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    Homeराजनीतिकोरोना के बहाने सरकारी महकमों में भर्तियों पर रोक क्यों ??

    कोरोना के बहाने सरकारी महकमों में भर्तियों पर रोक क्यों ??

     डॉo सत्यवान सौरभ, 

    देश भर में कोरोना काल के कारण युवाओं को रोजगार में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। जिसकी वजह से वो आज मानसिक तनाव में है. मार्च माह से ये खबर कि वित्त मंत्रालय द्वारा सभी सरकारी महकमों में निकलने वाली सरकारी नौकरियों पर रोग लगा दी है, बेरोजगार युवाओं को कोरोना से भी ज्यादा डरा रही है। लेकिन इसके बाद अब छह माह बाद खुद वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है सरकारी पोस्ट की भर्ती पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। सरकारी एजेंसियों जैसे एसएससी, यूपीएससी, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड पहले की तरह ही भर्तियां करेंगी। इसके साथ-साथ मंत्रालय ने साफ किया कि व्यय विभाग का जो 4 सितंबर का सर्कुलर है वो पदों के निर्माण के लिए आतंरकि प्रक्रिया से जुड़ा है।

    हरियाणा राज्य के घर-घर में 5 तारीख़ को शिक्षक दिवस के दिन शाम को 5 बजे 5 मिनट के लिए ताली, थाली या घंटी बजी. राज्य का हर बेरोज़गार युवा और उनके  समर्थन में लोग छतों पर दिखे. क्या सरकारी भर्तियों के लिए अब इस मुहीम में सारा भारत एक साथ उतरेगा और उसी भाषा में अपनी बात सरकार तक पहुंचाएगा जिस भाषा में सरकार समझती है l

    सरकारी नौकरियों पर प्रतिबंध होने की बात देश भर में राज्य सरकारों के द्वारा भी सामने आई। राजधानी से सटे हरियाणा राज्य में पिछले छह माह से भर्ती प्रक्रिया बंद ही समझी जाये. हरियाणा सरकार ने कोरोना लॉक डाउन से पहले जो भर्ती विज्ञापन जारी किये थे उन पर कोई काम नहीं किया है, नई भर्ती की बात तो दूर. यही नहीं मार्च माह में यहाँ राज्यभर के आईटीआई संस्थानों यानि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अनुदेशकों के पदों के लिए जारी किये गए परिणाम के बाद डॉक्युमनेट वेरिफिकेशन के लिए जारी शेडूल को भी दोबारा से शुरू कर भर्ती को कोरोना के नाम पर लटका दिया है .

    राज्य भर में प्राइमरी शिक्षकों के दस हज़ार पद खाली होने के बावजूद भी हरियाणा सरकार इन पदों को भरने का नाम नहीं ले रही, जबकि शिक्षक भर्ती के लिए पात्रता परीक्षा हर साल करवाकर लाखों अभ्यर्थियों से अरबों का पैसा पात्रता के नाम पर इकट्ठा किया जा रहा है. अगर शिक्षकों की भर्ती करनी ही नहीं तो फिर पात्रता परीक्षा का क्या औचित्य रहा जाता है? इसी तरह हरियाणा सरकार ने अन्य विभागों की भर्तियां कोरोना के नाम पर ठन्डे बस्ते में भेज दी गई है.

    केंद्र सरकार ने तो कह दिया है कि भर्तियों पर रोक मात्र अफवाह है.  वित्त मंत्रालय ने एकनोटिफिकेशन जारी करते हुए साफ किया है कि भारत सरकार में खाली पदों को भरने के लिए किसी भी नई भर्ती पर रोक नहीं लगाई गई है। मंत्रालय ने बताया कि व्यय विभाग (04 सितंबर 2020) का जो सर्कुलर है, वो पदों के निर्माण के लिए आंतरिक प्रक्रिया से संबंधित है और यह किसी भी तरह से भर्ती को प्रभावित नहीं करता है।  

    मगर हरियाणा राज्य के अभ्यर्थी तो भर्ती परीक्षा पास करने के बाद भी डाक्यूमेंट्स वेरफिकेशन के लिए दर-दर गुहार लगा रहें है. हरियाणा में  बेरोजगारी व सरकार की तानाशाही के खिलाफ यहाँ के लाखों युवाओं ने थाली बजाकर नाराजगी जाहिर की। आज खटटर सरकार रोजगार दो पिछले चार दिनों से ट्रेंडिंग ट्वीट बना हुआ है. युवा गुस्से में है और नारा दे रहें है-अनपढ़ नेता घूम रहे हैं- महंगी-महंगी कारों में! डिग्री लेकर रिक्शा खींच रहे,आज युवा बाजारों में !!

    हरियाणा में युवाओं और बेरोजगार अभ्यर्थियों के लिए संघर्षरत स्वेता ढुल ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि युवाओं की ताली ,थाली औऱ घन्टी की आवाज अब सरकार को सुननी चाहिए. युवाओं को चाहिए अब रोजगार कि सख्त जरूरत है.आज जारी आंकड़ों में हरियाणा बेरोज़गारी में नम्बर एक पर है । यहाँ कि सरकार ने सभी भर्तियों को पंचवर्षीय योजना बनाकर रख दिया है । कुछ तो पांच साल से ज्यादा भी लटकी पड़ी है ।बहुत सी भर्तियों में जमकर धांधली हुई है। आप कुछ कर ही नही रहे । हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन का ना कोई सलेब्स ,ना कोई टाइम टेबल । प्रश्न पत्रों में गलतियां ,उतर कुंजी में गलतियां । आर टी आई  का कोई जबाब नही । इन सब अत्याचारों को बंद कर सरकार को युवाओं की पुकार सुननी चाहिए.

    हरियाणा में पिछले सात सालों में 91% युवा यहाँ की सरकारी भर्ती प्रक्रिया से नाखुश रहे जबकि 9% संतुष्ट lजो भर्तियां हुई भी वो सेक्शन भी काफ़ी रोष परिपूर्ण रहा lऐसे में युवाओं को गंभीरता से न लेना व बेरोज़गारी को समस्या ही न समझना व उस पर एक्शन_मोड  में काम न करना यहाँ की मौजूदा सरकार पर भारी पड़ सकता है ! केंद्र  सरकार को नोटिफिकेशन के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी निर्देश देना चाहिए  कि जल्द से जल्द भर्तियों से जुड़े सभी इश्यूज सॉल्व करें व बेरोज़गारी कम करने हेतु ठोस कदम उठाये जाएं. अन्यथा भारत को बेरोजगारों का देश बनते देर नहीं लगेगी.

    डॉ. सत्यवान सौरभ
    डॉ. सत्यवान सौरभ
    रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

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