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    पूजा पंडाल में मौत का खेल क्यों?

                          प्रभुनाथ शुक्ल 

    उत्तर प्रदेश के जनपद भदोही के औराई में पूजा पंडाल में रविवार की रात में लगी आग ने बहुत कुछ सवाल खड़ा किया है। निश्चित रूप से हम धर्म की आड़ में सुरक्षा और संरक्षा से आंखें मूंद लेते हैं। यह पीड़ा उन परिवारों से पूछो जिन्होंने अपने निर्दोष बेगुनाह मासूमों को खोया है। दिल पर हाथ उन परिवारों की दु:खती रग को देखिए। क्यों होते हैं ऐसे हादसे। कौन है इसके लिए जिम्मेदार। क्या गुनाह था उन तीन निर्दोष मासूम और दो  महिलाओं का जो आग की लपटों में समा गए। यह घटना सिर्फ उत्तरप्रदेश की नहीं, पूरे देश में ऐसी घटनाएं होती हैं। लेकिन हम सबक नहीं लेते।

    भदोही (औराई के नरथुवा) स्थित पूजा पंडाल में रविवार की रात तकरीबन 9:00 बजे आरती के समय लगी आग ने तबाही मचा दिया। उस दौरान पूजा पंडाल में तकरीबन डेढ़ से 200 लोग जमा थे। जिसमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान शामिल थे। यह घटना उस समय हुईं जब पंडाल में मंचन का कार्यक्रम चल रहा था। उसी समय पंडाल की तरफ आग भड़की और देखते ही देखते पूरे पंडाल को अपने आगोश में ले लिया। जान बचाने के लिए लोगों में भगदड़ मच गई। लोग जान की बाजी लगाकर पूजा पंडाल में आग बुझाते भी दिखे। लेकिन तब तक 70 से अधिक लोग झुलस गए। जबकि तीन मासूम अंकुश सोनी पुत्र दीपक (12), जेठूपुर, जया देवी पत्नी रामापति (45) पुरुषोत्तमपुर और नवीन उर्फ़ उज्जवल (10) पुत्र उमेश, निवासी बारी, आरती चौबे (48) हर्षवर्धन (8)औराई की आग की चपेट में आने मौत हो गयी है। घटना की खबर लगते ही जिला पुलिस प्रशासन के होश उड़ गए। जिलाधिकारी गौरांग राठी और पुलिस अधीक्षक डॉ अनिल कुमार प्रशासनिक अमले के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। 

    अग्निकांड की इस घटना ने जिला प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घटना की मानिटरिंग कर रहे हैं। मंडल और जोन स्तर के आला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा भी किया है। लेकिन सवाल की सुई एक जगह अटक आकर अटक जाती है। आमतौर पर धार्मिक आयोजनों को लेकर जिला पुलिस प्रशासन भी नरमी बरतने के मूड में होता है। यही कारण है कि सुरक्षा गौण हो जाती है। जिलाअधिकारी राठी की तरफ से गठित एसआईटी टीम ने अपनी सांकेतिक जांच रिपोर्ट में कहा है कि हाइलोजन के गर्म होने से आग लगी। लेकिन सवाल उठता है कि आयोजन समिति ने क्या पूजा स्थापना के पहले प्रशासनिक अनुमति ली थी। बिजली विभाग से क्या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिया गया था। अगर पुलिस प्रशासन से पंडाल स्थापन की मंजूरी ली गई थी तो क्या पूजा पंडाल में विद्युत कनेक्शन की अनुमति थीं। पंडाल में आग विद्युत शार्टसर्किट से लगी या फिर जगलेटर की लाइन से। बिजली विभाग के जिम्मेदार लोग क्या पूजा पंडाल में पहुंचकर इसकी निगरानी किया था कि वहां लिया गया कनेक्शन वैध है?

    दुर्गा पूजा पंडालों, रामलीला या मुशायरा समेत अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में आम तौर पर देखा गया है कि पुलिस अपनी सर्वे रिपोर्ट के दौरान यह सुनिश्चित करती है कि यहां पूजा पंडाल पहले से स्थापित हो रहा है। आयोजकों की स्वीकृति के बाद पूजा पंडालों की स्थापना की अनुमति दी जाती है। कानून व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस भी वहां मौजूद रहती हैं। लेकिन अग्निशमन और बिजली विभाग क्या अपना कार्य नहीं करता है। पूजा पंडालों की स्थापना के दौरान आग लगने की दुर्घटना से बचने के लिए कोई या सुझाव देता है। संबंधित पूजा पंडाल या अन्य में क्या सीजफायर लगाए गए हैं। इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सीजफायर की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। क्या पूजा पंडालों के पास पानी बालू या आग बुझाने के अन्य संयंत्र रखे गए हैं। अग्निशमन विभाग ऐसे पूजा पंडालों में जाहिर तौर पर ऐसे निर्देश नहीं जारी करता है कागज पर भले करता हो, लेकिन जमींन पर कुछ नहीं दिखता है। कि जिसे यह बताया जा सके कि आग लगने के दौरान सुरक्षा के लिए क्या करें।

    इस दौरान बिजली विभाग भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता दिखता है। पंडाल में लगे बिजली यंत्र कितने लोड ले रहे हैं। कनेक्शन वैध या नहीं इसका ख्याल नहीं करता है। ऐसे पूजा पंडालों की जांच कर बिजली विभाग नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी नहीं देता है। धार्मिक आयोजन के नाम पर सुरक्षा से खिलवाड़ के लिए खुली छूट दे दी जाती है। जब खामियां हादसों का कारण बनती हैं तो ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जिला प्रशासन लाचार दिखता है। इसका दूसरा कारण भी है कि विभागों के पास इतने संसाधन और कर्मचारी नहीं है कि हर पूजा पंडाल में उन लोगों की नियुक्त की जाए। फिलहाल घटना की जांच के लिए जिला प्रशासन ने एसआईटी गठित की है। उसकी रिपोर्ट के बाद ही यह साबित हो सकता है कि आग की घटना कैसे लगी और कौन जिम्मेदार है।प्रशासन से अधिक यह जिम्मेदारी पूजा पंडाल आयोजकों की भी है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही की घटना का संज्ञान लेते हुए दुर्गा पूजा सहित धार्मिक आयोजनों से जुड़ी समितियों से पूजा पंडालों के निर्माण में विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा मानकों का पूर्णतया पालन करने की अपील की है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रशासन इन आयोजन समितियों से संवाद बनाकर पूजा पंडालों में विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराए। अग्निकांड हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जतायी है।

    लेकिन यह वक्त पीड़ित परिवारों के आंसू पोछने का है। इस दु:ख की घड़ी में उनके साथ खड़े होने का है। फिलहाल होनी को हम नहीं टाल सकते। हादसे में इतना मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जिला प्रशासन ने बेहद सतर्कता और मुस्तैदी से काम किया है। जिलाधिकारी गौरांग राठी और पुलिस अधीक्षक डॉ अनिल कुमार ने निश्चित रूप पीड़ित लोगों की जान बचाने के लिए भरसक प्रयास किया है। जिला प्रशासन को घटना को लेकर कटघरे में खड़ा किया जा सकता है। घायलों को इलाज के लिए बीएचयू ट्रामा सेंटर, कबीर चौरा, स्वरूपरानी मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, सूर्या ट्रामा सेंटर भदोही और दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन पल-पल की घटना का संज्ञान ले रहा है। लेकिन घटना के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए। जिससे भविष्य में होने वाली ऐसी घटनाओं से बचा जाए।

    प्रभुनाथ शुक्ल
    प्रभुनाथ शुक्ल
    लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

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