व्यंग : आप हमारे लीडर नही हो …!

पहले दिल्ली और लखनऊ में टिकट के लिए हाथ फैलाते हैं फिर जनता के पास आकर वोट के लिए । अगर आपकी दिल्ली -लखनऊ में बात नही बनी तो वहीं विचारों में मतभेद बताकर आप दूसरी पार्टी में भी छलांग लगाकर कूदने से बाज नही आते हो । अगर पिछले 5 साल अच्छे से मन लगाकर कार्य किया होता तो आप यूँ हमारी सेवा के नाम पर पार्टियों से टिकट की भीख नही मांगनी पड़ती । खुद बुलाकर पार्टी टिकट देती ।

…. आप सभी ने लोकतंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है । पिछले 70 सालों से आज भी गरीब जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए टकटकी लगाए इन्तजार कर रही है । आपका स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन हम आज भी दो वक्त की रोटी और तन में एक अदद कपड़े की आस में भटक रहा है । आपकी पहली पीढ़ी , दूसरी पीढ़ी और तीसरी पीढ़ी विदेशों से पढाई करके महंगी महंगी गाड़ियों में घूमते घूमते लोकतंत्र के अग्रिम पंक्ति के सिपाही बन जाते हैं । लेकिन हम लाखों -हजारों आज भी ऐसे गरीब परिवार हैं जिनके बच्चों को केवल इसलिए पढाई छोड़नी पड़ती है क्योंकि उनके पास रोजगार नही है उनकी हर पीढी बीतते दिन के साथ इतिहास बन जाती है । अब तो हमें शिक्षा भी भार जैसी महसूस होती है । लेकिन आप नही बदलेंगे …..बदलेंगे तो हम क्योंकि हम आपके वोटर हैं ।

हमारा क्या हम तो वोटर हैं और वो भी ईमानदार वोटर । सोंचिये आप तो अवसर देखकर पाला बदल लेते हैं कहीं हम भी ……तो फिर आपका कोई वजूद भी नही बचेगा । आप कहीं भी लुढको या पलटो हमे क्या ? बस जो बड़ी बड़ी बातें चुनाव से पहले करते हो ,घड़ियाली आंसू बहाते हो । ये सब ढोंग अब हमें समझ में आने लगा है ।अब बहुत हुआ हमे हमारे अधिकार चाहिए । हमे वो तमाम मूलभूत सुविधाएँ चाहिए जो आपने आज तक हमे नसीब नही होने दी ।

आप सोंचते हो कि आप हमारे लीडर हो ! नही , अगर आप हमारे लीडर होते तो आपको इधर उधर लुढ़कना नही पड़ता । क्योंकि हमारी ताकत इतिहास के पन्नो में दर्ज है । असल में आप हमारे लीडर हो ही नही क्योंकि अब आप खुद पार्टियों के पास जाकर टिकट की भीख मांगते हो जबकि पहले हमारे चुने हुए लीडर को पार्टियां खुद अपना उम्मीदवार घोषित करती थी । अब आप ही बताओ कि आप हमारे लीडर कैसे हुए ? आप अवसरो के लीडर हो और इसीलिए अब हमें आपसे कोई उम्मीद भी नही ।

चुनाव यूंहिं आते जाते रहेंगे और शायद आपका ढोंग भी जारी रहेगा लेकिन इस लोकतंत्र पर कल भी हमारा विश्वास था , आज भी है और आने वाले समय में भी रहेगा । इस बार हम बड़ी मात्रा में वोट डालने जायेंगे इसलिए नही की आप जैसे आलसी ,अवसरवादी और संकीर्ण सोंच वालों को मौक़ा देना है बल्कि इसलिए कि हम एक अच्छा ,जिम्मेदार और शसक्त लीडर चुन सकें ………. आगे फिर कभी लिखूंगा अभी तो पूरा चुनाव बचा है । एक आम वोटर हूँ । अपने देश का जागरूक नागरिक हूँ। एक युवा हूँ । वोट करूँगा ……

अनुज हनुमत

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