लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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-सुरेश हिन्दुस्थानी-

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गाजा में किए जा रहे हमले को लेकर जिस प्रकार से मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया को पत्र मिला है, उस पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि गाजा में किए जा रहे हमले का बदला लेने के लिए मुंबई में हमला किया जाएगा। मुंबई में आतंकी घटना की खुलेआम धमकी देना भारतीय जांच एजेंसियों के लिए एक खुली चुनौती है। भारत में ऐसी धमकी देने वाले और बम विस्फोट करके आतंक फैलाने वालों के तार पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ते हुए दिखाई देते हैं। प्राय: सुनाई देने वाले आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन और सिमी का जाल पूरे भात में फैल चुका है और इसमें भारत में रहने वाले मुस्लिम युवाओं की भूमिका भी कई बार सामने आ चुकी है।
वर्तमान में जिस प्रकार से मुसलमान में कौम परस्ती बढ़ती जा रही है, उसका दुष्परिणाम पूरा विश्व भोग रहा है। विश्व के किसी भी गैर इस्लामिक देश में इसी कारण से पूरी मुस्लिम बिरादरी को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन मुस्लिम देशों में आपस में ही तनातनी बनी रहती है। मुंबई में जो पत्र मिला है वह सही है या गलत, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि मुंबई का नाम लेकर कहीं और घटना को अंजाम दिया जाए। क्योंकि पत्र के कारण गुप्तचर विभागों की सक्रियता मुंबई तक सीमित हो जाएगी और इसकी आड़ में आतंकी हिन्दुओं के किसी बड़े धार्मिक केन्द्र को निशाना बना सकते हैं। इस प्रकार की गतिविधियों में सहयोग करने में भारत के कुछ मुसलमान भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि आखिर आतंकवादी भारत में घुसपैठ करने के बाद रुकते कहां हैं? कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों की निष्ठा पर हर पल संदेह रहता है। वास्तव में ऐसा केवल तब ही होता है, जब किसी के अंदर उस देश के प्रति राष्ट्रभक्ति का भाव नहीं होता। इस धमकी भरे पत्र के अलावा भी आज भारत देश में जिस प्रकार से मुसलमानों द्वारा हिंसा की जा रही है, उससे तो ऐसा ही लगता है कि इराक में आतंकी संगठन के मुखिया बगदादी द्वारा की गई अपील का असर भारत में भी दिखाई देने लगा है। सहारनपुर में मुसलमानों द्वारा हिन्दुओं के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आग के हवाले कर देना और इसके बाद उनके ऊपर किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होना सरकार की ऐसी ढील है, जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा पैदा हो सकता है।
मुंबई में आतंकियों द्वारा भेजी गई वह चिट्ठी इस बात का पर्याप्त प्रमाण है कि देश में आतंक की समस्या लाइलाज बीमारी की तरह बढ़ती जा रही है, इसको रोकने के लिए सरकारों द्वारा जिस प्रकार के कठोर कदम उठाए जाने चाहिए वैसा अब तक तो दिखाई नहीं दे रहा। किसी भी घटना के बाद बयानबाजी करके अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले हमारे राजनेता फिर किसी घटना की प्रतीक्षा में रहते हैं। ऐसा लगता है कि देश के कुछ मुसलमान विदेश के इशारे पर काम कर रहा है। अब सवाल यह आता है आखिर वे कौन से कारण हैं जिससे मुसलमान केवल इस्लामिक राष्ट्रों के प्रति ही वफादार रहता है, वह गैर मुस्लिम देशों के साथ तालमेल क्यों नहीं रख पाता। इसका जवाब ढूंढ़ा जाए तो शायद यही कहानी सामने आएगी कि भारत के मुस्लिम समुदाय के लिए आतंकी संगठनों के संदेश आते हैं, जिन्हें हिंदुस्तान का मुसलमान सुनकर कट्टरवादिता की ओर अपने कदम बढ़ा देता है। मुंबई में मिली आतंकी धमकी वाले पत्र में यह साफ लिखा है कि गाजा का बदला मुंबई में लेंगे, इतना ही नहीं उसमें तो यह भी लिखा है कि 1993 में तो आप किसी प्रकारबच गए, अब नहीं बचोगे, रोक सको तो रोक लो।
धमकी भरे पत्र के मिलने के बाद सबसे पहले यही सवाल आता है कि इन आतंकी संगठनों का लक्ष्य भारत ही क्यों होता है, क्या इसके पीछे हमारी लचर कानून व्यवस्था दोषी है, या फिर हमारा सीधे पन का पर्याय माने जाने वाला हमारा व्यवहार। इस सबके पीछे भारत सरकार सहित प्रदेश की सरकारें तो दोषी मानी ही जाएंगी, लेकिन भारत का समाज भी कम दोषी नहीं है। क्या हम अपने धर्म के लिए एकत्रित नहीं हो सकते। आज मुसलमान अपने हर त्यौहार पर ऐसे एकत्रित होता है जैसे यह पर्व उनकी शक्ति प्रदर्शन का पर्व है। ऐसे कार्यक्रमों में वे जमकर अव्यवस्था भी फैलाते हैं।
पहले भी इस प्रकार के धमकी भरे पत्र मिले हैं, जिसमें इंडियन मुजाहिदीन ने साफ लिखा कि रोक सको तो रोक लो। यह पत्र भी इंडियन मुजाहिदीन की तरफ संकेत कर रहा है। इस धमकी भरी चिट्ठी से कई सवाल उपज रहे हैं, पहला तो यही कि गाजा का बदला भारत से क्यों लिया जा रहा है? इस सवाल की तह में जाना होगा, क्योंकि हो सकता है कि इसके पीछे गाजा और इराक की आतंकी गतिविधियों के सूत्र जुड़े हों। अगर वास्तव में इसके सूत्र जुड़े हैं तो यह भारत के लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है।

No Responses to “गाजा का बदला भारत में क्यों ?”

  1. Arun Kumar Upadhyay

    सबसे कमजोर भारत ही दीख रहा है। जेहादियों की हिम्मत इजरायल पर हमला करने की नहीं होती क्योंकि कई बार इसका फल भोग चुके हैं। भारत मॆ हर हमला करने पर उनको अधिक सुविधा मिलती है।

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