक पंजाबी परिवार की यह 44 वर्षीय महिला जिसका उपनाम दिल्ली के एक पांच सितारा होटल से मिलता-जुलता है, लड़कियों की सबसे बड़ी सप्लायर है और इसका नेटवर्क काफी लंबा-चौड़ा है। वो न सिर्फ ‘अच्छी’ भारतीय लड़कियां मुहैया करवाती है बल्कि मोरक्कन, रूसी और तुर्की लड़कियां भी अपने घर में रखती है। नब्बे के दशक की शुरूआत में छापे के दौरान एक पांच सितारा होटल से पकड़ी गई क्वीन बी के नेटवर्क को प्रभावशाली नेताओं और रसूख वाले व्यापारियों का सहारा मिला हुआ है। ‘उसके संबंधों के मद्देनजर उसे तोड़ने में बहुत मेहनत लगेगी’, यह कथन है एक पुलिसकर्मी का, जिसका अनुमान है कि क्वीन बी सिर्फ सिफारिशों पर काम करती है और उसकी एक दिन की कमाई चार लाख रूपया है। फिर दिल्ली में बालीवुड की एक अभिनेत्री भी सक्रिय है, जिसके पास अब कोई काम नहीं है। उसके नीचे सात से आठ जूनियर अभिनेत्रियां काम करती हैं। उनका अभिनय करियर खत्म हो जाने के बाद वे सब धंधे में उतर आई हैं। एक दलाल के अनुसार, अफसरशाहों और राजनेताओं में बड़े नाम वाली लड़कियों की काफी मांग है।
हाल ही के एक छापे में पकड़ी गई एक युवती दिल्ली की एक फर्म में जूनियर एक्जीक्यूटिव के पद पर थी। गु़डगांव के एक लाउंज बार में एक दलाल की नजर उस पर पड़ गई। उसके चेहरे और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उसने उसे धंधे में उतार दिया, लेकिन अपने ग्राहक वह खुद तय करती है। वीक एंड को बाहर जाने पर उसे 60 से 70,000 रूपये मिल जाते है। इसके अलावा ग्राहक उसे महंगे तोहफों से भी नवाजते हैं।राजधानी के एक जाने-माने दलाल का कहना है, ‘चुनाव करने के लिए दिल्ली में अनंत लड़कियां हैं। सही सम्पर्क और सही कीमत के बदले आप जो चाहें हासिल कर सकते हैं’। यहां एक पांच सितारा होटल में पकड़ी गई एक 29 वर्षीय युवती और एक दूसरी लड़की केवल अमीरों और रसूख वालों के काम आती थीं। युवती एक स्कोडा कार ड्राइव करती थी और उसका पता दक्षिण दिल्ली का था। उसकी साथी दिल्ली के जाने-माने स्कूल में पढ़ी थी। उनके पास ग्राहकों का एक अच्छा खासा डेटाबेस था। ये मोबाइल फोन के जरिए धंधा करती थीं और संभ्रांत परिवारों से थीं।
लेकिन यह धंधा चलता कैसे है?

 

‘दलालों और एक सपोर्ट सिस्टम के जरिए सब कुछ सुसंगठित है, जहां युवावर्ग उठता-बैठता है। ऐसी जगहों पर लोग भेजे जाते हैं। शहर के बाहरी छोर पर स्थित पब और लाउंज बार इस मामले में काफी मददगार साबित होते हैं। यहीं पर नई भर्ती की पहचान होती है। सही जगह पर सही भीड़ में आप पहुंच जाइए, आप पाएंगे कि ऐसी कई महिलाएं हैं जो पैसा बनाना और मौज-मजा करना चाहती हैं।’ यह कथन है एक ऐसे शख्स का जो धंधे के लिए लड़कियों की भर्ती करता है। एक बार दलाल की लिस्ट में लड़की आई नहीं कि धंधा मोबाइल फोन पर चलने लगता है। सामान्यतया मुलाकात की जगह होती है कोई पांच सितारा होटल, ग्राहक का गेस्ट हाउस या फिर उसका घर। पुलिस के अनुसार अधिकतर दलाल केवल उन लोगों के फोन को तरजीह देते हैं जिनका हवाला किसी ग्राहक द्वारा दिया जाता है। इससे सौदा न सिर्फ आपसी और निजी रहता है, बल्कि एक चुनिंदा दायरे तक ही सीमित होता है।पांच सितारा कॉल गर्ल्स के साथ ही बढ़ती हुई तादाद में मसाज पार्लर, एस्कॉर्ट और डेटिंग सेवाएं भी दैहिक आनंद के इस व्यवसाय को और बढ़ावा दे रही हैं। ये सब सेक्स की दूकानों के दूसरे नाम हैं। दिल्ली समेत देश के तमाम अखबार इन सेवाओं के वर्गीकृत विज्ञापनों से भरे रहते हैं।
कुछ समय पहले इन पार्लरों का सरगना पकड़ा गया था जिसके दस से अधिक पार्लर आज भी दिल्ली में चल रहे हैं। मजेदार बात यह है कि यह शख्स इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और आईएएस की परीक्षा में भी बैठा था। अपने तीन दोस्तों के साथ इसने देह व्यापार के धंधे में उतरना तय किया और साल भर में उसने शहर में आठ मसाज पार्लर खोल दिए। कुख्यात कंवलजीत का नाम आज भी पुलिस की निगरानी सूची में है। किसी जमाने में दिल्ली के वेश्यावृत्ति व्यवसाय का उसे बेताज बादशाह कहा जाता था। जब दिल्ली में उस पर पुलिस का कहर टूटा तो वह मुम्बई चला गया।

 

पुलिस के अनुसार अभी भी अपनी दो पूर्व पत्नियों के जरिये उसका सिक्का चलता है। उसके दो खास गुर्गे- मेनन और विमल अपने बूते पर धंधा करने लगे हैं। पुलिस मानती है कि वेश्यावृत्ति के गिरोहों की धर पकड़ अक्सर एक असफल प्रयास साबित होता है क्योंकि थोड़े समय बाद ही यह फिर उभर आती है। चूंकि यह एक जमानती अपराध है और पकड़ी गई औरतें कोर्ट द्वारा छोड़ दी जाती हैं इसलिए वे फिर धंधा शुरू कर देती हैं। पुलिस का यह भी मानना है कि चूंकि यह सामाजिक बुराई है इसलिए छापे निष्प्रभावी हैं। इसे कानूनी बना देना शायद बेहतर साबित हो। लेकिन राजनेता दुनिया के सबसे पुराने पेशे पर कानूनी मोहर लगाना नहीं चाहते, लिहाजा यह धंधा फल-फूल रहा है.

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