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    Homeराजनीतिकृष्णनगर से सांसद बनकर राष्ट्रीय राजनीति में आएंगी ममता?

    कृष्णनगर से सांसद बनकर राष्ट्रीय राजनीति में आएंगी ममता?

    उत्तम मुखर्जी

    कोलकाता । सुनने में कुछ अटपटा सा लग रहा है लेकिन देश की राजनीति के अंदरखाने में यह बात शुरू हो गई है ।
    दरअसल ममता बनर्जी ने बंगाल के चुनाव में मोदी-शाह के विजय-अभियान को रोककर देश की राजनीति में एक नया विकल्प देने की सोच को मजबूत बनाया। अब तक जो तस्वीर थी उसमें मोदी-शाह के पास पूरा मैदान खाली पड़ा था । बंगाल में भी रैली , भीड़ , प्रचार और ममता के खुद के दल में टूट देखकर लग रहा था कि भाजपा की सरकार बननी तय है। एग्जिट पोल को छोड़ दें तो मीडिया को भी लग रहा था कि खेला होबे ना , एबार परिवर्तन होबे।

    हालांकि ममता ने एलान कर रखा था कि भांगा पाए खेला होबे…टूटा हुआ पैर में भी खेल होगा। बहुत अधिक सीटों में उनकी पार्टी जीती है। खुद पीएम ने भी उन्हें बधाई देकर पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है लेकिन ममता अभी भी दुखी हैं। जिस तरह चुनाव के दौरान मोदीजी ने उन पर व्यंग किया तथा केंद्रीय एजेंसी चुनाव के समय उनके भतीजे के घर पहुंची उसे वह सही वक्त नहीं मान रही हैं। उन्होंने आज भी कहा चुनाव आयोग पीएम के एजेंट के रूप में काम कर रहा था । दल तोड़ने से लेकर सेंट्रल फोर्स, सीबीआई , ईडी , आईटी , नज़रबंद करना सबकुछ चुनाव में इस्तेमाल हुआ। नन्दीग्राम सीट पर पहले जीत की बात फिर अंतिम में हार दिखलाना वे इसमें साज़िश देख रही हैं तथा कोर्ट जाने की बात कह रही हैं। हालांकि उन्होंने सभी को कोरोना संकट से लोगों को उबारने के लिए लगने को कहा है।देश के कई बड़े नेताओं ने आज उनसे बात की जिसमे अखिलेश यादव भी हैं। उन्होंने ममता से राष्ट्रीय राजनीति में आने का आग्रह किया। मोदी-शाह के विकल्प के रूप में जो नया समीकरण बनने की गुंजाइश है उस पर विचार शुरू हो गया है। कुछ लोग बिना विधायक बने मोरल ग्राउंड पर सीएम नहीं बनने का आग्रह ममता से किया तो कुछ लोगों ने कहा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सीएम तो बिना विधायक बने पद पर आसीन हुए हैं। जैसा कि जानकारों का मानना है कि इस नई ऊर्जा और ऊष्मा का इस्तेमाल ममता दिल्ली में कर सकती हैं। एक तो उनका कद बढ़ेगा तथा दूसरा बंगाल की राज्य सरकार को केंद्र छेड़ भी नहीं सकता है। एक दबाव बना रहेगा।
    अगर ऐसा होता है तो ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि सीएम की कुर्सी पर वे किसे बैठा सकती हैं? फिरहाद हाक़िम बॉबी , पार्थो चटर्जी समेत कई दिग्गज इसके लिए लाइन में हैं लेकिन ममता की पसन्द सांसद महुआ मोइत्रा होंगी। हाल में संसद में पूर्व चीफ जस्टिस के खिलाफ बोलकर विशेषाधिकार का वह नोटिस पा चुकी हैं। संसद में वे बेबाक बोलती हैं। अभी एक बार टिप्पणी की थी संसद चालू है और होम मिनिस्टर बंगाल का टूर कर रहे हैं।
    जब फिल्मी अभिनेत्री शताब्दी राय , देवश्री समेत कई साथ रहकर भी मदद नहीं कर पाईं तब महुआ साये की तरह न सिर्फ साथ रहीं बल्कि सड़क से लेकर मीडिया और संसद तक ममता का डिफेंस करती रहीं।
    महुआ मोइत्रा का जन्म मई 1976 में हुआ । वे जेपी मॉर्गन में वाईस प्रेसिडेंट रहीं। बाद में पॉलिटिक्स जॉइन की। पहले करीमनगर से एमएलए बनी। फिर 2019 में कृष्णनगर से सांसद बनी। ममता चाहती हैं कि अगर वे नैशनल पॉलिटिक्स में जाती हैं तो किसी महिला को सीएम होना चाहिए और इस हिसाब से महुआ फिट हैं। ऐसा होने पर कृष्णनगर से ममता संसद में जाएंगी।
    आगे देखना है कि ममता क्या फैसला लेती हैं?

    उत्तम मुखर्जी
    उत्तम मुखर्जी
    झारखण्ड के रहनेवाले हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पत्रकारिता के क्षेत्रमें सक्रिय हैं। कई बड़े मीडिया घरानों के महत्वपूर्ण पदों में काम करने का अनुभव।

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