ट्विटर पर स्थायी पाबन्दी क्यों नहीं?

यदि बार-बार चेतावनियों के बाद भी ट्विटर सरकार के नये नियमों का पालन करने को किसी भी कीमत पर तैयार नहीं है और तीन महीने की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी जिस तरह ट्विटर ने सरकार को छका रखा है उससे तो यही लगता है उसे सरकार का तनिक भी भय नहीं रह गया है। उसकी हेकड़ी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत सरकार के नये नियमों का पालन करने की बजाय वो  आरोप लगा रहा है कि भारत में बोलने की आजादी नहीं है।
शायद उसे पता है कि भारत एक उदार राष्ट्र है और विपक्षीदल इतने सेकुलर हैं कि अपने देश की सरकार के खिलाफ  ही किसी भी हद तक जा सकते हैं। कदाचित तभी ट्विटर ने इस तरह का बयान देने की हिम्मत जुटायी। क्या ट्विटर इसी तरह के आरोप दुनिया के किसी अन्य देश पर लगाने की हिम्मत दिखा सकता है?
कौन नहीं जानता कि देश में जब से सोशल मीडिया  प्लेटफ ार्म यथा फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि चलन में आये हैं, तेजी से इन प्लेटफ ार्मो का दुरुपयोग भी होने लगा है? हद तो तब हो गई जब इन प्लेटफ ार्मो से भारत विरोधी गतिविधियों को प्रश्रय मिलने लगा। ऐसे मामलों में जब स्वयं ट्विटर की संलिप्ता सामने आई तो केन्द्र सरकार की तंद्रा टूटी।
गौरतलब है कि अक्टूबर २०२० में ट्विटर ने लेह लद्दाख को चीन का हिस्सा दिखा दिया था। इस पर भारत सरकार की कड़ी प्रक्रिया के बाद उसने न केवल अपनी गलती में सुधार किया था वरन् सरकार से लिखित  माफ ी भी मांगी थी।
इस घटना के बाद भी उसने पुन: वही शरारत की और भारत का गलत नक्शा वायरल किया जिसमें उसने जम्मू कश्मीर व लद्दाख को भारत में नहीं अलग देश के तौर पर चिन्हित किया था। इस पर ट्विटर के प्रबन्धक निदेशक के खिलाफ  प्राथमिकी तक दर्ज हो गई और बड़ी संख्या में लोगों द्वारा ट्विटर की इस हरकत को नाकाबिले बर्दाश्त मानते हुये उसके खिलाफ  कड़ी कार्यवाही की मांग शुरू हो गई तो ट्विटर ने आनन-फ ानन में उक्त गलत नक्शे को हटा दिया।
यही नहीं इसके पूर्व ट्विटर किसान आंदोलन और लाल किला हिंसा की भ्रामक पोस्ट जारी कर भारत की छवि खराब करने का प्रयास कर चुका है। हाल ही में उसने गाजियाबाद की एक घटना का जिसमें एक मुस्लिम बुजुर्ग की ढाढ़ी काटने व उससे जबरिया जय श्रीराम का नारा लगाने का कुछ युवकों पर आरोप था, की बिना पड़ताल किये ट्विटर में वीडियो वायरल कर दिया। आखिरकार धार्मिक भावना भड़काने के तहत गाजियाबाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ट्विटर की बदगुमानी व दादागीरी की हद तब हो गई जब उसने शुक्रवार को देश के कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि प्रसाद का ही ट्विटर एकाउंट एक घटे के लिये ब्लाक कर दिया। खुद ही दुबारा चालू किया इस नोटिस के साथ कि अगर फि र से कोई शिकायत मिली तो हमेशा के लिये एकांउट ब्लाक कर दिया जायेगा।
ट्विटर का कहना था कि श्री प्रसाद ने अमेरिका के डिजिटल मिलेनियम कापीराइट एक्ट का उलघंन किया है।
ट्विटर ने यही बर्ताव कांग्रेस के नेता शशि थरूर के साथ भी किया। जिससे भड़के थरूर ने अदालत जाने की धमकी दी है।
अब भी यदि सरकार ने ट्विटर पर स्थायी प्रतिबन्ध नहीं लगाया तो यही समझा जायेगा कि उसमेें ट्विटर पर पाबन्दी लगाने की हिम्मत नहीं है। तो फि र भविष्य में ट्विटर और क्या-क्या गुल खिलायेगा सहज अंदाज लगाया जा सकता है। 

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