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सेमीकॉन 2.0 पर सरकार की मुहर से अब चिप मेड इन इंडिया होगी


रामस्वरूप रावतसरे


केंद्र सरकार ने 17 जुलाई को सेमीकॉन 2.0 पर मुहर लगा दी। इस योजना पर कुल 1,27,500 करोड़ खर्च किए जाएंगे। फोन से फाइटर जेट तक का दिमाग यानी चिप अब भारत में बनेगा। मकसद भारत को दुनिया का बड़ा सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। भारत अब तक इन चिप्स के लिए चीन, ताइवान या अमेरिका पर निर्भर रहा है। अब इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, डिफेंस, एयरोस्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे जरूरी क्षेत्रों के लिए चिप अब मेड इन इंडिया होगी। इसके फायदे इससे कहीं ज्‍यादा हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले पर कहा, हमारे युवाओं की ताकत से चलने वाला ‘सेमीकॉन 2.0’ सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के हर पहलू को मजबूत करेगा। ‘सेमीकॉन 2.0’ से ज्‍यादा इन्‍वेस्‍टमेंट आएगा। हमारे युवाओं के लिए बेहतरीन मौके बनेंगे। सप्लाई चेन मजबूत होगी और अहम सेक्टर में टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
सिर्फ कारखाने लगा लेना काफी नहीं है, उनमें लगने वाली मशीनें और कच्चा माल भी तो चाहिए। चिप बनाने में बहुत खास तरह की मशीनें, केमिकल्स और गैस इस्तेमाल होती हैं। सेमिकॉन 2.0 के तहत उन कंपनियों को भारी इंसेंटिव मिलेगा, जो ये कच्चा माल और मशीनें भारत में बनाएंगी। इससे देश में हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग का नया दौर शुरू होगा।
जानकारों के अनुसार चिप जहां बनती है, उस कारखाने को फैब कहते हैं। भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। अब सरकार देश में अलग-अलग तरह के फैब जैसे- सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब लगाने पर पूरा जोर दे रही है। चिप बनने के बाद उसे एक सुरक्षित पैकेज में डाला जाता है और उसकी टेस्टिंग होती है, ताकि गैजेट में लगने के बाद वो फेल न हो, इसे एटीएमपी और  ओएसएटी कहते हैं। सरकार इस पैकेजिंग और टेस्टिंग के लिए दुनिया की सबसे एडवांस तकनीक को भारत लाने की कोशिश कर रही है और कंपनियों को इसके लिए पैसा और मदद दे रही है।
जानकारों के अनुसार चिप जितनी छोटी होती है, वो उतनी ही तेज और एडवांस मानी जाती है। भारत में अभी 28एनएम से 110एनएम तकनीक पर काम हो रहा है। लेकिन दुनिया आगे बढ़ रही है. इसलिए, और ज्यादा एडवांस चिप टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए भारत अब देश-विदेश के बड़े रिसर्च संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा।
अश्विनी वैष्‍णव के अनुसार इतने बड़े कारखानों को चलाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत होगी होनहार युवाओं की। देश के 315 विश्वविद्यालयों में करीब 68,000 छात्र आधुनिक चिप डिजाइन की ट्रेनिंग ले चुके हैं। अब इस योजना के तहत इंजीनियरिंग के छात्रों को फैब, क्लीन रूम और सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी हाई-लेवल ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे सीधे नौकरी के लिए तैयार हो सकें।
12 बड़े प्रोजेक्ट पासः सेमिकॉन 1.0 में अब तक देश में चिप बनाने और पैकेजिंग के 12 मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट मंजूर हो चुके हैं। इन प्रोजेक्ट्स में कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आ चुका है। इनमें 1 सिलिकॉन फैब, 1 सिलिकॉन कार्बाइड फैब, 1 गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और 9 पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं। भारत में चिप का कामर्शियल प्रोडक्‍शन शुरू भी कर दिया है। एक और बड़ी यूनिट इसी साल शुरू होने वाली है। 24 स्टार्टअप और एमएसएमई के डिजाइन प्रोजेक्ट्स को सरकार से सीधा पैसा मिला है। वहीं, 105 स्टार्टअप्स को चिप डिजाइन करने वाले महंगे और अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर फ्री में दिए गए हैं।
विषेषज्ञों के अनुसार जब चिप विदेश से मंगाने की बजाय भारत में ही बनेगी, तो उस पर लगने वाला इंपोर्ट टैक्स और ट्रांसपोर्ट का खर्चा बचेगा। लंबे समय में इसका सीधा असर आपके स्मार्टफोन, लैपटॉप और कारों की कीमतों पर पड़ेगा. वे सस्ते हो सकते हैं। जब बाजार में 1.27 लाख करोड़ रुपये उतरेंगे, तो नई फैक्ट्रियां बनेंगी। इन फैक्ट्रियों में इंजीनियरों से लेकर मशीन ऑपरेटर, लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग तक, लाखों युवाओं को सीधे रोजगार मिलेगा।
देश की सुरक्षाः आज हर मिसाइल, रडार और फाइटर जेट में चिप लगती है। विदेशी चिप में हैकिंग या डेटा चोरी का खतरा हमेशा रहता है। अपनी खुद की चिप होने से हमारी सेना और देश का डेटा एकदम सुरक्षित रहेगा।

रामस्वरूप रावतसरे