लेखक परिचय

अनिल गुप्ता

अनिल गुप्ता

मैं मूल रूप से देहरादून का रहने वाला हूँ! और पिछले सैंतीस वर्षों से मेरठ मै रहता हूँ! उत्तर प्रदेश मै बिक्री कर अधिकारी के रूप मै १९७४ मै सेवा प्रारम्भ की थी और २०११ मै उत्तराखंड से अपर आयुक्त के पड से सेवा मुक्त हुआ हूँ! वर्तमान मे मेरठ मे रा.स्व.सं. के संपर्क विभाग का दायित्व हैऔर संघ की ही एक वेबसाइट www.samvaadbhartipost.com का सञ्चालन कर रहा हूँ!

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अनिल गुप्ता

indiaआज १४ अगस्त है.आज ही के दिन १४ अगस्त १९४७ को देश का विभाजन हुआ था और पाकिस्तान नाम से एक अलग देश का निर्माण हुआ था.पाकिस्तान आज के दिन अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है.१५ अगस्त १९४७ को भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है.इसी दिन महँ क्रन्तिकारी ,देशभक्त योगिराज मह्रिषी अरविन्द का जन्मदिन भी है.१५ अगस्त १९४७ को मह्रिषी अरविन्द ने कहा था की नियति ने इस भारत भूखंड को एक राष्ट्र के रूप में बनाया है. और ये विभाजन अस्थायी है.देश के लोगों को संकल्प लेना चाहिए की चाहे जैसे भी हो और चाहे कोई भी रास्ता अपनाना पड़े विभाजन समाप्त होंकर पुनः अखंड भारत का निर्माण होना चाहिए.इसीलिए देश में रा.स्व.स.द्वारा प्रति वर्ष १४ अगस्त को अखंड भारत दिवस मनाया जाता है.और देश को पुनः अखंड और सम्पूर्ण बनाने का संकल्प करोड़ों स्वयंसेवकों द्वारा देश भर में मनाया जाता है.
कुछ लोगों को अखंड भारत शब्द प्रयोग समझ नहीं आता है.लेकिन ये एक सर्व सामान्य जानकारी की बात है की पिछले लगभग बारह सौ वर्षों में भारतवर्ष या हिंदुस्तान की सीमायें लगातार सिकुड़ती गयी हैं.और जहाँ भी हिन्दुओं की आबादी घटी है वही भाग भारत से अलग हो गया है.राजनीतिक रूप से इस ”जम्बुद्वीप” क्षेत्र में अनेकों राज्य थे लेकिन उन सब में सांस्कृतिक रूप से एक ही राष्ट्र तत्व मौजूद था.लेकिन जिसेआज म्यांमार कहते हैं वो ब्रह्मदेश,बांग्लादेश,पाकिस्तान १९३७ से १९४७ के मध्य ही भारत से अलग हुए थे.और आज ये तीनों देश ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं.और जब तक नियति द्वारा निर्धारित अखंडता को पुनः स्थापित नहीं किया जायेगा तब तक ये अशांति समाप्त नहीं होगी.इसके लिए जैसा की कुछ राजनीतिक नेता कहते हैं पहले भारत पाकिस्तान बांग्लादेश का एक महासंघ बनाने की दिशा में प्रयास होना चाहिए.उसके बाद अपने इतिहास का सबको बोध कराया जाना चाहिए.ताकि एक दुसरे के प्रति असहिष्णुता का जो वर्तमान स्वरुप है वो दूर हो सके.
अखंड भारत का संकल्प प्रति वर्ष दोहराना इसलिए भी आवश्यक है ताकि हमें ये याद रहे की हमें पुनः जुड़कर एक होना है.हमारे सामने यहूदी राष्ट्र इजराईल का उदहारण है.लगभग दो हज़ार वर्षों तक दुनिया के सत्तर देशों में विस्थापित जीवन बिताते हुए और हर प्रकार के अत्याचार और भेदभाव का शिकार बनने (भारत को छोड़कर) के बाद बीसवीं सदी के प्रारंभ में कुछ यहूदी नेताओं ने प्रतिवर्ष एक स्थान पर मिलने का क्रम प्रारंभ किया और अपने यहूदी राष्ट्र को पुनः स्थापित करने का संकल्प दोहराने का क्रम बनाया.उनका ये संकल्प लगभग आधी सदी से भी कम समय में पूरा हो गया और नवम्बर १९४७ में यहूदी राष्ट्र इजराईल का उदय हुआ.
अतः हम सब को आज १४ अगस्त को इस बात का संकल्प लेना होगा की इस प्राचीन राष्ट्र को पुनः अपना खोया हुआ गौरव प्राप्त कराने और एक संगठित,समृद्ध, शक्तिशाली सामर्थ्यवान राष्ट्र का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ाना ही हमारी नियति है.जिसे अपने पुरुषार्थ से हमें प्राप्त करना है.

 

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7 Comments on "अखंड भारत दिवस"

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डॉ. राजेश कपूर
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प्रबुद्ध पाठकों की प्रखर देशभक्ति पूर्ण टिप्प्णियां पढ कर साफ़ नज़र आता है की देश जग रहा है. ऐसे जागरूक देश को अब बहुत देर तक देश द्रोही शक्तियां अपने अधीन नहीं रख पायेंगी. चरैवेति, चरैवेति. मंजिल आयेगी, आयेगी.

Dr. Dhanakar Thakur
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“जहाँ भी हिन्दुओं की आबादी घटी है वही भाग भारत से अलग हो गया है,” इसलिए समय आ गया है की हिन्दू अपनी जनसंख्या बढ़ावें- “हम दो, हमारे चार” हमारा नारा हो. शक्तिबल या अर्थबल पर भी यदि पाकिस्तान से एका hu वा तो आपको क्या मिलेगा- पहले वहां से आपको हटाया और अब यहाँ आकर वे ही rahne लगेंगे वल्कि रह रहे है बंगलादेशी २ करोड़ – हर दिन धर्म परिवर्त्तन kar हिन्दू लडकी मुस्लिम से शादी करती है तो इसका उलटा भी होना चाहिए- मुझे एक ईसाई makyalee sundaree से 20 varsh की awasthaame prem सा हवा- मेरे… Read more »
शिवेन्द्र मोहन सिंह
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शिवेन्द्र मोहन सिंह
ये मुर्दों का देश है….. यहाँ जिन्दा लोग नहीं बल्कि मुर्दे रहते हैं, कुछ भी हो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है…. धीरे धीरे मरता हुआ देश है. चेतनता और सजगता के अभाव को ही मुर्दा कहा जाता है. पेट को दो रोटी मिल जाए, वो चाहे गुलामी से मिल जाए या ठगी से या चोरी से क्या जलालत से, लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता है. आप अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बर्मा की बात कर रहे हैं? यहाँ तो बचा हुआ भी जा रहा है फिर भी फ़िक्र किसे है? जहीन हो के भी जाहिल लोग रहते हैं यहाँ… Read more »
Anil Gupta
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भाई शिवेन्द्र जी,आप जो कह रहे हैं उसे गलत नहीं कह सकते.लेकिन अगर यथ्स्थिति को जैसे का तैसे स्वीकार करके हाथ पर हाथ धर कर केवल अफ़सोस करने के लिए बैठे रहेंगे तो उनमे और हम्मे क्या अंतर रह जायेगा?यही पुरुषार्थ तो हमें करना है की जो सोये हैं उन्हें जगाएं,जो भूखे हैं उन्हें खिलाएं.जो अभाव ग्रस्त हैं उन्हें किस प्रकार सहयोग करें.जब क्रिकेट का मेच होता है तो यही सब लोग जिनका आपने जिक्र किया है देश की टीम जीते उसके लिए किस प्रकार टीवी स्क्रीन पर नजरें गडाए बैठे रहते हैं और हरने पर दुखी और जीतने पर… Read more »
शिवेन्द्र मोहन सिंह
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शिवेन्द्र मोहन सिंह
अनिल भाई जी, जो चिंतन कर रहा है वो जरूर कहीं न कहीं देश सेवा ही कर रहा है, ये मेरा मानना है और मैं भी कर रहा हूँ. अन्यथा निराश भाव से टिप्पणी नहीं करता. खेल को ले के हार जीत का भाव पहले हुआ करता था, अब नहीं. हाँ सैनिकों के वध पर समाज जरूर थोड़ा सा उद्देलित हुआ था छोटे शहरों में, न की बड़े शहरों में. अभी देश में जो आर्थिक संकट चल रहा है उसके समाधान में पूरा देश सहयोग दे सकता है, बिना कुछ किये, महज अपने स्वविवेक से स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से.… Read more »
parshuramkumar
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दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनायेंगे ,गिलगित से गारू पर्वत तक आज़ादी पर्व मनाएंगे |१५ अगस्त १९४७ को मह्रिषी अरविन्द ने कहा था की नियति ने इस भारत भूखंड को एक राष्ट्र के रूप में बनाया है. और ये विभाजन अस्थायी है.देश के लोगों को संकल्प लेना चाहिए की चाहे जैसे भी हो और चाहे कोई भी रास्ता अपनाना पड़े विभाजन समाप्त होंकर पुनः अखंड भारत का निर्माण होना चाहिए |

parshuramkumar
Guest

15 agast ka din kahta aazadi abhi adhuri hai अखंड भारत का संकल्प प्रति वर्ष दोहराना इसलिए भी आवश्यक है ताकि हमें ये याद रहे की हमें पुनः जुड़कर एक होना है iदिन दूर नहीं खन्डित भारत को पूनः अखण्ड बनाऍंगे

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